कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत का डीएनए एक, मुसलमान मानें कि उनके पूर्वज हिंदू: सुब्रमण्यम स्वामी
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पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि वेद-पुराणों के अलावा अब वैज्ञानिक आधार पर भी यह साबित हो चुका है कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत का डीएनए हिंदू है। अर्थात हिंदू व मुसलमान जाति में बंटे लोगों का डीएनए भी एक है। इसलिए मुसलमानों को मान लेना चाहिए कि उनके पूर्वज भी हिंदू थे।
अगर मुसलमान भी इस वैज्ञानिक सच को मान लें तो हम एक परिवार की तरह रह सकते हैं। दिक्कत तब होती है, जब भारतीय मुसलमान मोहम्मद गोरी, मोहम्मद गजनी और औरंगजेब से खुद को जोड़ते हैं।
डॉ. स्वामी रविवार को यहां गन्ना संस्थान सभागार में महामना मालवीय मिशन लखनऊ की ओर से ‘महामना एवं हिंदुत्व’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महामना ने भी सबसे पहले यह स्पष्ट कर दिया था कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है। इसलिए ही उन्होंने सबसे पहले हिंदू महासभा की स्थापना की थी।
भारतीय परंपरा हिंदूवादी परंपरा पर आधारित
डॉ. स्वामी ने कहा कि तमाम वैज्ञानिक शोधों से स्पष्ट हो चुका है कि भारतीय परंपरा एक हिंदूवादी परंपरा पर आधारित है। इसलिए सभी वर्ग व समाज के लोगों को हिंदुत्व का आदर करना चाहिए। वर्ण व्यवस्था के चलते बहुत से लोग आज भिन्न-भिन्न जाति व संप्रदाय में बंट गए हैं, उनकी घर वापसी होनी चाहिए।
स्वामी ने डॉ. आंबेडकर के नाम पर कांग्रेस द्वारा उठाई जा रही आपत्ति पर करारा प्रहार किया। कहा, जब आंबेडकर को भारत रत्न देने की बारी आई तो पं. जवाहर लाल नेहरू ने खुद भारत रत्न ले लिया। अब मौजूदा सरकार जब आंबेडकर को सम्मान दे रही है तो आपत्ति उठाई जा रही है।
साधना से मिलती है सफलता : गोविंदाचार्य
विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि महामना पं. मदन मोहन मालवीय ने सिद्ध कर दिया था कि सफलता साधनों से नहीं, बल्कि साधना से मिलती है। उन्होंने वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना ही हिंदू परंपरा के मुताबिक कराई थी। वे हमेशा से गौ, गंगा, गायत्री व गीता के बारे में ही अपनी बात करते थे।