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कागजी निर्माण के सहारे शत प्रतिशत ओडीएम बनाने की जोड़-तोड़

Fri, 28 Jun 2019 01:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 01:36 AM IST
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Still 20percent toilets incomplete
आठ माह का वक्त मिला, फिर भी 20 फीसदी शौचालय अधूरे, अब कागजी गणित में जुटे जिम्मेदार
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राजधानी को ओडीएफ घोषित करने की डेड लाइन गत वर्ष दो अक्तूबर से दो बार बढ़कर 30 जून कर दी गई, लेकिन अब तक 80 फीसदी शौचालय ही बनाए जा सके हैं।
अब बाकी बचे चार दिन में अधूरे पड़े 20 फीसदी शौचालयों का निर्माण पूरा दिखाने के लिए अफसर कागजी गणित लगाने में जुट गए हैं। लखनऊ को ओडीएफ जिला घोषित करने के लिए ग्रामीण इलाकों के आठ ब्लाक क्षेत्रों में 1.92 लाख और शहरी क्षेत्र में चार हजार शौचालय बनाने का लक्ष्य तय है।
लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभी भी आठ ब्लाकों में लक्ष्य के इतर 20 फीसदी शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
शौचालय निर्माण कार्य की पहली किस्त मिलने के बाद भी इनका निर्माण पूरा न होने पर अब संबंधित ग्राम प्रधानों व ग्राम सचिवों से लिखित स्पष्टीकरण मांगने के साथ इन्हें 30 जून तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। क्रियाशील कराने का निर्देश दिया गया है।
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ये हालात खोल रहे पोल
मनकौटी गांव में करीब 485 परिवार हैं, लेकिन 50 फीसदी घरों में ही शौचालय बने हैं। जिन घरों में शौचालय बने, वह भी बदहाल हैं। किसी की छत नहीं तो किसी का दरवाजा गायब है। इसके बावजूद मनकौटी को ओडीएफ घोषित की तैयारी है।
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बीकेटी ब्लाक की ग्राम पंचायत रामपुर बेहडा में 30 प्रतिशत शौचालयों का निर्माण कार्य अटका है। ओडीएफ घोषित ग्राम पंचायत मिश्रीपुर-धावामउ, सुभाननगर-अरिगवंा, रेवामउ, उनई, दौलतपुर, मोहम्मपुर व कौडियामऊ में घटिया निर्माण के चलते दर्जनों शौचालय बदहाल और जर्जर हो चुके है।
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