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सुना है क्या: "विपक्षी गठबंधन से डील पक्की", "ट्रांसफर में करीबियों की मौज" और "जेन जी का खौफ"
Wed, 16 Sep 2026 11:35 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Wed, 16 Sep 2026 11:35 AM IST
सार
यूपी में चुनाव के नजदीक आते जाने से हालात लगातार बदल रहे हैं तो नेता और अफसर अपने-अपने जुगाड़ में लगे हुए हैं। वहीं, जेन जी का खौफ भी सत्ता के सिर चढ़कर बोल रहा है। देखें आज की कानाफूसी:
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी में चुनाव के नजदीक आते जाने से हालात लगातार बदल रहे हैं तो नेता और अफसर अपने-अपने जुगाड़ में लगे हुए हैं। वहीं, जेन जी का खौफ भी सत्ता के सिर चढ़कर बोल रहा है क्योंकि सभी महकमे जानते हैं कि सख्ती की तो लेने के देने पड़ जाएंगे। देखें आज की कानाफूसी:
विपक्षी गठबंधन से डील पक्की
सत्ताधारी दल से जुड़े एक पूर्व सांसद रूहेलखंड की एक विधानसभा सीट से अपनी बेटी को लड़ाना चाहते हैं। यह सीट अभी सत्ताधारी दल के ही पास है और उसके एक अन्य नेता वहां से विधायक हैं। पूर्व सांसद की इस सीट पर एकाएक सक्रियता बढ़ी तो दल के दूसरे नेता भी चौकन्ने हो गए। वहीं, पूर्व सांसद का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इसी सीट पर तैयारी करने के लिए कह दिया है। अलबत्ता, भेदिये बताते हैं कि पूर्व सांसद की विपक्षी मुख्य गठबंधन से पक्की बात हो गई है... आगे आप खुद ही समझदार हैं।
बिल्ली के भाग्य से छींका...
ट्रांसफर और चुनावी सीजन में इन दिनों 'बड़ों' के करीबियों की मौज है। खास तौर पर मलाईदार महकमों में बैठे बड़े साहबों के खासमखास मलाई काटने में बिजी हैं। ऐसे ही चार 'बढ़िया' महकमों में काबिज नौकरशाहों के निकटतम फाइलों को निपटाने में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। उनके विभाग के अन्य लोग केवल बिल्ली के भाग्य से छींका फूटने का इंतजार कर रहे हैं कि शायद कुछ मलाई उनके हिस्से आ जाए। चर्चा जोरों पर है कि करीबी अपने साहबों को बताते कुछ हैं और 'लाते' कुछ हैं। यानी उन्हें मौका देने वालों की ही जेब काटने का मौका नहीं छोड़ रहे।
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जेन जी का खौफ
पश्चिम के एक कमिश्नरेट में जेन-जी पर सख्ती को लेकर मचा बवाल अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि राजधानी में इसकी चिंगारी भड़कने के हालात बन गए। अफसरों ने मौके की नजाकत को भांपकर मान-मनौवल कर मामला सुलटा दिया, वरना लेने के देने पड़ सकते थे। खासकर स्टार वालों को यह समझने में देर लग रही है कि ये कोई विपक्ष का प्रदर्शन नहीं है। यहां सख्ती की तो उनके साथ तलवार वाले भी नप जाएंगे। वैसे भी सोशल मीडिया के जमाने में सब सार्वजनिक हो जाता है। फिर देते रहिए सफाई और काटते रहिए बड़े अफसरों और अदालतों के चक्कर।
आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाटसएप करें।
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विपक्षी गठबंधन से डील पक्की
सत्ताधारी दल से जुड़े एक पूर्व सांसद रूहेलखंड की एक विधानसभा सीट से अपनी बेटी को लड़ाना चाहते हैं। यह सीट अभी सत्ताधारी दल के ही पास है और उसके एक अन्य नेता वहां से विधायक हैं। पूर्व सांसद की इस सीट पर एकाएक सक्रियता बढ़ी तो दल के दूसरे नेता भी चौकन्ने हो गए। वहीं, पूर्व सांसद का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इसी सीट पर तैयारी करने के लिए कह दिया है। अलबत्ता, भेदिये बताते हैं कि पूर्व सांसद की विपक्षी मुख्य गठबंधन से पक्की बात हो गई है... आगे आप खुद ही समझदार हैं।
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बिल्ली के भाग्य से छींका...
ट्रांसफर और चुनावी सीजन में इन दिनों 'बड़ों' के करीबियों की मौज है। खास तौर पर मलाईदार महकमों में बैठे बड़े साहबों के खासमखास मलाई काटने में बिजी हैं। ऐसे ही चार 'बढ़िया' महकमों में काबिज नौकरशाहों के निकटतम फाइलों को निपटाने में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं। उनके विभाग के अन्य लोग केवल बिल्ली के भाग्य से छींका फूटने का इंतजार कर रहे हैं कि शायद कुछ मलाई उनके हिस्से आ जाए। चर्चा जोरों पर है कि करीबी अपने साहबों को बताते कुछ हैं और 'लाते' कुछ हैं। यानी उन्हें मौका देने वालों की ही जेब काटने का मौका नहीं छोड़ रहे।
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जेन जी का खौफ
पश्चिम के एक कमिश्नरेट में जेन-जी पर सख्ती को लेकर मचा बवाल अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि राजधानी में इसकी चिंगारी भड़कने के हालात बन गए। अफसरों ने मौके की नजाकत को भांपकर मान-मनौवल कर मामला सुलटा दिया, वरना लेने के देने पड़ सकते थे। खासकर स्टार वालों को यह समझने में देर लग रही है कि ये कोई विपक्ष का प्रदर्शन नहीं है। यहां सख्ती की तो उनके साथ तलवार वाले भी नप जाएंगे। वैसे भी सोशल मीडिया के जमाने में सब सार्वजनिक हो जाता है। फिर देते रहिए सफाई और काटते रहिए बड़े अफसरों और अदालतों के चक्कर।
आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी या समाचार हो तो 8859108085 पर व्हाटसएप करें।