{"_id":"c605c18c361d08c33076c186950e78ba","slug":"story-about-a-commissioner","type":"story","status":"publish","title_hn":"समरथ को नहिं दोष गुसाईं...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समरथ को नहिं दोष गुसाईं...
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 02 Feb 2014 04:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शासन में एक प्रमुख सचिव हैं। उनके पास निदेशालय में आयुक्त स्तर के पद का अतिरिक्त प्रभार भी है।
विज्ञापन
खास बात ये है कि वह पिछली सरकार के भी नाक के बाल थे और इस सरकार में भी। मगर दिलचस्प वाकया सुनने को मिला अतिरिक्त प्रभार वाले प्राधिकरण में।
पता चला कि पूर्व में प्राधिकरण के जो आयुक्त साहब थे उन्होंने विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अपने घर पर लगा रखा था। वह घर पर उससे परिवार व आगंतुकों के नाश्ता पानी का काम ही करा लेते थे।
हाल में उनका ट्रांसफर हुआ तो प्रमुख सचिव साहब को अतिरिक्त प्रभार मिल गया। नए साहब ने भी कर्मचारी को अपने घर पर बुला लिया।
मगर उन्होंने कर्मचारी से बर्तन धुलवाने से लेकर सफाई तक का काम शुरू करा दिया। वह जब उनके सारे नाज-नखरे उठाता गया तो उन्होंने उसे पोछा लगाने का भी काम दे दिया।
विज्ञापन
अब उसका धैर्य जवाब दे गया। बस क्या था, साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर। कर्मचारी के बारे में पता किया तो पता चला कि वह एक एजेंसी के माध्यम से काम कर रहा है।
विज्ञापन
हाकिम ने एजेंसी की फाइल तलब की और उस ‘बेचारे’ की नौकरी लेकर ही ठंडे हुए। एजेंसी वाला फिलहाल कंपनी तो बचा ले गया लेकिन वह कर्मचारी नौकरी छोड़कर चल गया।