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Suna Hai Kya: आपत्तियों के सरताज बने एक अफसर तो एक साहब का हसीन सपना ही टूट गया, पढ़ें ये कानाफूसी
Thu, 02 Apr 2026 02:11 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:11 PM IST
सार
आज की कानाफूसी में ऐसे अधिकारी की चर्चा का जिक्र है जो कि आपत्तियों का सरताज बन गए है। ये ही उनकी नई पहचान बन गया है। वहीं, सचिवालय के एक अधिकारी पर सेटिंग का खेल ऐसा हावी हो गया है कि गुपचुप ढंग से प्रमोशन की फाइल ही चलवा दी। पढ़ें, आज की कानाफूसी:
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आज की कानाफूसी में ऐसे अधिकारी की चर्चा का जिक्र है जो कि आपत्तियों का सरताज बन गए है। ये ही उनकी नई पहचान बन गया है। वहीं, सचिवालय के एक अधिकारी पर सेटिंग का खेल ऐसा हावी हो गया है कि गुपचुप ढंग से प्रमोशन की फाइल ही चलवा दी। पढ़ें, आज की कानाफूसी:
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सिर पर आपत्तियों का ताज
सत्ता दरबार के चौथे तल पर तैनात एक साहब की आजकल पहचान बदल गई है। अब नौकरशाही में उन्हें आपत्तियों के सरताज के नाम से बुलाया जाने लगा है। दरअसल, कलेक्टरी से प्रमोशन पाकर चौथे तल पर जब से पहुंचे हैं, तभी से हर फाइल पर आपत्ति लगाना उनका पसंदीदा विषय बन गया है। चर्चा है कि साहब के पास जिस महकमे की फाइल पहुंचती है, उसमें से 90 फीसदी फाइलें आपत्ति के साथ वापस कर दी जाती हैं। साहब के इस शौक का खामियाजा ऐसे कई विभागों के बजट खर्च करने की स्थिति पर पड़ने की बात कही जा रही है।
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कार्मिक कल्याण या कुछ और
सचिवालय के एक अधिकारी के मानस पर सेटिंग का ऐसा खेल हावी हुआ कि उसने बड़े ही गुपचुप ढंग से विभागीय अधिकारी के प्रमोशन की फाइल चला दी। बताते हैं कि संबंधित उच्चाधिकारियों को मामले की भनक तक न लगी और डीपीसी की प्रक्रिया पूरी हो गई। संबंधित अधिकारियों ने यह भी नहीं देखा कि डीपीसी में उस विभाग से संबंधित कोई उच्चाधिकारी भी मौजूद नहीं है। खैर, सचिवालय का वह अधिकारी इस सबके पीछे की मंशा कार्मिक कल्याण की भावना बता रहा है। हालांकि, सरकार अब इस खेल के पीछे के कारणों का पता लगा रही है।
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टूटा हसीन सपना
एक केंद्रीय एजेंसी वाले साहब का हसीन सपना टूट गया। राजधानी में अपनी बैटिंग और सियासी फील्डिंग के लिए चर्चित साहब एनसीआर जाने का ख्वाब देख रहे थे लेकिन विवादित बिल्डरों से उनकी दोस्ती ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अपने गृह जनपद में चुनाव की तैयारियों की चर्चा मुख्यालय क्या पहुंची, उनको वहीं पर लैंड करा दिया गया। अब मुश्किल यह है कि कहीं नए साहब पुरानी फाइलों को जांचने न लगें। अगर ऐसा हुआ तो कई सफेदपोशों के साथ साहब की मुश्किल भी बढ़ सकती है।
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