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ताइक्वांडो: एसोसिएशन के विवाद में खिलाड़ियों के भविष्य से खिलवाड़
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अनुराग बाजपेई
लखनऊ। खेलों में जब एसोसिएशन के नाम पर खेल होने लगे तो खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ तय हो जाता है। ताइक्वांडो को लेकर इन दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा है। अभिभावक बड़ी उम्मीदों के साथ अपने बच्चों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग लेने भेजते हैं, लेकिन उन्हें इसका अंदाजा ही नहीं हो पाता कि मान्यता न होने के कारण इस खेल की एसोसिएशन वर्तमान में महज कमाई का जरिया बनकर रह गई है।
जब तक राष्ट्रीय स्तर पर असल ताइक्वांडो एसोसिएशन को लेकर चले आ रहे विवाद का अंत नहीं होता है तब तक इस खेल की किसी भी स्तर की ताइक्वांडो प्रतियोगिता में मिलने वाले पदक और प्रमाणपत्र का कोई औचित्य नहीं है। आपसी गतिरोध के चलते हाल यह है कि खुद पर मान्यता प्राप्त ताइक्वांडो एसोसिएशन का ठप्पा लगाकर दुकान चलाने वालों की लंबी फौज खड़ी हो गई है, जो अपनी प्रतियोगिताओं में बच्चों को बरगलाकर उनके अभिभावकों से मनमर्जी पैसा वसूल रहे हैं। इसमें स्कूलों के मार्शल आर्ट के प्रशिक्षक अहम भूमिका निभाते हैं। ये कमीशन के नाम पर बच्चों की इन फर्जी प्रतियोगिताओं में एंट्री करवाते हैं और अपनी जेब भरते हैं।
प्रदेश में इस समय पांच ताइक्वांडो एसोसिएशन-
उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यहां उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो एसोसिएशन (राजकुमार गुट), उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो (रजत दीक्षित गुट), उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो एसोसिएशन (जिम्मी आर जगित्यानी गुट), उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो एसोसिएशन (अनिल कुमार बाॅबी गुट), यूपी गुडविल ताइक्वांडो (जावेद खान गुट) नाम की ये पांच एसोसिएशन हैं जो असली होने का दावा करती हैं। इन सभी एसोसिएशनों ने एक साल में स्टेट से लेकर नेशनल चैंपियनशिप तक कराने के नाम पर लाखों रुपयों की कमाई भी कर ली है। खेल विभाग भी यूपी ताइक्वांडो एसोसिएशन के नाम पर चल रहे संगठनों पर नकेल कसने में असफल है। भले ही विभाग की ओर से अभी तक किसी भी ताइक्वांडो एसोसिएशन को मान्यता नहीं मिली है, लेकिन इन सभी एसोसिएशनों की स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन केडी सिंह बाबू स्टेडियम में किया जाता है, जो क्षेत्रीय खेल कार्यालय से संचालित होता है।
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मान्यता पर सभी संघों के बीच खींचतान
ताइक्वांडो एसोसिएशन में राष्ट्रीय स्तर से चला आ रहा गतिरोध अभी तक कायम है। इस कारण खेल मंत्रालय ही नहीं इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने भी किसी संगठन काे अबतक मान्यता नहीं दी है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी और साई के पूर्व कार्यकारी निदेशक संजय सारस्वत का कहना है कि देश में असली ताइक्वांडो एसाेसिएशन की मान्यता को लेकर विवाद जारी है। वर्तमान में इंडिया ताइक्वांडो को वर्ल्ड ताइक्वांडो से अस्थायी रूप से मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसे भारत सरकार और इंडियन ओलंपिक की ओर अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग तो ले सकते हैं, लेकिन सरकारी लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मान्यता को लेकर विवाद पर तमाम एसोसिएशनों ने खेल मंत्रालय के अलावा कोर्ट में अपना पक्ष रखा है, लेकिन किसी के दावे को अभी तक एकमत होकर स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में किसी एक गुट का पक्ष लेना सही नहीं होगा।
जब तक खेल मंत्रालय की ओर से किसी ताइक्वांडो एसोसिएशन में मान्यता नहीं मिल जाती है, तब तक खेल विभाग से किसी भी एसोसिएशन को संबंद्धता नहीं मिलेगी। इस स्थिति में प्रदेश में किसी ताइक्वांडो एसोसिएशन को कोई भी सरकारी लाभ नहीं दिया जाएगा। - डॉ. आरपी सिंह (निदेशक, खेल)
