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रोटी बैंक से भूखों का पेट भर रहे हैं विक्रम, 11 प्रदेशों में पहुंच चुकी है उनकी ये मुहिम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 27 Sep 2018 03:36 PM IST
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विक्रम पांडेय
- फोटो : amar ujala
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रोटी की कोई जाति नहीं होती। कोई धर्म भी नहीं होता। भूख सबको लगती है। व्यक्ति का पहला लक्ष्य दो जून की रोटी कमाना होता है। इसलिए हर व्यक्ति को रोटी मिले, यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। यह कहना है नेशनल रोटी बैंक के संस्थापक विक्रम पांडेय का।
गरीबों को रोटी खिलाने की यह मुहिम अब तक 11 प्रदेश के 55 शहरों में पहुंच चुकी है। विक्रम पांडेय बताते हैं कि उन्होंने हरदोई से इसकी शुरुआत की थी। इसके लिए किसी से कोई चंदा या फिर शुल्क नहीं लिया जाता। जो लोग हमसे जुड़ते हैं वे सिर्फ रोटी या फिर खाने-पीने की सामग्री लाते हैं। यह सामग्री शहर के चुनिंदा स्थानों पर लोगों को बांटी जाती हैं।
विक्रम पांडेय ने बताया कि वर्ष 2016 की बात है। सर्दियों में वे दिल्ली जा रहे थे। उस समय रात में एक बूढ़ी महिला ने उनसे खाना खाने के लिए 10 रुपये मांगे। उन्होंने पैसे नहीं दिए लेकिन उस महिला को भोजन जरूर कराया।
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इसके बाद ट्रेन में बैठने के बाद यह विचार आया कि रोटी बैंक जैसे अभियान की शुरुआत की जाए। छह फरवरी 2016 में हरदोई से इसकी शुरुआत हुई। कुछ दोस्त शुरुआत में इससे जुड़े। इस अभियान से लोग लगातार जुड़ते जा रहे हैं।
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गरीबों को रोटी खिलाने की यह मुहिम अब तक 11 प्रदेश के 55 शहरों में पहुंच चुकी है। विक्रम पांडेय बताते हैं कि उन्होंने हरदोई से इसकी शुरुआत की थी। इसके लिए किसी से कोई चंदा या फिर शुल्क नहीं लिया जाता। जो लोग हमसे जुड़ते हैं वे सिर्फ रोटी या फिर खाने-पीने की सामग्री लाते हैं। यह सामग्री शहर के चुनिंदा स्थानों पर लोगों को बांटी जाती हैं।
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विक्रम पांडेय ने बताया कि वर्ष 2016 की बात है। सर्दियों में वे दिल्ली जा रहे थे। उस समय रात में एक बूढ़ी महिला ने उनसे खाना खाने के लिए 10 रुपये मांगे। उन्होंने पैसे नहीं दिए लेकिन उस महिला को भोजन जरूर कराया।
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इसके बाद ट्रेन में बैठने के बाद यह विचार आया कि रोटी बैंक जैसे अभियान की शुरुआत की जाए। छह फरवरी 2016 में हरदोई से इसकी शुरुआत हुई। कुछ दोस्त शुरुआत में इससे जुड़े। इस अभियान से लोग लगातार जुड़ते जा रहे हैं।
फेसबुक पर है इसका ऑफिशियल पेज
डेमो
रोटी बैंक की एक सबसे बड़ी खासियत इसका धर्मनिरपेक्ष होना है। इसकी किसी भी नई यूनिट की शुरुआत के दौरान हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख और ईसाई धर्म के लोग एक साथ जुड़ते हैं। फेसबुक पर इसका ऑफिशियल पेज है।
विक्रम पांडेय बताते हैं कि इस समय लखनऊ में 12 यूनिट चल रही हैं। इन यूनिट से जुड़कर लोग रोटी बैंक को सहयोग कर रहे हैं। लखनऊ में इन यूनिट से करीब 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
रोटी बैंक के बाद गरीबों को मुफ्त में जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जन बाजार की शुरुआत भी की जा रही है। जन बाजार में हर व्यक्ति को तीन सामग्री लेने की सुविधा दी जाती है। ये वस्तुएं भी आपस में जुटाई जाती हैं। इसे भी बड़े पैमाने पर चलाने की तैयारी चल रही है। इस तरह से गरीबों को सामान भी मुहैया कराया जा सकेगा।
विक्रम पांडेय बताते हैं कि इस समय लखनऊ में 12 यूनिट चल रही हैं। इन यूनिट से जुड़कर लोग रोटी बैंक को सहयोग कर रहे हैं। लखनऊ में इन यूनिट से करीब 10 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
रोटी बैंक के बाद गरीबों को मुफ्त में जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जन बाजार की शुरुआत भी की जा रही है। जन बाजार में हर व्यक्ति को तीन सामग्री लेने की सुविधा दी जाती है। ये वस्तुएं भी आपस में जुटाई जाती हैं। इसे भी बड़े पैमाने पर चलाने की तैयारी चल रही है। इस तरह से गरीबों को सामान भी मुहैया कराया जा सकेगा।