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Lucknow News: शिकायत के बाद जमुना झील की जांच के लिए पहुंची टीम

Sun, 12 Mar 2023 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Mar 2023 02:00 AM IST
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survey for jamuna jheel encroachment area
ऐशबाग की करीब 50 एकड़ में फैली जमुना झील को बचाने की कवायद फिर शुरू हो गई है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब से शिकायत के बाद शनिवार को एडीएम प्रशासन बिपिन कुमार मिश्रा की अगुआई में जिला प्रशासन, एलडीए, नगर निगम और राजस्व विभाग की टीम ने जमुना झील के सीमांकन के लिए मौके पर जांच की। अब झील का राजस्व रिकॉर्ड भी एडीएम प्रशासन ने एलडीए, नगर निगम और तहसील से मांगा है, जिससे झील का सुंदरीकरण करते हुए इसे पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जा सके।
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झील बचाओ अभियान के सदस्यों की शिकायतों के बाद पहली बार झील की उच्चस्तरीय जांच शुरू हुई है। 2020 से लगातार अधिकारियों के निरीक्षण और निर्देश की शून्य परिणाम वाली कार्यवाही चालू रही है। जांच करने पहुंचे अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड मिलने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि झील की सीमाएं क्या हैं? सीमांकन होने के बाद पहला काम अधूरे बाउंड्रीवाॅल को पूरा कराना होगा। अभी 80 फीसदी बाउंड्रीवाॅल यहां झील की बनी हुई है। दो हिस्से में बाउंड्रीवाल नहीं होने से झील की जमीन को पाटकर वहां कब्जा चालू भी अधिकारियों को मिला। एडीएम प्रशासन ने निरीक्षण के समय मिट्टी डालकर पाटने के काम को तुरंत रुकवाने का आदेश अधिकारियों को दिया है। सीमांकन होने के बाद ही आगे काम करने की अनुमति जमीन पर अपना दावा करने वालों को होगी। जमीन पर अपना दावा करने वालों से भी अपने दस्तावेज देने का आदेश एडीएम प्रशासन ने किया है।
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8.75 करोड़ रुपये खर्च कर चुका एलडीए
एलडीए के अधिकारियों ने बताया कि करीब 12 साल पहले बसपा सरकार में जमुना झील को संवारने का काम किया गया था। इस दौरान करीब 8.75 करोड़ रुपये खर्च कर बाउंड्रीवाल, पाथवे, एंट्री गेट आदि बनाए गए थे। सुंदरीकरण के यह काम तभी से अधूरे पड़े हुए हैं। झील बचाओ अभियान के संयोजक और पूर्व पार्षद गणेश कनौजिया, सदस्य गौरव बाजपेई का कहना है कि तीन साल से अधिक समय से जमुना झील को संवारने और कब्जे हटवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बाद भी काम अभी पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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पूर्व पार्षद गणेश कनौजिया का कहना है कि पिछले दिनों मंडलायुक्त से अवैध कब्जों की शिकायत की गई थी। इसमें बताया गया कि ऐशबाग के मालवीय नगर में मौजूद झील पर भू-माफिया की निगाह बनी हुई है। यहां बड़े पैमाने पर झील को पाटने का काम चालू है जिससे इन जमीनों पर कब्जा कर निर्माण किए जा सकें। इससे झील के स्वरूप को खतरा पैदा हो गया है।
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