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आधार से राशन घोटाला करने वाले तीन लोगों को एसटीएफ ने दबोचा, सप्लाई इंस्पेक्टरों पर भी कसेगा शिकंजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 17 Sep 2018 09:04 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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खाद्य एवं रसद विभाग की ई-पॉस मशीन के जरिए होने वाली राशन वितरण प्रणाली में सेंध लगाने के मामले में यूपी एसटीएफ ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी की गिरफ्तारी लखनऊ के वजीरगंज से की गई।
इनमें राशन दुकानदार आमिर खां व कंप्यूटर ऑपरेटर मोहम्मद अल्तमश लखनऊ के रहने वाले हैं जबकि कथित रूप से मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र पाल नोएडा का रहने वाला है। आमिर और अल्तमश सगे भाई बताए जा रहे हैं। इनके पास से एक कंप्यूटर सेट और दो ई-पॉस मशीनें बरामद की गई हैं। तीनों जालसाजों को एसटीएफ के साइबर क्राइम थाने में रखा गया है।
आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में कोटे की दुकानों से ई-पॉस मशीनों के जरिए करोड़ों का राशन उठाया गया। इसके लिए सप्लाई इंस्पेक्टरों और कंप्यूटर ऑपरेटर की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस बारे में शिकायत मिलने के बाद शासन ने पूरे मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी थी।
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जांच के दौरान खाद्य आयुक्त कार्यालय से पता चला कि आधार के माध्यम से अधिक से अधिक राशन वितरण किए जाने के निर्देश दिए गए थे। चूंकि बड़ी संख्या में आधार संख्या को लिंक नहीं किया गया था, इसलिए जिला आपूर्ति अधिकारी के पर्यवेक्षण में सप्लाई इंस्पेक्टरों व कंप्यूटर ऑपरेटरों को आधार फीडिंग व एडिटिंग के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया था। जालसाजों ने इसका बेजा इस्तेमाल करते हुए करोड़ों का घोटाला कर डाला।
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इनमें राशन दुकानदार आमिर खां व कंप्यूटर ऑपरेटर मोहम्मद अल्तमश लखनऊ के रहने वाले हैं जबकि कथित रूप से मास्टरमाइंड पुष्पेंद्र पाल नोएडा का रहने वाला है। आमिर और अल्तमश सगे भाई बताए जा रहे हैं। इनके पास से एक कंप्यूटर सेट और दो ई-पॉस मशीनें बरामद की गई हैं। तीनों जालसाजों को एसटीएफ के साइबर क्राइम थाने में रखा गया है।
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आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में कोटे की दुकानों से ई-पॉस मशीनों के जरिए करोड़ों का राशन उठाया गया। इसके लिए सप्लाई इंस्पेक्टरों और कंप्यूटर ऑपरेटर की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस बारे में शिकायत मिलने के बाद शासन ने पूरे मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी थी।
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जांच के दौरान खाद्य आयुक्त कार्यालय से पता चला कि आधार के माध्यम से अधिक से अधिक राशन वितरण किए जाने के निर्देश दिए गए थे। चूंकि बड़ी संख्या में आधार संख्या को लिंक नहीं किया गया था, इसलिए जिला आपूर्ति अधिकारी के पर्यवेक्षण में सप्लाई इंस्पेक्टरों व कंप्यूटर ऑपरेटरों को आधार फीडिंग व एडिटिंग के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड दिया गया था। जालसाजों ने इसका बेजा इस्तेमाल करते हुए करोड़ों का घोटाला कर डाला।
इस तरह करते थे खेल
