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UP: भर-राजभर जाति में पिछड़ापन तो मिला, पर गोंड से रोटी-बेटी के रिश्ते नहीं; 17 जिलों में सर्वे पूरा

Sun, 22 Oct 2023 08:52 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 22 Oct 2023 08:52 AM IST
सार

अब भर-राजभर से जुड़ी संस्था ने ओआरजीआई में फिर आवेदन देकर उन्हें एसटी का दर्जा देने की मांग की है। इसमें कहा गया है कि तीन राज्यों महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भर को एसटी का दर्जा प्राप्त है। भर, राजभर और गोंड एक ही हैं। जब गोंड को यूपी के 17 जिलों में एसटी का दर्जा प्राप्त है तो भर व राजभर जातियों को यह हक क्यों नहीं दिया जा रहा है। 

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Survey work completed related to the demand for Scheduled Tribe status for Bhar-Rajbhar caste in UP
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

यूपी में भर-राजभर जाति को अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग से संबंधित सर्वे का काम पूरा हो चुका है। डाटा के प्रारंभिक विश्लेषण में सामने आया है कि भर-राजभर जातियों में अति पिछड़ापन तो है, लेकिन गोंड जनजाति से उनके रोटी-बेटी के संबंध नहीं हैं। हालांकि, डाटा विश्लेषण का काम अभी जारी है। सर्वे रिपोर्ट शीघ्र ही शासन को सौंपे जाने की उम्मीद है।
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अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल भर-राजभर समेत 18 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने का प्रस्ताव दो बार भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (ओआरजीआई) से खारिज हो चुका है। अब भर-राजभर से जुड़ी संस्था ने ओआरजीआई में फिर आवेदन देकर उन्हें एसटी का दर्जा देने की मांग की है। 
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इसमें कहा गया है कि तीन राज्यों महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भर को एसटी का दर्जा प्राप्त है। भर, राजभर और गोंड एक ही हैं। जब गोंड को यूपी के 17 जिलों में एसटी का दर्जा प्राप्त है तो भर व राजभर जातियों को यह हक क्यों नहीं दिया जा रहा है। 
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इससे संबंधित याचिका हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। बता दें, ब्रिटिश इंडिया में भर को क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट में शामिल जातियों के तहत रखा गया था। बाद में इन्हें विमुक्त जाति के रूप में परिभाषित किया गया और यूपी में ओबीसी श्रेणी दी गई। राजभर विमुक्त जाति में शामिल नहीं है, पर यह जाति भी यहां ओबीसी में ही शामिल है।
 

भर-राजभर जाति की संस्था की ओर से उन्हें एसटी में शामिल करने की मांग पर उप्र. अनुसूचित जाति एवं जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के जरिये 17 जिलों-महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र, संत कबीरनगर, कुशीनगर, चंदौली और भदोही में सर्वे कराया गया था। 

 

ये वे जिले हैं, जहां गोंड को जनजाति का दर्जा प्राप्त है। सूत्रों के अनुसार, इन दिनों प्रशिक्षण संस्थान सर्वे के डाटा का विश्लेषण कर रहा है। दरअसल, किसी जाति को तभी एसटी का दर्जा मिल सकता है, जब उसकी प्रवृत्ति आदिम हो। विशिष्ट संस्कृति हो और दुनिया से कटे हुए स्थानों पर उसका वास हो। 

 

मुख्य धारा में शामिल लोगों से घुलने-मिलने में उन्हें संकोच हो और पिछड़ापन दिखता हो। भर-राजभर की संस्था ने गोंड से संबंध बताए हैं, इसलिए यह भी देखा जा रहा है कि भर-राजभर के गोंड से रोटी-बेटी के रिश्ते हैं या नहीं। 

 

सर्वे से जुड़े कार्मिकों का कहना है कि अब तक जितने डाटा का विश्लेषण हुआ है, उसमें भर-राजभर और गोंड के बीच रोटी-बेटी के संबंध नहीं मिले हैं। इस मामले में ओरआरजी को अंतिम रिपोर्ट क्या भेजी जाएगी, इसका निर्णय शासन स्तर पर होगा।
 
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