फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   test for thalassemia is must for pregnant ladies

शादी से पहले कुंडली मिलाने से ज्यादा जरूरी है ये डॉक्टरी जांच

Fri, 08 May 2015 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 08 May 2015 01:22 PM IST
विज्ञापन
test for thalassemia is must for pregnant ladies

खून न बनने की बीमारी थैलेसीमिया माता-पिता से बच्चों में आती है। इसलिए गर्भधारण करने से पहले इस बीमारी के कैरियर होने की जांच करानी चाहिए।

विज्ञापन


यदि एक बार थैलेसिमिक बच्चे का जन्म हो गया तो उसे जीवन भर खून चढ़ाना पड़ता है क्योंकि इस बीमारी में खून नहीं बनता है। समय पर खून न चढ़ाने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
विज्ञापन


संजय गांधी पीजीआई के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की हेड प्रो. शुभा फड़के के अनुसार थैलेसीमिया का पता मात्र पांच सौ रुपये खर्च करके लगाया जा सकता है।

इसमें मां या पिता की जांच की जाती है। यदि दोनों इस बीमारी के कैरियर हैं तो बच्चे को भी थैलेसीमिया होने की संभावना होती है। इसलिए माता-पिता बनने से पहले दंपति को थैलेसीमिया जांच करानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


हीमोग्लोबिन ए-2 नाम की इस जांच से ये पता लगाया जा सकता है कि मां या पिता थैलेसीमिया के कैरियर तो नहीं हैं। इसके अलावा इस बीमारी का पता लगाने का कोई तरीका नहीं है। इसी जांच से जानलेवा अनुवांशिक बीमारी से बच्चे को बचाया जा सकता है।

डॉक्टर की सलाह से हो सकता है बचाव

test for thalassemia is must for pregnant ladies

हर गर्भवती को खून की जांच कर ये पता लगाना चाहिए कि कहीं मां इस बीमारी की कैरियर तो नहीं। यदि मां कैरियर निकलती है तो फिर पिता की जांच भी करायी जाती है।

यदि दोनों ही थैलेसीमिया के कैरियर निकलते हैं तो गर्भस्थ शिशु की तीन माह के अंदर खून की जांच की जाती है। यदि बच्चा बीमारी से ग्रस्त मिलता है तो परिवार को गर्भपात कराने की सलाह दी जाती है।

प्रो. शुभा फड़के ने बताया कि संजय गांधी पीजीआई में हीमोग्लोबिन ए-2 जांच की सुविधा उपलब्ध है।

ऐसे परिवार जिनमें पहले थैलेसीमिया बीमारी किसी को रही हो वहां विवाह के पहले जन्म कुंडली मिलाने से बेहतर है कि लड़के-लड़की का एचबीए-2 परीक्षण कराया जाए।

यदि दोनों में इसका स्तर बढ़ा होता है उनके शिशु में मेजर थैलेसीमिया बीमारी की आशंका 20 प्रतिशत रहती है। चिकित्सक की सलाह से थैलेसीमिया सहित अन्य अनुवांशिक बीमारियों से बचा जा सकता है।

इनके ल‌िए जरूरी है जेनेटिक काउंसलिंग

test for thalassemia is must for pregnant ladies

परिवार में पहले किसी बच्चे में पैदाइशी विकृति हो।

पहले से किसी को थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, मस्क्युलर डिस्ट्राफी बीमारी हो।

परिवार में कोई मंदबुद्धि बच्चा या व्यक्ति हो।

यदि माता-पिता दोनों ही किसी अनुवांशिक बीमारी के वाहक हों।

गर्भधारण करते समय महिला की उम्र 35 साल से अधिक हो।

गर्भधारण के बाद मिर्गी की दवा खाई हो या फिर कोई संक्रमण हो गया हो।

परिवार में जन्मजात मृत शिशु पैदा हुआ हो।

परिवार के एक से अधिक सदस्य एक जैसी ही बीमारी से ग्रस्त हों।

महिला का पति के परिवार से खून का रिश्ता हो।

गर्भ की अल्ट्रासाउंड जांच में किसी खराबी का पता चला हो।

आंत की बनावट में खराबी हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed