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समझ के फेर में लटकी 1425 शिक्षकों की भर्ती
दीप सिंह/लखनऊ
Updated Fri, 20 Dec 2013 12:23 AM IST
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न शासन से कोई रोक न अदालत की, फिर भी चयनित 1425 राजकीय शिक्षकों को नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा रहे हैं। इनका चयन पिछले साल हुआ था।
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कोर्ट के एक आदेश को समझने में हुई चूक का नतीजा है कि अभ्यर्थी एक साल से भटक रहे हैं। हाईकोर्ट नौकरी देने के लिए आदेश पर आदेश जारी कर रहा है लेकिन अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
राजकीय इंटर कॉलेजों में एलटी ग्रेड पुरुष वर्ग की नियुक्ति प्रक्रिया अक्तूबर 2012 में पूरी हो गई थी। मंडल स्तर पर ये भर्तियां आयोजित की गई थीं।
जब यह प्रक्रिया पूरी हो गई तभी कुछ अभ्यर्थी परास्नातक डिग्री के अतिरिक्त अंकों के विरोध में कोर्ट चले गए। पहले जो मेरिट बनी थी, उसमें पीजी डिग्री वालों को 15 अंकों का अतिरिक्त लाभ दिया गया था।
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कोर्ट जाने वाले अभ्यर्थियों का तर्क था कि जिन्होंने ऐसे विषय में परास्नातक किया है जो उनकेपास स्नातक में नहीं है, उन्हें अतिरिक्त अंकों का लाभ न दिया जाए।
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इसकी वजह यह बताई गई कि उनकी इस अतिरिक्त योग्यता का छात्रों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। इस पर कोर्ट ने ऐसे ही अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगाई थी, लेकिन शिक्षा विभाग केअधिकारियों ने पूरी नियुक्तियां ही रोक दीं।
बाद में दूसरे अभ्यर्थी भी कोर्ट गए। इस पर कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को स्पष्ट करते हुए यह भी कह दिया कि जिन्होंने ऐसे विषय में परास्नातक किया है जो उनके पास स्नातक में था तो उनको नियुक्तियां दे दी जाएं।
इस आदेश के बाद शासन ने भी माना और कहा कि नियुक्तियों पर कोई रोक नहीं है। शासन ने इस पर शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर जवाब भी मांगा है कि समान विषय में परास्नातक करने वालों की नियुक्तियां क्यों रुकी हैं।
मुरादाबाद सहित अन्य कुछ मंडलों केअभ्यर्थी अलग-अलग कोर्ट गए तो फिर कोर्ट ने वहां केसंयुक्त शिक्षा निदेशकों से भी नियुक्ति पत्र देने को कहा है।
इसके बावजूद संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालयों से उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिए जा रहे। उन्हें इंतजार है कि शासन से या माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से कोई आदेश मिले तो वे नियुक्तियां दें।
ऐसे अभ्यर्थी अलग-अलग जिलों से इन आदेशों को लेकर शासन और निदेशालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें नियुक्तियां नहीं मिल रहीं।
कानपुर से आए अभिषेक पांडेय और इलाहाबाद से आए अभिषेक सिंह कहते हैं कि अधिकारी भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि कोई रोक नहीं है, इसके बावजूद उन्हें नियुक्तियां नहीं मिल रहीं।
जब कोर्ट और शासन की ओर से कोई रोक नहीं है तो इसमें निदेशालय को सीधे मंडलों को पत्र लिखकर कार्रवाई करनी चाहिए। आश्चर्यजनक यह भी है कि इसी आधार पर पांच मंडलों में 76 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।