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दस लाख की आबादी झेल रही जल संकट, गोमती में अमोनिया और पानी की कमी से बढ़ी दिक्कत

Mon, 10 Jun 2019 01:24 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: सौरभ दिक्षित Updated Mon, 10 Jun 2019 01:24 AM IST
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Ten lakhs people suffered from the scarcity of water
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
एक तो भीषण गर्मी ऊपर से पानी की किल्लत। राजधानी का एक बड़ा हिस्सा जल संकट की चपेट में है। कहीं दूषित जलापूर्ति हो रही तो कहीं लोगों को भरपूर पानी नहीं मिल रहा। गोमती नदी के कम होते जल स्तर और बढ़ते अमोनिया के कारण करीब दस की आबादी को जरूरत से कम पानी मिल रहा है।
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यह हाल तब है जब महापौर ने खुद सिंचाई मंत्री को पत्र लिखकर गोमती में कम होते पानी की समस्या का समाधान करने का आग्रह किया था। सिंचाई विभाग के अफसर सीधे तौर पर कह रहे कि बारिश का इंतजार करें, जल स्तर बढ़ जाएगा।
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गोमती नदी में सीवर गिरने से अमोनिया का स्तर पांच पीपीएम तक पहुंच जा रहा है जबकि यह शून्य होना चाहिए। अमोनिया का स्तर शून्य करने के लिए रोजाना सुबह-शाम गोमती बैराज केगेट खोले जा रहे हैं। पहले से ही पानी कमी के चलते गेट खोले जाने से नदी में और पानी कम हो जा रहा। जिससे बालागंज और ऐशबाग जलकल को नदी से पर्याप्त कच्चा पानी मिल पा रहा है।
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गऊघाट पर कम हो गया गोमती का जलस्तर, कीचड़ से फंस जाते हैं पंप
गऊघाट नदी पर जलस्तर पर इस समय 346.2 फीट रह गया है जबकि यह 346.8 फीट होना चाहिए। जलस्तर कम होने पर पानी के साथ कीचड़ भी चला जाता है। जो पम्प में फंस जाता है और वह पूरी क्षमता से पानी नहीं खींच पाते। इसका सीधा असर पानी की सप्लाई पर पड़ता है। जलकल के अधिशासी अभियंता ओपी बताते हैं कि गेट खोले जाने के कारण अमोनिया लेवल तो जीरो हो जा रहा है मगर उससे पानी पूरा नहीं मिल पा रहा है। जलकल के महाप्रबंधक एसके वर्मा कहते हैं कि अब तो बारिश का इंतजार है कि पानी बरसे और गोमती में जलस्तर बढ़ तो समस्या दूर हो।


सिंचाई विभाग का अजीब-गरीब तर्क
गोमती में पानी की कमी पर सिंचाई विभाग (शारदा सहायक) लखनऊ मंडल के एक्सईएन सूर्य प्रकाश गुप्ता ने अजीबोगरीब तर्क दिया कि बारिश आएगी तभी नदी में पानी आ जाएगा। गऊ घाट पंपिंग स्टेशन पर पानी की कमी को लेकर उन्हाेंने कहा कि गोमती में प्राकृतिक स्रोतों से पानी आता है, नहर से पानी की सप्लाई भी बारिश होने पर की जाएगी। फिलहाल सप्लाई बढ़ाने का और कोई विकल्प उनके पास नहीं है। वहीं बैराज के गेट खोले जाने से उन्हाेंने इनकार किया और कहा कि विभाग को नदी में पानी का लेवल बनाए रखना है, गर्मी में पानी वैसे ही कम होने लगता है, इसलिए अभी बैराज नहीं खोले जा रहे हैं।
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