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पढ़ाई के टेंशन से माइग्रेन की गिरफ्त में मासूम
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
Updated Tue, 12 Nov 2013 10:34 AM IST
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क्या आपका बच्चा स्कूल से आकर या रास्ते में उल्टी कर रहा है? अगर हां, तो यह बच्चे के लिए अलार्मिंग स्थिति हो सकती है।
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डॉक्टरों के मुताबिक उल्टी की शिकायत के बाद माइग्रेन की बीमारी ऐसे बच्चों में मिली है।
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में सिरदर्द की समस्या माइग्रेन के लक्षण के तौर पर नहीं मिलती।
सोमवार को इंडियन अकादमी ऑफ न्यूरो साइंसेज, लखनऊ यूनिट और इंडियन अकादमी ऑफ न्यूरोलॉजी की तरफ से साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सेमिनार ‘हेडेक अपडेट-2013’ में हिस्सा लेने आए विशेषज्ञों ने कुछ ऐसी ही जानकारी दी।
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एसजीपीजीआई में न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. यूके मिश्रा ने बताया कि माइग्रेन की शुरुआत बच्चों में सिरदर्द से नहीं होती।
इसमें वह बच्चे सबसे ज्यादा माइग्रेन का शिकार बनते हैं, जिनके परिजनों को माइग्रेन की शिकायत रही हो।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि बच्चों में माइग्रेन की वजह पढ़ाई का टेंशन बन रहा है। इन दिनों सुबह स्कूल जल्दी जाने के समय ठंड से अब उनका एक्सपोजर बढ़ जाएगा।
बच्चे को उल्टी होने की शिकायत होती है। अगर ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर की वजह से है तो उल्टी की शिकायत लगातार रहेगी। जरूरी है कि तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
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इस दौरान इसके खानपान, भूख, सर्दी से एक्सपोजर, नींद की कमी, पढ़ाई का दबाव का पूरी तरह ध्यान रखने की जरूरत है। यह समस्या आम तौर पर छह साल से 14 साल तक के बच्चों में अब तक देखने में आई है।
दवाएं भी माइग्रेन की वजह
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज लुधियाना के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. यशपाल सिंह ने बताया कि दवाओं की अधिकता की वजह से सिरदर्द की शिकायत सामने आ रही हैं।
इसे मेडिकेशन ओवरयूज हेडेक का नाम दिया गया है। यह उन मरीज को सबसे ज्यादा होता है जिन्हें दर्द निवारक दवाएं लेते हुए 10 साल से ज्यादा हो चुके होते हैं।
दूसरी दवाओं से भी यह बीमारी संभव है। इसका इलाज यही है कि ओवरयूज की दवाओं को हटाकर इन ड्रग्स का डी-टॉक्सीफिकेशन ट्रीटमेंट शुरू किया जाए।
डॉ. यूके मिश्रा का कहना था कि कुछ लोग सिरदर्द होने पर एनालजेसिक का उपयोग खुद ही करने लगते हैं, ऐसा न करें।