जेल में बंद दरिंदगी के आरोपी को बचाने के लिए दरोगा ने ली घूस, गिरफ्तार
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नामजद आरोपी के बेटे को दो हफ्ते पहले जेल भेजा गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दरोगा को निलंबित करके विभागीय कार्रवाई शुरू कराई है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पुलिस उपाधीक्षक उपेंद्र कुमार यादव ने बताया कि काकोरी के एक गांव में रहने वाले जौहरी प्रसाद ने अंधे की चौकी के कथित प्रभारी धीरज कुमार पर किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को हल्का करने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
इस पर निरीक्षक अनुराधा सिंह, उपनिरीक्षक सुरेंद्रनाथ तिवारी, मुख्य आरक्षी विजय चौबे, देव प्रकाश मिश्रा, मोहसिन, संतोष द्विवेदी और आरक्षी रवि शुक्ला की टीम के साथ घेराबंदी की गई। जौहरी प्रसाद से आठ हजार रुपये लेते समय उपनिरीक्षक धीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
बताया गया कि गांव की एक किशोरी साल भर पहले संदिग्ध हालात में लापता हो गई थी। उसके पिता ने जौहरी प्रसाद, उसके बेटे महेश कुमार उर्फ आडवाणी, बाबू और गोपाल पर अपहरण का आरोप लगाते हुए 10 अक्तूबर 17 को प्राथमिकी दर्ज कराई।
दो साल पहले प्रोन्नत होकर बना था दरोगा
इसके दस महीने बाद अगस्त 18 में किशोरी को बरामद करके डॉक्टरी मुआयना व मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान दर्ज कराए गए। इसमें उसने महेश पर आरोप लगाया। पुलिस ने 23 सितंबर 18 को महेश को जेल भेजा था। बेटे की रिहाई के लिए थाने, चौकी व कचहरी के चक्कर काट रहे जौहरी प्रसाद ने कुछ दिनों पहले दरोगा धीरज कुमार से संपर्क किया।
उसने विवेचना में मुकदमा हल्का करके महेश को रिहा कराने में मदद का आश्वासन देकर रिश्वत की मांग करने लगा। इस पर जौहरी प्रसाद ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की थी। संगठन के पुलिस उपाधीक्षक ने बताया कि घूस लेते पकड़े गए धीरज कुमार को आननफानन में महानगर कोतवाली ले जाकर अभियोग दर्ज कराने के साथ उसे पुलिस के हवाले किया गया।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा काकोरी थाने की अंधे की चौकी के प्रभारी धीरज कुमार को घूस लेते पकड़े जाने का अभियोग दर्ज कराने के साथ पुलिस अफसरों को जानकारी दी। पता चला कि अंधे की चौकी पर साल भर से कोई प्रभारी तैनात ही नहीं है। वहां दो बीट प्रभारी के रूप में दरोगाओं की तैनाती है।
इनमें एक बीट पर धीरज कुमार तैनात था। वह खुद को चौकी इंचार्ज बताता था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने बताया कि गोरखपुर के गगहा थाने के गांव सेनुआपार निवासी धीरज कुमार 1998 बैच का सिपाही था। वह 2016 में प्रोन्नत होकर दरोगा बना था और 17 फरवरी 2017 से काकोरी थाने पर उसकी तैनाती थी।
घूसखोरी के पीछे के खेल की होगी पड़ताल
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने अचानक छापा मारकर दरोगा धीरज कुमार को पकड़ा तो आरक्षी प्रदीप कुमार व होमगार्ड श्रीकृष्ण सैनी उसे बचाने के लिए भिड़ गए। संगठन के एक कर्मचारी को हालात काबू में करने को सर्विस पिस्टल निकालनी पड़ी।
इस बीच उपाधीक्षक ने टीम का परिचय दिया और तीन गाड़ियों से आए संगठन के कर्मचारियों ने धीरज कुमार के साथ प्रदीप व श्रीकृष्ण को भी अपनी गाड़ी में लाद लिया। महानगर थाने में प्रदीप व श्रीकृष्ण के मोबाइल फोन कब्जे में लिए और दोनों को छोड़ने के साथ धीरज कुमार के खिलाफ अभियोग दर्ज कराया।
आरोपी दरोगा धीरज कुमार को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में 10 महीने बाद किशोरी की बरामदगी हुई। डॉक्टरी मुआयने व कलमबंद बयान दर्ज कराने के बाद पुलिस ने दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट की धारा बढ़ाई।
इसके बाद विवेचना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार को सौंपी गई। सवाल उठा कि प्रभारी निरीक्षक द्वारा की जा रही विवेचना में दरोगा द्वारा मुल्जिम का नाम निकालने के नाम पर रिश्वत की मांग के पीछे खेल तो नहीं था। संगठन के उपाधीक्षक ने बताया कि अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की पड़ताल की जाएगी।