लखनऊ से नई दिल्ली के बीच चलने वाली सेमी हाईस्पीड ट्रेन तेजस एक्सप्रेस को पटरी पर लाने की कवायदें तेज कर दी गई हैं। कानपुर से दिल्ली के बीच आधा दर्जन से अधिक राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि तेजस राजधानी एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए बेहतर विकल्प होगी। वहीं यूनियनें आशंका जता रही हैं कि तेजस को राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों से टक्कर मिलेगी।
तेजस एक्सप्रेस देश की पहली ऐसी ट्रेन है, जिसका संचालन पूरी तरह से भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के हाथों में होगा। ट्रेन का रैक गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के वॉशिंग पिट पर खड़ा है, जबकि इसे सितंबर से शुरू करने की बात रेलवे बोर्ड कह रहा है। संचालन को लेकर आईआरसीटीसी व रेलवे बोर्ड अधिकारी लगातार बैठकें व मंथन कर रहे हैं।
ट्रेन का शेड्यूल जारी किया जा चुका है, जबकि किराया आदि भी जल्द ही फाइनल कर लिया जाएगा। दरअसल, कानपुर से दिल्ली के बीच करीब आठ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें चलती हैं। इसमें राजेंद्रनगर नई दिल्ली राजधानी (12309), हावड़ा नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (12301), डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस (12423), सियालदाह राजधानी एक्सप्रेस (12313), भुवनेश्वर नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (22823), भुवनेश्वर नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (22811), रांची नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (20839) प्रमुख हैं।
ये ट्रेनें रात दो बजे से सुबह साढ़े पांच बजे के बीच कानपुर पहुंचती हैं। वहां से चलकर पांच से साढ़े पांच घंटे में दिल्ली पहुंच जाती हैं। जबकि तेजस एक्सप्रेस सुबह 6.10 बजे लखनऊ जंक्शन से चलकर सुबह 7.20 बजे कानपुर पहुंच जाएगी। ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद है कि राजधानी के यात्रियों के लिए तेजस एक बेहतर विकल्प बनकर उभरेगी।
राजधानी से अधिक सुविधाएं भी यात्रियों को तेजस में मिलेंगी और ट्रेन करीब पांच घंटे में दिल्ली पहुंचा देगी। हालांकि, रेलवे में निजीकरण का विरोध करने वाली यूनियनों की दलील है कि लखनऊ से दिल्ली जाने पर तेजस एक्सप्रेस को कानपुर से आगे के रूट पर राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों से चुनौती मिलनी तय है।