गिरफ्तार जालसाजों ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया कि राशन विक्रेता अपनी ई-पॉस मशीन को किसी एक जगह ले जाकर ऑपरेटर या पूर्ति निरीक्षक की लॉगिन आईडी व पासवर्ड से खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर जाकर राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम से डाटाबेस ही बदल देते थे। काम हो जाने के बाद डाटाबेस को पहले की स्थिति में कर दिया जाता था। इसमें एक से डेढ़ मिनट लगता था।
गिरफ्तार जालसाज आमिर ने बताया कि उसकी खुद की राशन की दुकान है। उसके क्षेत्र की पूर्ति निरीक्षक संगीता और कौशलेंद्र कुमार पांडेय तथा कंप्यूटर ऑपरेटर उसका भाई अल्तमश है। इन सभी की लॉगिन आईडी व पासवर्ड उसके तथा अल्तमश के पास रहता है, जिसके माध्यम से खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर लाभार्थी के राशन कार्ड आईडी की आधार संख्या को बदलकर अपनी आधार संख्या दर्ज करके अपना अंगूठा लगा देता था और ट्रांजेक्शन पूरा होने के बाद वास्तविक लाभार्थी के आधार को पहले की तरह कर देता था।
चार महीने से चल रहा था गोरखधंधा
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि यह पूरा गोरखधंधा पिछले चार महीने से चल रहा था। उन्होंने दावा किया कि इसमें आधार में किसी तरह की सेंध नहीं लगी है।
पूछताछ में आमिर ने बताया कि उसने जुलाई में 100 से अधिक बार अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। उसकी राशन दुकान में कोटेदार धर्मेंद्र सिंह, योगेश द्विवेदी, राजकुमारी, रामचंद्र चौधरी, शंकर प्रसाद, शिव प्रकाश, संतोष रावत, सीमा गुप्ता, मेसर्स महिला उपसमिति अपनी-अपनी ई-पॉस मशीन तथा उनसे संबंधित पूर्ति निरीक्षक एवं ऑपरेटर के लॉगिन आईडी व पासवर्ड लेकर आते थे और उन पर भी अपनी आधार संख्या एडिट कर फर्जी वितरण कर देते थे।
जुलाई में इन सभी मशीनों के जरिये उसने लगभग एक हजार बार फर्जी वितरण किया। वहीं, अल्तमश ने बताया कि उसने अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए राशन दुकानदार संपत लाल और रामकली की ई-पॉस मशीन पर 200 से अधिक बार फर्जी ट्रांजेक्शन किया।
गिरफ्तार जालसाज आमिर ने बताया कि उसकी खुद की राशन की दुकान है। उसके क्षेत्र की पूर्ति निरीक्षक संगीता और कौशलेंद्र कुमार पांडेय तथा कंप्यूटर ऑपरेटर उसका भाई अल्तमश है। इन सभी की लॉगिन आईडी व पासवर्ड उसके तथा अल्तमश के पास रहता है, जिसके माध्यम से खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर लाभार्थी के राशन कार्ड आईडी की आधार संख्या को बदलकर अपनी आधार संख्या दर्ज करके अपना अंगूठा लगा देता था और ट्रांजेक्शन पूरा होने के बाद वास्तविक लाभार्थी के आधार को पहले की तरह कर देता था।
चार महीने से चल रहा था गोरखधंधा
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि यह पूरा गोरखधंधा पिछले चार महीने से चल रहा था। उन्होंने दावा किया कि इसमें आधार में किसी तरह की सेंध नहीं लगी है।
पूछताछ में आमिर ने बताया कि उसने जुलाई में 100 से अधिक बार अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। उसकी राशन दुकान में कोटेदार धर्मेंद्र सिंह, योगेश द्विवेदी, राजकुमारी, रामचंद्र चौधरी, शंकर प्रसाद, शिव प्रकाश, संतोष रावत, सीमा गुप्ता, मेसर्स महिला उपसमिति अपनी-अपनी ई-पॉस मशीन तथा उनसे संबंधित पूर्ति निरीक्षक एवं ऑपरेटर के लॉगिन आईडी व पासवर्ड लेकर आते थे और उन पर भी अपनी आधार संख्या एडिट कर फर्जी वितरण कर देते थे।
जुलाई में इन सभी मशीनों के जरिये उसने लगभग एक हजार बार फर्जी वितरण किया। वहीं, अल्तमश ने बताया कि उसने अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए राशन दुकानदार संपत लाल और रामकली की ई-पॉस मशीन पर 200 से अधिक बार फर्जी ट्रांजेक्शन किया।
डाटा अपलोडिंग और एडिटिंग की खामियों का उठाया फायदा
राशन घोटाला
- फोटो : file photo
