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गजनी गांव में लाल साड़ी का 'साया', बेहोश हो रहे बच्चे!

Thu, 11 Dec 2014 05:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बेंदाघाट/बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बेंदाघाट/बांदा Updated Thu, 11 Dec 2014 05:01 PM IST
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Ghost in Tree; Kids getting unconscious in Village Gajini of Banda District

गजनी गांव का गजब अभी बरकरार है। सुर्खियों में छाए इस गांव में दूसरे दिन अजीब जड़ों वाले पेड़ को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। यहां आए लोगों में से किसी को कुछ नहीं हुआ।

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बच्चों से लेकर बूढ़ों तक ने पेड़ को देखा और छुआ। लेकिन वहीं नौ बच्चे स्कूल आने पर फिर से उसी अटैक का शिकार हुए जिसके चलते एक दिन पूर्व उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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इससे बुधवार को भी गांव में दहशत और बच्चों में खौफ छाया रहा। गिने-चुने बच्चे ही स्कूल आए। खंड विकास अधिकारी ने कथित प्रेतात्मा वाले पेड़ के पास जाकर उसकी परिक्रमा कर लोगों के दिलो दिमाग में समाए खौफ को दूर करने की कोशिश की। लेकिन अंधविश्वास के आगे लोगों में कोई फर्क नहीं पड़ा।
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गजनी गांव के जूनियर हाईस्कूल के बच्चों पर छाया अजीबो गरीब खौफ और रोग बुधवार को अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद शोहरत पा गया।

अचानक आई चीख और बेहोश हो गए बच्चे

Ghost in Tree; Kids getting unconscious in Village Gajini of Banda District

उन पेड़ों को देखने के लिए दूर-दराज के लोगों का भी गांव में जमघट लग गया। बीडीओ ओम प्रकाश शुक्ला ने स्कूल आकर प्रधानाध्यापक और बच्चों से हालचाल जाना। प्रधानाध्यापक द्वारा बरगद के पेड़ में लगाई गई उस सूचना को भी हटवा दिया, जिसमें पेड़ के नजदीक आने से सावधान किया गया था।

कहीं मिड-डे मील खाकर तो बच्चे बीमार नहीं हो रहे? इस आशंका के मद्देनजर बीडीओ ने खुद भी मिड-डे मील के कढ़ी-चावल खाए। उन्होंने पेड़ के तले जाकर लोगों की गलतफहमी दूर करनी चाही। लेकिन गांव के लोग नजदीक नहीं आए।

प्रधानाध्यापक भूपत सिंह पेड़ के नजदीक जाने से खुद भी हिचकिचा रहे थे। उन्हें भी पेड़ तले लाकर परिक्रमा करवाई गई। यह सब चल ही रहा था तभी 7वीं कक्षा की 13 वर्षीय कुमारी कीर्ति की कक्षा में ही चीख के साथ घिग्गी बंध गई। गांव के लोग दौड़े और अन्य बच्चों ने उसे संभाला।

उसी हालत सुधरी भी नहीं थी कि एक के बाद एक 9 बच्चों का यही हश्र हुआ। इनमें रामा देवी (13), प्रतिभा देवी (13), शालू सिंह (13), क्षमा (12), पूजा देवी (12), प्रियांशू (12) व सुशील (12) शामिल थे।

बच्चों को अस्पताल ले जाने से मना कर रहे अभिभावक

Ghost in Tree; Kids getting unconscious in Village Gajini of Banda District

बच्चों को चंगा करने में वहीं अंधविश्वास का सहारा लिया गया। हद तो ये हुई कि स्कूल के पास अजीबो गरीब जड़ वाले नीम के पेड़ तले रखी कुछ पुरानी खंडित मूर्तियों पर नारियल और अगरबत्ती चढ़ाकर ‘जय अगिया बैताल माता’ के नारे लगाए गए।

जयकारे लगाने में स्कूली बच्चे भी शामिल रहे। अंधविश्वास में सराबोर अभिभावकों ने बच्चों को अस्पताल ले जाने से मना कर दिया।

इसी बीच पड़ोसी डिघवट गांव से आए युवक रामराज प्रजापति ने खुद को तांत्रिक बताया। उसने बच्चों पर झाड़-फूंक शुरू कर दी। शराब मंगाई और नींबू के साथ बच्चों पर छिड़काव किया। कुछ देर बाद बच्चे सामान्य अवस्था में आ गए।

यहां गौर करने लायक बात ये है कि बुधवार को बीमार हुए सभी वही बच्चे थे जिन्हें एक दिन पहले कथित प्रेतात्मा के ‘भय का भूत’ समा गया था। इतना सब होने के बाद बीडीओ चले गए। किंतु गांव में अगिया बैताल माता की जय जयकार गूंज पड़ी।

