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Lucknow News: किट खत्म होने से टीबी की जांच पर संकट
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लखनऊ। किट खत्म होने से टीबी के मरीजों की जांच पर संकट आ गया है। सरकारी अस्पलातों में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) की जांच के लिए किट की व्यवस्था केंद्र सरकार की ओर से की जाती है।
टीबी की बीमारी पर जब सामान्य दवाएं असर नहीं करती हैं तो उसे ड्रग रेजिस्टेंट टीबी कहा जाता है। जब एक साथ कई दवाएं बेअसर हो जाती हैं तो उसे एमडीआर टीबी कहा जाता है। टीबी की बीमारी पर दवाएं बेअसर होने पर उन्हें अगले स्तर की दवाएं दी जाती हैं। इसलिए टीबी के मरीजों में दवा प्रतिरोध की जांच की जाती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में सीबीनॉट व ट्रूनॉट मशीन मौजूद हैं।
इस समय पांच अस्पतालों में सीबीनॉट और 18 में ट्रूनॉट मशीन से एमडीआर टीबी की जांच होती है, मगर पिछले कुछ समय से सीबीनॉट मशीन की किट खत्म हो गई है। इससे एमडीआर की जांच प्रभावित हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार, टीबी संक्रामक बीमारी है। एमडीआर टीबी की पहचान में देरी होने से इलाज का संकट होता है। दूसरी समस्या यह है कि एमडीआर टीबी रोगी से एमडीआर टीबी ही फैलता है। यह और भी अधिक गंभीर समस्या है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल के मुताबिक, फिलहाल ट्रूनॉट मशीन से एमडीआर टीबी की पहचान की जा रही है। किट आते ही सीबीनॉट मशीन से जांच होने लगेगी।
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टीबी की बीमारी पर जब सामान्य दवाएं असर नहीं करती हैं तो उसे ड्रग रेजिस्टेंट टीबी कहा जाता है। जब एक साथ कई दवाएं बेअसर हो जाती हैं तो उसे एमडीआर टीबी कहा जाता है। टीबी की बीमारी पर दवाएं बेअसर होने पर उन्हें अगले स्तर की दवाएं दी जाती हैं। इसलिए टीबी के मरीजों में दवा प्रतिरोध की जांच की जाती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में सीबीनॉट व ट्रूनॉट मशीन मौजूद हैं।
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इस समय पांच अस्पतालों में सीबीनॉट और 18 में ट्रूनॉट मशीन से एमडीआर टीबी की जांच होती है, मगर पिछले कुछ समय से सीबीनॉट मशीन की किट खत्म हो गई है। इससे एमडीआर की जांच प्रभावित हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार, टीबी संक्रामक बीमारी है। एमडीआर टीबी की पहचान में देरी होने से इलाज का संकट होता है। दूसरी समस्या यह है कि एमडीआर टीबी रोगी से एमडीआर टीबी ही फैलता है। यह और भी अधिक गंभीर समस्या है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके सिंघल के मुताबिक, फिलहाल ट्रूनॉट मशीन से एमडीआर टीबी की पहचान की जा रही है। किट आते ही सीबीनॉट मशीन से जांच होने लगेगी।
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