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त्वचा के जरिये भी टीबी की जांच संभव
Mon, 25 Mar 2019 01:29 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Mon, 25 Mar 2019 01:29 AM IST
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टीबी की बीमारी
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लखनऊ। टीबी की जांच कई स्तरों पर की जा सकती है। बलगम के साथ ही स्किन टेस्ट के जरिए भी टीबी का पता लगाया जाता है। केजीएमयू सहित विभिन्न डाट्स केंद्रों पर यह सुविधा उपलब्ध है। भविष्य में इसे विस्तारित करने की योजना है।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि स्किन टेस्ट (मोंटेक्स टेस्ट) में इंजेक्शन द्वारा स्किन में दवा डाली जाती है, जिसे 48 से 72 घंटे बाद देखा जाता है। स्किन पर चकत्ते पड़ जाते हैं तो मान लिया जाता है कि रिजल्ट पॉजीटिव है। इससे टीबी की पुष्टि होती है। इसी तरह बायोप्सी और माइक्रोस्कोपिक जांच में जिस स्थान पर गांठ या गिल्टी होती है वहां से इंजेक्शन द्वारा द्रव्य निकालकर उसकी जांच की जाती है। इससे पता चलता है कि संबंधित स्थान पर टीबी के जीवाणु हैं या नहीं। जीन एक्सपर्ट टेस्ट के जरिए करीब दो घंटे में टीबी की जानकारी मिल जाती है। इसमें बलगम प्रयोग किया जाता है। हालांकि अभी राजधानी में जीन एक्सपर्ट टेस्ट की सुविधा नहीं है।
एचआईवी पीड़ितों में खतरा ज्यादा
लखनऊ। एचआईवी ग्रसित लोगों में टीबी का खतरा ज्यादा होता है। क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती है। ऐसी स्थिति में एचआईवी के मरीजों को टीबी की भी जांच कराते रहना चाहिए। यह जानकारी डॉ. एके सिंह ने दी। वह टीबी जागरूकता के तहत आशियाना में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि टीबी से देश में हर तीन मनट में दो मरीजों की मौत हो जाती है। यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैलता है। इससे हड्डियों, लिम्फ ग्रंथियां, आंत, मूत्र व प्रजनन तंत्र के अंग, त्वचा और मस्तिष्क भी टीबी की चपेट में आ जाती है। इससे बचने के लिए लगातार खांसी आने पर टीबी की जांच करा लेनी चाहिए। बलगम टेस्ट और सीने के एक्स-रे से टीबी की जानकारी मिल जाती है।
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राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि स्किन टेस्ट (मोंटेक्स टेस्ट) में इंजेक्शन द्वारा स्किन में दवा डाली जाती है, जिसे 48 से 72 घंटे बाद देखा जाता है। स्किन पर चकत्ते पड़ जाते हैं तो मान लिया जाता है कि रिजल्ट पॉजीटिव है। इससे टीबी की पुष्टि होती है। इसी तरह बायोप्सी और माइक्रोस्कोपिक जांच में जिस स्थान पर गांठ या गिल्टी होती है वहां से इंजेक्शन द्वारा द्रव्य निकालकर उसकी जांच की जाती है। इससे पता चलता है कि संबंधित स्थान पर टीबी के जीवाणु हैं या नहीं। जीन एक्सपर्ट टेस्ट के जरिए करीब दो घंटे में टीबी की जानकारी मिल जाती है। इसमें बलगम प्रयोग किया जाता है। हालांकि अभी राजधानी में जीन एक्सपर्ट टेस्ट की सुविधा नहीं है।
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एचआईवी पीड़ितों में खतरा ज्यादा
लखनऊ। एचआईवी ग्रसित लोगों में टीबी का खतरा ज्यादा होता है। क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती है। ऐसी स्थिति में एचआईवी के मरीजों को टीबी की भी जांच कराते रहना चाहिए। यह जानकारी डॉ. एके सिंह ने दी। वह टीबी जागरूकता के तहत आशियाना में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि टीबी से देश में हर तीन मनट में दो मरीजों की मौत हो जाती है। यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैलता है। इससे हड्डियों, लिम्फ ग्रंथियां, आंत, मूत्र व प्रजनन तंत्र के अंग, त्वचा और मस्तिष्क भी टीबी की चपेट में आ जाती है। इससे बचने के लिए लगातार खांसी आने पर टीबी की जांच करा लेनी चाहिए। बलगम टेस्ट और सीने के एक्स-रे से टीबी की जानकारी मिल जाती है।
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