लखनऊ में 11 को हुआ स्वाइन फ्लू, अस्पतालों को चेतावनी
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राजधानी में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) से पीड़ित मरीजों के इलाज में लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आलमबाग के अवध अस्पताल एंड हार्ट सेंटर में स्वाइन फ्लू के दो मरीजों का इलाज चलता रहा और सीएमओ कार्यालय को इसकी सूचना नहीं दी गई। बुधवार को मामले की जानकारी सीएमओ कार्यालय को मिली तो मौके पर पहुंची टीम वहां का नजारा देख दंग रह गई।
अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड की व्यवस्था किए बिना स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जा रहा था। आननफानन में वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज को एसजीपीजीआई के लिए रेफर किया गया जबकि दूसरे मरीज का इलाज अस्पताल में ही चल रहा है। स्वाइन फ्लू को लेकर अस्पताल द्वारा बरती गई लापरवाही पर सीएमओ ने अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए रजिस्ट्रेशन रद्द करने की चेतावनी दी है।
इन दो नए मरीजों के बाद राजधानी में स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या 11 हो गई है। बुधवार को अवध अस्पताल में दो मरीजों के होने का पता चलते ही सीएमओ के निर्देश पर डॉ. अकमल और डॉ. शक्ति आनंद सुबह दस बजे अस्पताल पहुंचे।
सीएमओ ऑफिस को नहीं दी थी जानकारी
पता चला कि कैलाशपुरी के रहने वाले 34 वर्षीय एक व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज की हालत नाजुक होने पर उसका वेंटिलेटर पर इलाज चल रहा था।
कैलाशपुरी के भर्ती मरीज में मंगलवार शाम को पीजीआई की जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। जबकि तालकटोरा कॉलोनी के रहने वाले 40 वर्षीय व्यक्ति को बुधवार सुबह को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। दोनों मरीजों का इलाज अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अजय कुमार कर रहे थे।
अस्पताल में भर्ती दो मरीजों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद भी सीएमओ कार्यालय को उनकी जानकारी नहीं दी गई। यहां तक कि अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड की भी कोई व्यवस्था नहीं थी और अन्य मरीजों के साथ उनका इलाज होता अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से नाराज सीएमओ ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया और संतोषजनक जवाब न मिलने पर पंजीकरण रद्द करने की चेतावनी दी है।
आइसोलेशन वार्ड तो था ही नहीं
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम ये रहा कि अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड की कोई भी व्यवस्था नहीं थी और इसके बाद भी मरीजों का इलाज चल रहा था। अस्पताल प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही अस्पताल में भर्ती और इलाज के लिए पहुंचने वाले दूसरे मरीजों को संक्रमण की चपेट में आने का खतरा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसी बात की चिंता सता रही है कि कहीं अस्पताल के आइसीयू में भर्ती दूसरे मरीज भी इसकी चपेट में न आ जाएं। अवध अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों का इलाज कैसे हो रहा था इसपर भी सवाल उठने लगा है।
मालूम हो कि स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों की जान बचाने के लिए टेमीफ्लू दवा दी जाती है। मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर और स्टाफ को सेफ्टी किट मुहैया कराई जाती है। सरकारी अस्पतालों के अलावा किसी प्राइवेट अस्पताल में न तो टेमीफ्लू दवा है और न ही किट। किस तरह से मरीजों का इलाज किया गया और उनको कुछ होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा इसपर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
सरकारी में अव्यवस्था, निजी में मनमानी
स्वाइन फ्लू को लेकर सरकारी अस्पतालों में तो अव्यवस्था का माहौल है ही निजी अस्पताल भी मनमानी करने पर अमादा हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को आइसोलेट करने से बचा गया और घर पर इलाज करने में स्वास्थ्य विभाग ने अधिक दिलचस्पी दिखाई।
अवध अस्पताल भी इसी राह पर चले और नियमों को धता बताकर गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों का मनमाना इलाज चलता रहा। स्वाइन फ्लू (एच1एन1) से पीड़ित किसी मरीज का इलाज चल रहा है तो उसकी जानकारी सीएमओ कंट्रोल रूम के नंबर 0522-2622080 या स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर 18001805145 पर दे सकते हैं।
इसके अलावा एसजीपीजीआई और केजीएमयू को निर्देश दिया गया है कि स्वाइन फ्लू की जांच के लिए पहुंचने वाले मरीजों का सैंपल जमा करने से पहले उसका एड्रेस प्रूफ और दो फोन नंबर जरूर लेना है।