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किरायेदारों ने बेच दी एलडीए की 100 करोड़ की जमीन, ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कारनामा
Wed, 19 Jun 2019 04:27 PM IST
ishwar ashish
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 19 Jun 2019 04:27 PM IST
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आवासीय उपयोग के लिए दिए भूखंड पर चल रहा एनसीसी का कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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एलडीए की करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन किरायेदारों ने न्यू हैदराबाद में टीजी न्यू सिविल लाइंस योजना में बेच डाली है। प्राइम लोकेशन की इस जमीन को बेचने में जहां प्राधिकरण के साथ हुए लीज अनुबंध का उल्लंघन किया गया, वहीं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक स्व. प्रो. बीरबल साहनी की स्मृति में उनकी पत्नी व पद्मश्री स्व. सावित्री साहनी की वसीयत के विपरीत विक्रय कर दिया गया।
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एलडीए का कहना है कि इस जमीन को बेचने का अधिकार वसीयत के आधार पर बने बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट के पदाधिकारियों को नहीं है। एलडीए ने जमीन वापस लेने के लिए नोटिस जारी किया है। संयुक्त सचिव व इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की संपत्तियों की प्रभारी अधिकारी ऋतु सुहास का कहना है कि न्यू हैदराबाद में बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम दो भूखंड 428 और 429 हैं।
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जांच से पता चला कि आवासीय उपयोग के लिए दिए गए भूखंड 429 में एनसीसी का कार्यालय चल रहा है। वहीं, गार्डन लीज पर भूखंड 428 में शादी-समारोह कराए जाने के साक्ष्य मिले हैं। भूखंड 429 को बिल्डर कंपनी एडी बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया है।
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अब कंपनी के निदेशक अरुण द्विवेदी ने एलडीए में नामांतरण के लिए आवेदन करते हुए एनसीसी का कब्जा हटवाकर उन्हें कब्जा दिलाने की मांग की है। इसके बाद जब जांच कराई गई तो पूरा फ्रॉड सामने आया। इस मामले में खुद का स्वामित्व बता रहे रमेश कुमार सरन, साजला अग्रवाल, नीरव अग्रवाल, रिचा अग्रवाल, प्राची अग्रवाल को नोटिस भेजा गया है। इन सभी को 25 प्रतिशत का हिस्सेदार मानते हुए ट्रस्ट के सचिव डॉ. श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने बैनामा कर दिया। इस तरह बैनामा भी एलडीए को भूखंड काटने के लिए उपविभाजन शुल्क से बचने को किया गया।
एनसीसी का चल रहा कार्यालय तो बची जमीन
एनसीसी का कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
एनसीसी का चल रहा कार्यालय तो बची जमीन
एलडीए ने अब लीज खत्म कर अपने कब्जे में जमीन लेने की कार्रवाई शुरू की हो। वहीं, यह जमीन कब्जे में जाने से इसलिए बची रही, क्योंकि वहां एनसीसी का कार्यालय है। बिल्डर को जमीन बेचे जाने के बाद एनसीसी कमांडेंट ने अपना कार्यालय हटाने के लिए मना कर दिया।
उनका कहना है कि पिछले 40 साल से लगातार उनसे ट्रस्ट किराया ले रहा है। वहीं, एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट की तरफ से खुद किराया जमा नहीं किया गया।
प्रो. बीरबल साहनी को जानें
प्रो. बीरबल साहनी को पैलियोसाइंसेज के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य के लिए दुनिया में जाना जाता है। पैलियोसाइंसेज के लिए पूरा जीवन लगाने के बाद उन्होंने एक वैज्ञानिक संस्थान की स्थापना भी की। यह अब लखनऊ में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) के नाम से जाना जाता है। पूरी दुनिया में पैलियोसाइंसेज में काम करने वाले यह चंद वैज्ञानिक संस्थानों में से यह एक है