लाल साड़ी वाली महिला को देख बेहोश हो रहे बच्चे

Ghost in Tree; Kids getting unconscious in Village Gajini of Banda District

बुधवार को कांग्रेस नेताओं का जत्था भी गजनी गांव पहुंचा। जिलाध्यक्ष अखिलेश शुक्ल और प्रदेश सचिव साकेत बिहारी मिश्र ने पीड़ित बच्चों के अभिभावकों और गांव के अन्य लोगों से बातचीत की।

कांग्रेस नेताओं का कहना था कि बच्चों से लेकर अभिभावक और सभी ग्रामीणों के सिर पर कथित प्रेतात्मा का खौफ छाया हुआ है। कांग्रेस नेताओं के सामने ही नौ बच्चे बेहोश हुए। प्रधानाचार्य ने उनसे बच्चों की कही बात दोहराई कि कोई लाल साड़ी वाली महिला देखकर वे बेहोश हो जाते हैं।

कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल जाने से रोक दिया है। रानी विश्वकर्मा ने उन्हें बताया कि उसकी पुत्री घर में ठीक रहती है। स्कूल आने पर हालत बिगड़ जाती है।

गांव की 85 वर्षीय अनुसुइया का कहना था कि अगिया बैताल की पूजा हमेशा हुई है। पर ऐसा कभी नहीं हुआ। कांग्रेस नेताओं ने मिड-डे मील चखकर भी परीक्षण किया। संकटा प्रसाद त्रिपाठी, श्रीप्रकाश शुक्ल, शिवदत्त अवस्थी आदि शामिल रहे।

बाहरी लोगों को रोकेंगे गांव आने से

Ghost in Tree; Kids getting unconscious in Village Gajini of Banda District

अफसरों, मीडिया कर्मियों, तमाशाइयों और नेताओं की दो दिनों से मची धमाचौकड़ी से गजनी गांव के लोग परेशान हो उठे हैं। उनका कहना है कि यह सब बच्चों से पूरा वाक्या पूछते हैं।

तभी बच्चों की हालत बिगड़ जाती है। अब किसी को बच्चों से बात नहीं करने दी जाएगी। गांव के बाहर बैरियर लगाकर बाहरी लोगों को गांव में आने से रोका जाएगा।

बीएसए के बयान पर ग्रामीण आगबबूला
गजनी गांव के ग्रामीण बीएसए पर बुरी तरह खफा हैं। किसी अखबार में बीएसए का यह बयान छप गया है कि यह सब तमाशा विद्यालय के सामने पर पड़ी भूमि पर गांव के कुछ लोगों द्वारा कब्जा करने के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि बीएसए यहां झांकने नहीं आए। ऊपर से आरोप लगा रहे हैं।

ग्रामीण बीएसए के विरुद्ध जोरदार आंदोलन करके घेराव करेंगे। प्रदेश सरकार और डीएम से कार्रवाई की मांग करेंगे। प्रधान जयकरन यादव ने कहा कि वर्ष 2006 से पूर्व माध्यमिक विद्यालय चल रहा है। बीएसए का यह बयान गांव वालों का अपमान है।

पता नहीं क्या चक्कर है?

Ghost in Tree; Kids getting unconscious in Village Gajini of Banda District

मामले पर डीएम सुरेश कुमार का कहना है, ‘बृहस्पतिवार को गजनी गांव अपर जिला मजिस्ट्रेट और सीएमओ को भेजेंगे। पूरी विस्तृत रिपोर्ट उनसे लेंगे। वास्तविकता का पता लगाने के लिए जरूरत समझी गई तो स्कूल के बच्चों की मनोवैज्ञानिकों से काउंसलिंग भी कराई जाएगी’।

वहीं एसडीएम सदर प्रह्लाद सिंह कहते हैं, ‘मैं गजनी गांव में मौके पर गया था। मेरे सामने ही बात करते-करते चार बच्चे चीख-चिल्लाकर बेहोश हो गए। डॉक्टरों से बात की है। उनका कहना है कि रोग समझ में ही नहीं आ रहा। पता नहीं क्या चक्कर है? सारे मामले की रिपोर्ट डीएम को दूंगा।'

इस पर बांदा के बीएसए डॉ. सत्य नाराणस का कहना है ‘एसडीएम समेत कई अधिकारी गजनी गांव हो आए हैं। इस पूरे मामले को एसडीएम सदर प्रह्लाद सिंह देख रहे हैं। जो भी जानकारी देंगे वही देंगे’।

बांदा के सीएमओ डॉ. (कैप्टन) आरके सिंह का कहना है ‘गजनी के बच्चों का इलाज जिला अस्पताल में हुआ है। फिलहाल मेरे पास वहां की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञ अगर देखेंगे कि बच्चे वास्तविक रूप से बीमार हैं और उनका इलाज यहां संभव नहीं है तो उन्हें इलाज के लिए बाहर भेजा जाएगा। फिलहाल ऐसी कोई जरूरत नहीं समझी गई है। डाक्टर गजनी गांव भी हो आए हैं’।

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