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लखनऊ। खेलों में जब एसोसिएशन के नाम पर खेल होने लगे तो खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ तय हो जाता है। ताइक्वांडो को लेकर इन दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा है। अभिभावक बड़ी उम्मीदों के साथ अपने बच्चों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग लेने भेजते हैं, लेकिन उन्हें इसका अंदाजा ही नहीं हो पाता कि मान्यता न होने के कारण इस खेल की एसोसिएशन वर्तमान में महज कमाई का जरिया बनकर रह गई है।
जब तक राष्ट्रीय स्तर पर असल ताइक्वांडो एसोसिएशन को लेकर चले आ रहे विवाद का अंत नहीं होता है तब तक इस खेल की किसी भी स्तर की ताइक्वांडो प्रतियोगिता में मिलने वाले पदक और प्रमाणपत्र का कोई औचित्य नहीं है। आपसी गतिरोध के चलते हाल यह है कि खुद पर मान्यता प्राप्त ताइक्वांडो एसोसिएशन का ठप्पा लगाकर दुकान चलाने वालों की लंबी फौज खड़ी हो गई है, जो अपनी प्रतियोगिताओं में बच्चों को बरगलाकर उनके अभिभावकों से मनमर्जी पैसा वसूल रहे हैं। इसमें स्कूलों के मार्शल आर्ट के प्रशिक्षक अहम भूमिका निभाते हैं। ये कमीशन के नाम पर बच्चों की इन फर्जी प्रतियोगिताओं में एंट्री करवाते हैं और अपनी जेब भरते हैं।
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प्रदेश में इस समय पांच ताइक्वांडो एसोसिएशन-
उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यहां उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो एसोसिएशन (राजकुमार गुट), उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो (रजत दीक्षित गुट), उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो एसोसिएशन (जिम्मी आर जगित्यानी गुट), उत्तर प्रदेश ताइक्वांडो एसोसिएशन (अनिल कुमार बाॅबी गुट), यूपी गुडविल ताइक्वांडो (जावेद खान गुट) नाम की ये पांच एसोसिएशन हैं जो असली होने का दावा करती हैं। इन सभी एसोसिएशनों ने एक साल में स्टेट से लेकर नेशनल चैंपियनशिप तक कराने के नाम पर लाखों रुपयों की कमाई भी कर ली है। खेल विभाग भी यूपी ताइक्वांडो एसोसिएशन के नाम पर चल रहे संगठनों पर नकेल कसने में असफल है। भले ही विभाग की ओर से अभी तक किसी भी ताइक्वांडो एसोसिएशन को मान्यता नहीं मिली है, लेकिन इन सभी एसोसिएशनों की स्टेट और नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन केडी सिंह बाबू स्टेडियम में किया जाता है, जो क्षेत्रीय खेल कार्यालय से संचालित होता है।
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मान्यता पर सभी संघों के बीच खींचतान
ताइक्वांडो एसोसिएशन में राष्ट्रीय स्तर से चला आ रहा गतिरोध अभी तक कायम है। इस कारण खेल मंत्रालय ही नहीं इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने भी किसी संगठन काे अबतक मान्यता नहीं दी है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी और साई के पूर्व कार्यकारी निदेशक संजय सारस्वत का कहना है कि देश में असली ताइक्वांडो एसाेसिएशन की मान्यता को लेकर विवाद जारी है। वर्तमान में इंडिया ताइक्वांडो को वर्ल्ड ताइक्वांडो से अस्थायी रूप से मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसे भारत सरकार और इंडियन ओलंपिक की ओर अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग तो ले सकते हैं, लेकिन सरकारी लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मान्यता को लेकर विवाद पर तमाम एसोसिएशनों ने खेल मंत्रालय के अलावा कोर्ट में अपना पक्ष रखा है, लेकिन किसी के दावे को अभी तक एकमत होकर स्वीकार नहीं किया गया है। ऐसे में किसी एक गुट का पक्ष लेना सही नहीं होगा।
जब तक खेल मंत्रालय की ओर से किसी ताइक्वांडो एसोसिएशन में मान्यता नहीं मिल जाती है, तब तक खेल विभाग से किसी भी एसोसिएशन को संबंद्धता नहीं मिलेगी। इस स्थिति में प्रदेश में किसी ताइक्वांडो एसोसिएशन को कोई भी सरकारी लाभ नहीं दिया जाएगा। - डॉ. आरपी सिंह (निदेशक, खेल)