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मजदूर संगठनों की हड़ताल का हुआ जबरदस्त असर, 1500 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित

Tue, 08 Jan 2019 10:35 PM IST
MANISH sachan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: MANISH sachan Updated Tue, 08 Jan 2019 10:35 PM IST
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strike by labour union was successful today
राजधानी में हुआ प्रदर्शन

राजधानी में श्रम संगठनों की दो दिनी हड़ताल के पहले दिन मंगलवार को सरकारी विभागों में व्यापक असर रहा। बिजली, परिवहन, पीडब्ल्यूडी, बैंक, बीएसएनएल, बीमा, सिंचाई विभागों समेत भारतीय खाद्य निगम व केंद्रीय कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से संबंधित विभागों में कामकाज ठप रहा। राजधानी में बैंक बंद होने से करीब 1500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।

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श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध और पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान करने वाले संगठनों ने पहले दिन चारबाग स्टेशन से हजरतगंज स्थित जीवन बीमा निगम कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला।
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पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी गेट मीटिंग करने के बाद रैली निकाल कर जीवन बीमा कार्यालय पहुंचे। कर्मचारी नारेबाजी कर रहे थे कि ‘जो पुरानी पेंशन बहाल करेगा, वही देश पर राज करेगा।’ ई रिक्शा यूनियन ने भी रैली निकाली और बीमा ऑफिस पहुंचकर ई रिक्शा के संचालन से प्रतिबंध हटाने की मांग उठाई।
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ज्यादातर बैंकों में भी कामकाज ठप रहा। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के प्रदेश उप महामंत्री एसके संथानी ने दावा किया कि बैंक बंद होने से राजधानी में करीब 1500 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। बिजली व परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने विरोध सभा की।

हालांकि डाक विभाग में हड़ताल का आंशिक असर रहा। जीपीओ सहित शहर के अन्य डाकघरों में उपभोक्ताओं से जुड़े कार्य हुए। ऑल इंडिया पोस्टल इंप्लाइज यूनियन ग्रुप सी के प्रांतीय मंत्री डॉ. शेषमणि त्रिपाठी ने बताया कि वे लोग बुधवार को हड़ताल में शामिल होंगे।

जीवन बीमा निगम कार्यालय पर हुई सभा में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन के महासचिव सदरुददीन राना ने कहा कि भाजपा सरकार कर्मचारी और मजदूरों के विरोध में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की पेंशन अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में समाप्त की गई। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा की वाम सरकारों ने राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल रखी।

सीटू के महामंत्री प्रेमनाथ राय ने कहा कि मौजूदा सरकार कर्मचारी और मजदूरों के हित बने कानून को निजी घरानों के पक्ष में बदलने का प्रयास कर रही है। सरकारी सेवाओं का निजीकरण किया जा रहा है।

मजदूर संगठनों की प्रमुख मांगे

पुरानी पेंशन योजना लागू हो। न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये प्रतिमाह हो। रोजगार के मौके बढ़ें और सभी विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति हो। समान काम के लिए समान वेतन मिले और ठेका प्रथा खत्म हो। संविदा/आउटसोर्सिग के कर्मचारियों को नियमित करें। ट्रांसपोर्ट व सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगे। बैंक, बीमा व रेलवे में विदेशी पूंजी निवेश रोकें। बिजली उत्पादन व वितरण कंपनियों का एकीकरण कर उप्र. बिजली परिषद निगम बने। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन और इलेक्ट्रिसिटी एमेंडमेंट बिल 2018  वापस हो। स्कीम वर्कर्स को 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के आधार पर कर्मचारी घोषित कर न्यूनतम वेतन दिया जाए।

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