सुप्रीम कोर्ट में गृह विभाग के सचिव तलब, नाबालिग मुस्लिम लड़की ने दाखिल की थी याचिका
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यूपी की एक नाबालिग लड़की की शादी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के गृह सचिव को 23 सितंबर को पेशी पर बुलाया है। यह पूरा मामला अयोध्या जिले का है। यहां रहने वाली लड़की ने 16 साल की उम्र में अपने प्रेमी के साथ जून माह में मुस्लिम रीति रिवाज से शादी कर ली थी। इसके बाद लड़की के पिता ने लड़की के प्रेमी और उसके साथियों पर अपनी बेटी का अपहरण करने का केस दर्ज कराया था।
दूसरी ओर लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। निचली अदालत ने सुनवाई के दौरान लड़की के नाबालिग होने के कारण उसे शल्टर होम भेज दिया गया था। लड़की ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में गुहार लगाई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि लड़की अगर अपने माता पिता के साथ नहीं रहना चाहती तो उसे शेल्टर होम में भेजने का आदेश सही है। इस आदेश के बाद हाईकोर्ट ने शादी को शून्य करार दे दिया था। लड़की के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि हाईकोर्ट इस तथ्य को मानने में विफल रहा है कि उसका निकाह मुस्लिम कानून के अनुसार हुआ है।
याचिका में लड़की ने अपने जीने, धार्मिक मान्यताओं का पालन करने और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए दलील दी है कि वह एक युवक से प्रेम करती है और इस साल जून में मुस्लिम कानून के अनुसार उनका निकाह हो चुका है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को है जहां गृह विभाग के सचिव को अपना जवाब दाखिल करना है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस एनवी रमन्ना और अजय रस्तोगी की पीठ के सामने राज्य सरकार के वकील ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- मुख्य सचिव अदालत में हाजिर हों। इसके बाद ही उन्हें मामले की गंभीरता समझ आएगी। अदालत ने कहा कि इस मामले में जवाब दाखिल करने का समय दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार के संबंधित विभाग ने वकील को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए।