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लखनऊः साढ़ू के घर पर चादर के सहारे लटकता मिला दरोगा का शव, मचा हड़कंप

Tue, 03 Sep 2019 04:13 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 03 Sep 2019 04:13 PM IST
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sub inspector committed suicide in lucknow
धर्मेंद्र कुमार (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में महानगर स्थित सुरक्षा मुख्यालय में हेड कांस्टेबल देवी शंकर मिश्रा के गोली मारकर खुदकुशी करने के दो दिन बाद एएसआई एम धर्मेंद्र कुमार (36) ने मौत को गले लगा लिया। धर्मेंद्र का शव सोमवार सुबह जानकीपुरम स्थित सहारा एस्टेट में साढ़ू के घर पर फंदे से लटका मिला।
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सूचना पाकर पहुंची पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। शुरुआती छानबीन में पता चला है कि धर्मेंद्र कुमार भदोही में तैनात था जहां से उसे 27वीं वाहिनी पीएसी सीतापुर स्थानांतरित कर दिया गया था। वह पीएसी के अधिकारियों से पूर्वांचल की किसी वाहिनी में तबादला कराने के लिए प्रयास कर रहा था। सुनवाई न होने पर उसने जान दे दी।
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इंस्पेक्टर मो. अशरफ का कहना है कि तबादले के अलावा पारिवारिक वजह भी सामने आ रही हैं। जांच की जा रही है। इंस्पेक्टर ने बताया कि धर्मेंद्र कुमार मूलरूप से गोरखपुर का रहने वाला था। वह भदोही में एएसआई एम के पद पर तैनात था जहां से 26 अगस्त को उसका तबादला 27वीं वाहिनी सीतापुर कर दिया गया था।
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करीब 10 दिन से धर्मेंद्र और उसकी पत्नी नीलू सहारा एस्टेट में रहने वाले साढ़ू दयाशंकर के घर पर रह रहे थे। सोमवार को हरितालिका तीज की पूजा होने के चलते परिवारीजन जल्दी सोकर उठ गए थे। धर्मेंद्र आगे के कमरे में सो रहा था। उसे जगाने के लिए कमरे का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

मां व पत्नी की तबीयत नही है ठीक

इस पर परिवारीजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़ा तो चादर के सहारे धर्मेंद्र का शव लटकता देख हड़कंप मच गया। परिवारीजन रोने-पीटने लगे। सूचना पाकर गोरखपुर में सिपाही के पद पर तैनात छोटा भाई राहुल समेत अन्य परिवारीजन लखनऊ पहुंच गए। राहुल ने बताया कि उसकी मां व धर्मेंद्र की पत्नी नीतू की तबीयत ठीक नहीं है।

नीतू उपचार के लिए ही अपनी बहन के घर पर आई थी। हाल ही में उसका ऑपरेशन हुआ था। धर्मेंद्र मां व पत्नी की देखभाल के लिए घर के आसपास के जनपद में ही तैनाती चाहता था। उसने पीएसी के अधिकारियों को मिर्जापुर, बाराबंकी, वाराणसी, आजमगढ़, सोनभद्र में से एक जगह भेजने के लिए प्रार्थनापत्र भी दिए थे।

राहुल का कहना है कि कई बार उसने पीएसी मुख्यालय महानगर जाकर एडीजी व आईजी से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मुलाकात नहीं की। राहुल ने बताया कि शायद सिस्टम व अधिकारियों से परेशान धर्मेंद्र को कोई और रास्ता नहीं दिख रहा था। इसलिए उसने जान दे दी। इंस्पेक्टर ने भी तबादले और पारिवारिक वजहों से परेशान होकर खुदकुशी करने की आशंका जताई है।

शादी के बाद से ही बीमार चल रही थी पत्नी

अनुकंपा के आधार पर मिली थी नौकरी
धर्मेंद्र कुमार को अनुकंपा के आधार पर पुलिस में नौकरी मिली थी। राहुल ने बताया कि उसके पिता स्व. रामकेवल भी पुलिस में थे। वर्ष 1999 में ड्यूटी के दौरान ही उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2003 में धर्मेंद्र को एएसआई एम के पद पर नौकरी दी गई थी।

राहुल ने बताया कि धर्मेंद्र का नीतू से विवाह वर्ष 2015 में हुआ था। शादी के बाद से ही भाभी नीतू बीमार चल रही थीं। गर्भाशय की बीमारी होने के चलते उन्हें कोई संतान भी नहीं हो पाई थी। अक्सर वह उपचार के लिए लखनऊ आतीं और अपनी बहन के घर पर ठहरती थीं। ऑपरेशन के सिलसिले में करीब डेढ़ महीने से वह बहन के घर पर ही रुकी थीं।

पत्नी ने घर आने को बोला तो कहा- वह खुद लखनऊ आ रहा है
नीतू ने बताया कि ऑपरेशन के बाद उसने पति को फोन कर घर आने को कहा था। इस पर धर्मेंद्र ने कहा कि उसका तबादला हो गया है। उसने नीतू से कहा कि वह बहन के घर पर ही रुके। कुछ दिन में खुद लखनऊ आएगा। राहुल ने बताया कि धर्मेंद्र एक सप्ताह से अवकाश पर था। उसने सीतापुर पीएसी जाकर नौकरी जॉइन कर ली थी, लेकिन अवकाश लेकर अपना तबादला पूर्वांचल में कराने का प्रयास कर रहा था।
 
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