एक अन्य जालसाज पुष्पेंद्र पाल ने बताया कि उसने कंप्यूटर की बेेसिक ट्रेेनिंग का कोर्स एसपीआई दादरी से किया है। दादरी के एक साइबर कैफे पर उसकी मुलाकात सोनू उर्फ रामकुमार से हुई, जिसकी मदद से उसने खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर डाटा अपलोडिंग और एडिटिंग की प्रक्रिया समझ ली और खामियों का जमकर फायदा उठाया। इस काम में उसे विजेंद्र का भी साथ मिला। इसके बाद पुष्पेंद्र ने धीरे-धीरे कई जिलों में अपने ग्राहक बना लिए।
नोएडा में दर्जन भर राशन दुकानों पर ई-पॉस मशीन के जरिए खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर अपना आधार नंबर डालकर राशन कार्ड का घोटाला करता रहा। इसमें उसे नोएडा की राशन विक्रेता लीना सिंह, पूजा सिंह, गीता चौधरी, जितेंद्र सिंह, जीत सिंह, देवेंद्र, बबिता, रोहतास, शिवराज सिंह तथा बुलंदशहर के प्रमोद का साथ मिला।
इसी तरह सोनू उर्फ रामकुमार ने उसका संपर्क जितेंद्र उर्फ जित्ते गुप्ता से करा दिया। पुष्पेंद्र और विजेंद्र सिंह लखनऊ के कोटेदार रामदास, ओम प्रकाश आहूजा, प्रमोद गौतम, प्रवीण कुमार महाजन, महेश दत्त शुक्ला, मेसर्स महानगर रामजी सिंह राम प्रकाश सरोज, शिव प्रकाश, विजय कुमार महाजन, सूरज नरायन गुप्ता की ई-पॉस मशीन पर अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए लाभार्थी द्वारा राशन का अनाज ले जाना दिखा देते थे। बाद में इस अनाज को खुले बाजार में बेच दिया जाता था। लखनऊ में पुष्पेंद्र को 15 दिन के बदले 13 से 15 हजार रुपये तक मिलते थे।
एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि इस पूरे खेल में लगभग 20 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। मॉडस ऑपरेंडी पता चलने के बाद यूपी एसटीएफ ने अलग-अलग जिलों में दर्ज 22 मामलों के विवेचकों को भी इस बारे में जानकारी उपलब्ध करा दी है। इस मामले में एसटीएफ जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां करेगी।
नोएडा में दर्जन भर राशन दुकानों पर ई-पॉस मशीन के जरिए खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट पर अपना आधार नंबर डालकर राशन कार्ड का घोटाला करता रहा। इसमें उसे नोएडा की राशन विक्रेता लीना सिंह, पूजा सिंह, गीता चौधरी, जितेंद्र सिंह, जीत सिंह, देवेंद्र, बबिता, रोहतास, शिवराज सिंह तथा बुलंदशहर के प्रमोद का साथ मिला।
इसी तरह सोनू उर्फ रामकुमार ने उसका संपर्क जितेंद्र उर्फ जित्ते गुप्ता से करा दिया। पुष्पेंद्र और विजेंद्र सिंह लखनऊ के कोटेदार रामदास, ओम प्रकाश आहूजा, प्रमोद गौतम, प्रवीण कुमार महाजन, महेश दत्त शुक्ला, मेसर्स महानगर रामजी सिंह राम प्रकाश सरोज, शिव प्रकाश, विजय कुमार महाजन, सूरज नरायन गुप्ता की ई-पॉस मशीन पर अपने आधार कार्ड का इस्तेमाल करते हुए लाभार्थी द्वारा राशन का अनाज ले जाना दिखा देते थे। बाद में इस अनाज को खुले बाजार में बेच दिया जाता था। लखनऊ में पुष्पेंद्र को 15 दिन के बदले 13 से 15 हजार रुपये तक मिलते थे।
एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि इस पूरे खेल में लगभग 20 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। मॉडस ऑपरेंडी पता चलने के बाद यूपी एसटीएफ ने अलग-अलग जिलों में दर्ज 22 मामलों के विवेचकों को भी इस बारे में जानकारी उपलब्ध करा दी है। इस मामले में एसटीएफ जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां करेगी।
सप्लाई इंस्पेक्टरों पर भी कसेगा शिकंजा
सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड दूसरों को देने को लेकर सप्लाई इंस्पेक्टरों पर भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सप्लाई इंस्पेक्टरों ने लापरवाही की या जान-बूझकर अपना यूजर आईडी और पासवर्ड जालसाजों को सौंप दिया।