यूपी का रण : सुभाषिनी अली ने कहा, दूसरे के काम को अपना बताकर पीठ ठोक रही सरकार
कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने कहा कि तकनीकी के क्षेत्र में, कारोबार के क्षेत्र में, सरकारी योजनाओं के माध्यम से कानपुर मंडल में बड़ी संख्या में युवाओं और लोगों को रोजगार मिला है।
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पूर्व सांसद व कम्युनिस्ट नेता सुभाषिनी अली ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार में सिर्फ इंजन ही है, विकास का डिब्बा गायब है। इसी वजह से कानपुर में विकास का पहिया जाम हो गया है। सरकार सिर्फ विकास का ढोल पीट रही है। वह सिर्फ पिछली सरकारों के कार्यों पर लीपापोती करके वाहवाही लूटना चाहती है। महानगर में मेट्रो निर्माण की शुरुआत पहले ही हो चुकी थी, भाजपा सरकार ने उसे सिर्फ आगे बढ़ाया है। इसमें उनका श्रेय नहीं हो सकता है। इसी तरह कैंट क्षेत्र से शुक्लागंज जाने वाला ओवरब्रिज जैसा पिछली सरकार में बना था, उसमें कुछ खास बदलाव नहीं आया है। कुछ दिनों से उसमें ईंट जोड़कर वर्तमान सरकार उसे अपने खाते में जोड़ रही है। मंडल के कई जिले ऐसे भी हैं, जहां पर अस्पतालों में डॉक्टर तक नहीं हैं।
सरकार ने ऐसे लोगों से रोजगार छीना जो रोजाना कमाते-खाते थे
रोजगार की हालत इस सरकार में सबसे ज्यादा खराब है। सरकार ने ऐसे लोगों से रोजगार छीना है, जो रोजाना कमाते-खाते थे। मीट का कारोबार गोवंश के नाम पर बंद करा दिया गया। इससे सिर्फ मुस्लिम ही नहीं दलित परिवारों से भी बड़े पैमानेे पर रोजगार छिन गया। यह सब सरकार की नीतियों की वजह से हुआ है। दलित परिवार मीट के साथ चमड़े के कारोबार से भी जुड़े रहे हैं। इसके छूट जाने से लाखों लोग बेरोजगार हो गए। उनके परिवारों के पास भोजन के लाले पड़ गए हैं। कोरोना काल को लेकर सरकार भले ही बहुत अच्छे काम का दावा कर अपनी रिपोर्ट अच्छी बना रही है, पर कानपुर की ही हालत देख लें तो स्थिति काफी नाजुक रही है। यहां पर ऑक्सीजन के लिए लोगों को तड़पते हुए देखा गया। भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने तो उस काल में सिर्फ बयानबाजी ही की। यदि जनता साथ नहीं देती तो लोग भूख से भी दम तोड़ देते।
गोवंश की हत्या कर रोजगार चाहते हैं तो यह नहीं हो पाएगा : सतीश महाना
यदि विपक्ष गोवंश की हत्या करके रोजगार पाना चाहता है तो ऐसा कभी नहीं होने पाएगा। वैसे जानकारी के लिए बता दें कि तकनीकी के क्षेत्र में, कारोबार के क्षेत्र में, सरकारी योजनाओं के माध्यम से कानपुर मंडल में बड़ी संख्या में युवाओं और लोगों को रोजगार मिला है। आगे भी सरकार हर हाथ को काम, हर परिवार को आवास की योजना पर काम कर रही। पांच वर्ष पूर्व प्रदेश और कानपुर की जो स्थिति थी, उसमें बहुत बदलाव आया है। दलित परिवारों के लिए जितना भाजपा सरकार ने अभी तक किया, उतना किसी ने नहीं किया। यही वजह है कि बड़ी संख्या में दलित बिरादरी के लोग हमारी सरकार की नीतियों का समर्थन करते हुए पार्टी से जुड़ रहे हैं।
सरकार की विकास योजनाओं को विपक्ष अपना क्यों बता रहा?
कानपुर पहले सफाई के मामले में पूरे देश में 265वें स्थान पर था। पहली बार ऐसा हुआ है कि इस शहर पर लगा गंदगी का ठप्पा हटा है। शहर अब सफाई के मामले में 75वें स्थान पर आ गया है। क्या यह भी पिछली सरकार ने ही किया था? सिर्फ ईंट रखने और शिलान्यास कर फोटो करा लेने से विकास नहीं हो जाता है। इसके लिए इच्छाशक्ति की जरूरत होती है, जो विपक्ष के पास कभी नहीं थी। मेट्रो, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर जैसी विकास योजनाएं विपक्ष की सोच से काफी दूर हैं। एक्सप्रेसवे के माध्यम से कानपुर मंडल को जोड़कर यातायात सुगम करने का काम भी इसी सरकार में संभव हो पाया है। विकास करने के लिए काम और उसकी समय सीमा तय करनी होती है, जो भाजपा सरकार में ही संभव हो पाया है। यही वजह है कि कानपुर मंडल हर क्षेत्र में पहले से काफी बेहतर हुआ है।
अतीत का झरोखा : गए थे सिफारिश लेकर... टिकट ही कट गया
बात 1985 के विधानसभा चुनाव की है। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे विश्वनाथ प्रताप सिंह। महानगर के कांग्रेसी नेता और तत्कालीन विधायक भूधर नारायण मिश्र बताते हैं, चुनाव से कुछ महीने पहले की बात है। मेरे क्षेत्र के सुरेश दीक्षित थे। उनको जिला प्रशासन परेशान कर रहा था। मैं यह मामला लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया। पर, मुख्यमंत्री उस समय मुरादाबाद में हुए दंगे के संबंध में बैठक कर रहे थे। बैठक खत्म होने के बाद जैसे ही वह बाहर आए, मैंने सुरेश दीक्षित की बात उठाते हुए कहा कि जिला प्रशासन ठीक नहीं कर रहा है। शायद वीपी सिंह दंगे को लेकर तनाव में थे, इसी वजह से उन्होंने मेरी गुजारिश अनसुनी कर दी। उन्होंने उसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश जारी करने को कह दिया, जिसकी मैं सिफारिश लेकर गया था। इसे लेकर मेरे और सीएम के बीच कहासुनी हो गई। इसे मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने गांठ की तरह बांध लिया। भूधर बताते हैं, जब विधानसभा चुनाव के लिए टिकट का बंटवारा होने लगा तो वीपी सिंह ने मेरे टिकट पर अड़ंगा लगा दिया। मेरी जगह पार्टी के वरिष्ठ नेता पशुपति नाथ को प्रत्याशी बना दिया गया।