एलडीए ने अब लीज खत्म कर अपने कब्जे में जमीन लेने की कार्रवाई शुरू की हो। वहीं, यह जमीन कब्जे में जाने से इसलिए बची रही, क्योंकि वहां एनसीसी का कार्यालय है। बिल्डर को जमीन बेचे जाने के बाद एनसीसी कमांडेंट ने अपना कार्यालय हटाने के लिए मना कर दिया।
उनका कहना है कि पिछले 40 साल से लगातार उनसे ट्रस्ट किराया ले रहा है। वहीं, एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट की तरफ से खुद किराया जमा नहीं किया गया।
प्रो. बीरबल साहनी को जानें
प्रो. बीरबल साहनी को पैलियोसाइंसेज के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य के लिए दुनिया में जाना जाता है। पैलियोसाइंसेज के लिए पूरा जीवन लगाने के बाद उन्होंने एक वैज्ञानिक संस्थान की स्थापना भी की। यह अब लखनऊ में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) के नाम से जाना जाता है। पूरी दुनिया में पैलियोसाइंसेज में काम करने वाले यह चंद वैज्ञानिक संस्थानों में से यह एक है
1935 में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने दी जमीन
एनसीसी बिल्डिंग
- फोटो : अमर उजाला
1935 में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने दी जमीन
वैज्ञानिक हितों को पूरा करने के लिए इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने भूखंड 429 की करीब 1.10 लाख वर्गफीट जमीन आवासीय उपयोग के लिए लीज पर दी। वहीं, भूखंड 428 की भी इतनी ही क्षेत्रफल की जमीन पर वैज्ञानिक शोध के लिए गार्डन बनाया जाना था।
प्रो. साहनी की पत्नी की वसीयत में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि इन जमीनों और बनी हुई इमारत को वैज्ञानिक शोध के लिए आने वाले शोधार्थी व वैज्ञानिकों के रुकने के लिए उपयोग किया जाए। इसके उलट उनकी स्मृति में बने बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट ने एक में कार्यालय और दूसरे में मैरिज लॉन शुरू कर दिया। यह सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक और उनके योगदान के लिए अपमानजनक है।
ट्रस्ट के सचिव को भी नोटिस
संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट के सचिव डॉ. श्याम चंद्र श्रीवास्तव को भी नोटिस भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि सावित्री साहनी की वसीयत के मुताबिक संपत्तियों से आने वाले प्रतिफल की धनराशि ट्रस्ट के खाते में जमा होनी थी। ऐसी कोई सूचना एलडीए को नहीं दी गई। ऐसे में इस जमीन के बेचे जाने का पैसा कहां गया?।
वैज्ञानिक हितों को पूरा करने के लिए इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने भूखंड 429 की करीब 1.10 लाख वर्गफीट जमीन आवासीय उपयोग के लिए लीज पर दी। वहीं, भूखंड 428 की भी इतनी ही क्षेत्रफल की जमीन पर वैज्ञानिक शोध के लिए गार्डन बनाया जाना था।
प्रो. साहनी की पत्नी की वसीयत में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि इन जमीनों और बनी हुई इमारत को वैज्ञानिक शोध के लिए आने वाले शोधार्थी व वैज्ञानिकों के रुकने के लिए उपयोग किया जाए। इसके उलट उनकी स्मृति में बने बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट ने एक में कार्यालय और दूसरे में मैरिज लॉन शुरू कर दिया। यह सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक और उनके योगदान के लिए अपमानजनक है।
ट्रस्ट के सचिव को भी नोटिस
संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि बीरबल सावित्री साहनी फाउंडेशन ट्रस्ट के सचिव डॉ. श्याम चंद्र श्रीवास्तव को भी नोटिस भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि सावित्री साहनी की वसीयत के मुताबिक संपत्तियों से आने वाले प्रतिफल की धनराशि ट्रस्ट के खाते में जमा होनी थी। ऐसी कोई सूचना एलडीए को नहीं दी गई। ऐसे में इस जमीन के बेचे जाने का पैसा कहां गया?।