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सुना है क्या: 'बदलाव को लेकर धुकधुकी' की कहानी, साथ ही माननीय से ज्यादा साहब बेचैन व कलेक्टरी की कसक के किस्से

Sun, 10 May 2026 01:35 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 10 May 2026 01:35 PM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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suna hai kya apprehension regarding impending reshuffle along with Saheb more restless than Honorable
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'बदलाव को लेकर धुकधुकी' की कहानी। इसके अलावा 'माननीय से ज्यादा साहब बेचैन' और 'कलेक्टरी की कसक' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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बदलाव को लेकर धुकधुकी

विस्तार के बाद जोरों की चर्चा है कि कुछ माननीयों की कुर्सी में अदला-बदली हो सकती है। प्रमोशन-डिमोशन टाइप कुछ हो सकता है। ये सुगबुगाहट महीने भर से चल रही है। लिहाजा उन माननीयों की नींद उड़ी है जिनका या तो रिपोर्ट कार्ड कमजोर है या फिर निष्ठा संदिग्ध है। करीब तीन माननीय तो दम साधे बैठे हैं। बयानों से दूर खुद को ‘कल्पवास’ में रखे हैं। उनका हाल बिल्कुल उन बच्चों जैसा है जो रिजल्ट आने से पहले चुप्पी की चादर ओढ़कर आध्यात्मिक हो जाते हैं।

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माननीय से ज्यादा साहब बेचैन

प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा और अनिश्चितता के बादल छंटते दिख रहे हैं। किंतु इसे लेकर जितने बेचैन माननीय हैं, उससे कहीं ज्यादा प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के साहब हैं। साहब की बड़ी-बड़ी ख्वाहिशें हैं, जिसके लिए वे काफी प्रयास में भी लगे हुए हैं। किंतु उन्हें यह डर है कि इन ख्वाहिशों के परवान चढ़ने से पहले ही कहीं विभागीय माननीय इधर-उधर न हो जाएं। ऐसे में उनके पूरे किए-कराए पर पानी फिर जाएगा। यही वजह है कि विभागीय माननीय से ज्यादा साहब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बेचैन हैं।

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कलेक्टरी की कसक

कुछ दिन पहले तमाम आईएएस अधिकारियों के तबादले हुए। कई जिलों के जिलाधिकारी बदले गए। पूर्वांचल के एक जिले के कलेक्टर साहब का भी नाम इसमें शामिल था। साहब की तैनाती जिले से हटाकर एक विभाग में की गई है। साहब अब सोशल मीडिया पर कविताएं लिख रहे हैं। उन कविताओं में साहब का दर्द झलक रहा है। साहब ने लिखा है...लक्ष्य की प्राप्ति तक नहीं रुकूंगा...अब तो वक्त बताएगा कि साहब की जीत का लक्ष्य आखिर है क्या।

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