6765 करोड़ रुपये पर आमने सामने मोदी-अखिलेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को भुगतान किये जाने वाले 6765 करोड़ रुपये के मुद्दे पर चीनी मिलों की दलील ने केंद्र और राज्य सरकारों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
प्रदेश के गन्ना किसानों को बकाया भुगतान दिलाने के मामले में चीनी मिलों को केंद्र सरकार के रुख से थोड़ी राहत मिली है।
केंद्र के पैकेज को ढाल बनाकर निजी चीनी मिलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी खराब माली हालत का उल्लेख किया था।
केंद्र सरकार को 24 जुलाई तक हाईकोर्ट में चीनी मिलों को दिए जाने वाले पैकेज पर अपना रुख स्पष्ट करना है।
1 जुलाई को राज्य सरकार से मांगी थी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने 30 मई को गंभीर टिप्पणियां करते हुए किसानों को चार हफ्ते में बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने के आदेश दिए थे।
प्रदेश सरकार को भुगतान की प्रगति और कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ एक जुलाई को तलब किया था।
एक जुलाई को हाईकोर्ट ने 30 मई के आदेश के पालन पर जोर दिया लेकिन यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से गन्ना मूल्य भुगतान के लिए राहत मिलने का जिक्र किया।
तर्क दिया कि उन्हें वित्तीय संकट से उबारने के लिए केंद्र सरकार ने राहत देने वाली कई घोषणाएं की हैं।
केंद्र के जवाब पर टिकी निगाहें
यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन के अनुसार खुद केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान स्वीकार कर चुके हैं कि चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति बिगड़ने के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं।
वे ज्यादा गन्ना मूल्य तय करके उसके भुगतान के लिए मजबूर करती हैं। केंद्र सरकार केवल उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करती है।
यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन की इस दलील के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
अब सभी की नजरें 24 जुलाई की सुनवाई के दौरान केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के जवाब पर टिकी हुई हैं। याचिकाकर्ता राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह ने खाद्य मंत्रालय को पत्र भेजकर हाईकोर्ट में पक्ष रखने की याद दिलाई है।
कोर्ट के आदेश के पालन में सरकारें बनी रोड़ा
किसान नेता वीएम सिंह का कहना है कि मुंबई की कैंपा कोला सोसाइटी मामले में जनदबाव के बावजूद आवंटियों के पक्ष में खड़ा होने से प्रदेश और केंद्र सरकार ने इसलिए इन्कार कर दिया था कि इस मामले में हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट आदेश दे चुकी हैं।
कोर्ट का निर्णय लागू कराना सरकार का दायित्व है, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। लाखों गन्ना किसानों के पक्ष में हाईकोर्ट बकाया भुगतान के लिए आदेश कर चुकी है लेकिन सरकारें अदालत के आदेश के अनुपालन के बीच में आ खड़ी हुई हैं।
अब भी 6765 करोड़ रुपये बकाया
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद गन्ना मूल्य भुगतान गति नहीं पकड़ सका है। चीनी मिलों पर किसानों के अब भी 6765.63 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया हैं। इसमें 6124.87 करोड़ निजी मिलों पर और 649.76 करोड़ रुपये सहकारी मिलों पर बकाया है।