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सुल्तानपुर: सपा सांसद की सदस्यता रद्द करने वाली याचिका हुई खारिज, हाईकोर्ट ने ठुकराई मेनका गांधी की अपील

Thu, 15 Aug 2024 12:27 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Thu, 15 Aug 2024 12:27 AM IST
सार

Maneka Gandhi appeal: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सपा के जीते सांसद रामभुआल निषाद के चुनाव को चुनौती देने वाली मेनका गांधी की याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया।

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Sultanpur: Petition to cancel membership of SP MP rejected, High Court rejects Maneka Gandhi's appeal
भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी व सपा प्रत्याशी राम भुआल निषाद। - फोटो : amar ujala

विस्तार

 इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र से सपा के जीते सांसद रामभुआल निषाद के चुनाव को चुनौती देने वाली मेनका गांधी की याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका देरी से दाखिल की गई, जो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत बाधित है। ऐसे में याचिका खारिज की जाती है। कोर्ट ने बीते 5 अगस्त को याचिका को सुनवाई को ग्रहण करने के बिंदु पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया था। न्यायमूर्ति राजन रॉय की एकल पीठ के समक्ष मेनका गांधी द्वारा दाखिल याचिका पर याची की ओर से सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलीलें पेश की थीं।

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 भाजपा की वरिष्ठ नेता मेनका संजय गांधी ने बीती 27 जुलाई को चुनाव याचिका दाखिल की थी। याचिका में सपा सांसद के खिलाफ कथित रूप से चुनाव में भ्रष्ट आचरण करने के आरोप लगाकर सांसद के चुनाव को शून्य घोषित करने का आग्रह किया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याची के अधिवक्ता से पूछा था कि याचिका 7 दिन की देरी से क्यों दाखिल की गई। इसपर, याची के वरिष्ठ अधिवक्ता लूथरा ने कई नजीरों का हवाला देकर याचिका को सुनवाई को ग्रहण करने योग्य कहा था।
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सांसद का चुनाव हारने वाली याची मेनका का मुख्य आरोप था कि सांसद रामभुआल निषाद के खिलाफ कुल 12 अपराधिक मामले लंबित हैं। जबकि उन्होंने चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत में फार्म 26 भरते हुए सिर्फ 8 अपराधिक मामलों का खुलासा किया। याची का यह भी आरोप था कि ऐसे में सभी आपराधिक केसों का खुलासा न करना भ्रष्ट आचरण है। जो, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 100 के तहत भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। याची ने चुनाव याचिका में आग्रह किया था कि सिर्फ इसी आधार पर 38 - सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र का चुनाव शून्य करने योग्य है।
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कोर्ट ने आदेश में कहा कि याचिका चुनाव खत्म होने के बाद अधिनियम की धारा 81 में निर्धारित 45 दिन के बाद दाखिल की गई। धारा 86 में प्रावधान है कि धारा 81 में दी गई 45 दिन की सीमा का पालन न करने वाली चुनाव याचिका को हाईकोर्ट खारिज कर देगा। ऐसे में यह याचिका निर्धारित समय सीमा के बाद दाखिल होने से खारिज करने योग्य है। तदनुसार, इसे खारिज किया जाता है।

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