यूपी में बैंकों की हड़ताल से 6000 करोड़ का कारोबार प्रभावित
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लखनऊ में 400 शाखाएं और 16 हजार कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल का आह्वान सभी बैंक यूनियनों के यूनाइटेड फोरम ने किया था। फोरम का दावा है कि हड़ताल से सूबे में 6000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। राजधानी लखनऊ में करीब 500 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ।
उन लोगों को अधिक परेशानी हुई, जिन्हें चेक भुनाने थे या जो ड्राफ्ट बनवाने बैंकों में आए थे। बैंक प्रबंधनों ने एटीएम में कैश की सप्लाई कर दी थी, जिससे 10 से 20 हजार तक निकासी करने वालों को परेशानी नहीं हुई, लेकिन अधिक मात्रा में नकदी निकालने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
एसबीआई प्रबंधन की मनाही के बावजूद यूनाइटेड फोरम ने लखनऊ में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रधान कार्यालय पर सभा की। इसे संबोधित करते हुए बैंक कर्मियों व अधिकारियों की यूनियनों के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार बैंकों को निजीकरण की ओर धकेल रही है। इसका नुकसान न केवल बैंककर्मियों, बल्कि पूरे देश को होगा।
मोदी सरकार कॉरपोरेट घरानों के दबाव में आकर बैंकों की हिस्सेदारी उन्हें बेचने की तैयारी कर रही है। एक ओर केंद्र सरकार जहां स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मूलभूत क्षेत्रों में बजट कम कर रही है, जिससे आम नागरिकों, खास तौर से मध्यम वर्ग और गरीब तबके को नुकसान हो रहा है, वहीं बड़े कॉरपोरेट घराने अमीर से अमीर होते जा रहे हैं।
लोन न चुकाने वाले उद्यमियों को भेजो जेल
बैंक कर्मियों व अधिकारियों की यूनियनों के नेताओं ने कहा कि सरकार ने नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) के रूप में बैंकों के सामने बड़ी समस्या पैदा कर दी है। सरकार ने अनेक योजनाएं बनाईं और बड़े उद्यमियों को सस्ती ब्याज दरों पर कर्ज दिलवाए।
अब ये उद्यमी बैंकों का कर्ज नहीं लौटा रहे। सरकार खुद ही उनके लिए ‘विल्फुल डिफॉल्टर’ घोषित होने की योजना प्रस्तुत कर रही है जबकि इन उद्यमियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज होना चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। एक आम नागरिक अगर अपने घर, खेती या कार का लोन नहीं चुका पाता तो उसका घर तक नीलाम करवा दिया जाता है।
25-50 हजार का लोन नहीं चुका पाने पर किसान आत्महत्याएं करने को विवश हैं, लेकिन पांच-पांच हजार करोड़ के लोन डुबोने वाले कॉरपोरेट घरानों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। सभा को संबोधित करने वालों में यूनियन नेता वाईके अरोड़ा, केके सिंह, अनिल श्रीवास्तव, दिलीप चौहान, वीके सेंगर, पवन कुमार, एसडी मिश्र, डीपी वर्मा आदि शामिल थे।
प्राइवेट बैंक हड़ताल से दूर रहे
आम तौर पर राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल को प्राइवेट बैंकों के कर्मचारी भी अनौपचारिक समर्थन देते रहे हैं, लेकिन शुक्रवार को एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक आदि में सामान्य कामकाज हुआ। इससे भी नागरिकों की मुश्किलें कुछ कम हुईं।