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शेल्टर होम बनाने में भी यूपी बना ‘पुअर परफॉर्मर स्टेट’, सुप्रीम कोर्ट नाराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 20 Aug 2018 11:52 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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स्वच्छता सर्वेक्षण समेत अन्य केंद्रीय योजनाओं में पिछड़ने के बाद अब शहरी बेघरों के लिए आश्रय गृहों (शेल्टर होम) के निर्माण में भी यूपी का परफॉर्मेंस बेहद खराब पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक लाभार्थियों के मद्देनजर प्रदेश में जितने शेल्टर होम बनाए जाने थे, उतने नहीं बनाए गए।
इस पर रिपोर्ट में यूपी को ‘पुअर परफॉर्मर स्टेट’ करार दिया गया है। वहीं, कानपुर को ‘एक्सट्रिमली पुअर सिटी’ बताया गया है। इस स्थिति से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को शेल्टर होम निर्माण के लिए रोडमैप पेश करने का आदेश दिया है।
बता दें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शहरों में रहने वाले बेघर लोगों के लिए वर्ष 2015 में शेल्टर होम के निर्माण की योजना शुरू की गई थी। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम और सूडा के अधीन काम करने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को सौंपी गई थी। मानक के मुताबिक एक लाख की आबादी पर कम से कम एक शेल्टर होम बनाने थे।
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वहीं, शहरी बेघर गरीबों को चिह्नित करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सर्वे कराया गया था। इसमें यूपी में 1,54,101 लाभार्थी मिले थे। सर्वे रिपोर्ट में अकेले कानपुर में ही 80 हजार लाभार्थी होने की बात कही गई थी।
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इस पर रिपोर्ट में यूपी को ‘पुअर परफॉर्मर स्टेट’ करार दिया गया है। वहीं, कानपुर को ‘एक्सट्रिमली पुअर सिटी’ बताया गया है। इस स्थिति से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को शेल्टर होम निर्माण के लिए रोडमैप पेश करने का आदेश दिया है।
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बता दें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शहरों में रहने वाले बेघर लोगों के लिए वर्ष 2015 में शेल्टर होम के निर्माण की योजना शुरू की गई थी। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम और सूडा के अधीन काम करने राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को सौंपी गई थी। मानक के मुताबिक एक लाख की आबादी पर कम से कम एक शेल्टर होम बनाने थे।
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वहीं, शहरी बेघर गरीबों को चिह्नित करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सर्वे कराया गया था। इसमें यूपी में 1,54,101 लाभार्थी मिले थे। सर्वे रिपोर्ट में अकेले कानपुर में ही 80 हजार लाभार्थी होने की बात कही गई थी।
फिर से सप्ताह भर में थर्ड पार्टी सर्वेक्षण का आदेश
सूडा ने जांच समिति की रिपोर्ट के आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा कि रिपोर्ट में 1.54 लाख लाभार्थियों में से अकेले कानपुर में 80 हजार शहरी बेघर होने की बात कही गई है, जो व्यवहारिक नहीं लग रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने शहरों में रहने वाले बेघर गरीबों का फिर से सप्ताह भर में सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया। कहा, सर्वेक्षण थर्ड पार्टी से कराया जाए।