जानें, क्यों बन रहा है मेट्रो के लिए स्टील का पुल
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लखनऊ की मेट्रो अपने निर्माण के बीच तकनीकी रूप से नए प्रयोग भी कर रही है। अवध चौराहे पर ट्रैफिक संचालन में कोई बाधा न आए, इसके लिए यहां 60 मीटर लंबा स्टील का पुल (स्पेशल स्पैन) बनाया जा रहा है।
इसका 50 प्रतिशत तक काम भी लखनऊ मेट्रो ने अवध चौराहे पर पूरा करा दिया है। जुलाई तक यह पुल अवध चौराहे पर मेट्रो रूट को कनेक्ट कर देगा। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि अवध चौराहे की चौड़ाई अधिक है। ऐसे में यहां ठीक बीच में एक पिलर खड़ा करने की जरूरत पड़ रही थी। इससे आने वाले सालों में ट्रैफिक बाधा बनी रहती।
इसके अलावा चौराहा के ठीक बीच में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा भी इस काम के बीच में आ रही थी। इस समस्या को खत्म करने के लिए चौराहे पर स्पेशल स्पान की योजना बनाई गई।
अब इस स्टील के पुल को यहां लगाने का काम करीब 50 प्रतिशत से अधिक पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस स्पेशल स्पैन की लागत यू-गर्डर और पीयर कैप पर बने रूट से करीब दो-तीन गुना अधिक है।
इसकी लाइफ होगी 100 साल से अधिक
इसके उलट इसकी लाइफ 100 साल से अधिक होगी। इसकी वजह इसको स्टील से बनवाया जाना है। अवध चौराहा पर कानपुर रोड के अलावा वीआईपी रोड और पारा की तरफ से आने वाले ट्रैफिक का दबाव पूरे दिन रहता है।
ऐसे में इस स्टील के पुल का तैयार करने का काम तड़के सुबह ही किया जाता है, इससे ट्रैफिक बाधित नहीं होता। यहां ट्रैफिक को बंद भी नहीं करना पड़ रहा है। आने वाले समय में भी चौराहा पर पिलर नहीं होने से ट्रैफिक बाधित नहीं होगा।
करीब 460 मीट्रिक टन वजन का स्टील का यह पुल अंबाला की एक स्टील फैक्ट्री में रेलवे के लिए काम करने वाली कंपनी एचएमएम इंफ्रा ने बनाया है। इसकी टेस्टिंग भी वहीं की गई। इसके बाद पुल को वहां खोलने के बाद लखनऊ भेज दिया गया। यहां इसे दोबारा से मेट्रो रूट पर लगाया जा रहा है।
लापरवाही की वजह से आलमबाग बस अड्डे पर ढही क्रॉसआर्म को अब तोड़कर दोबारा बनाने पर काम शुरू हो गया है। पिछले महीने एक हादसे में आधी क्रॉसआर्म ढह गई थी। इसमें तीन लोग घायल भी हुए। इस क्रॉसआर्म को पूरा तोड़कर दोबारा बनाने के लिए एमडी कुमार केशव ने आदेश दिए थे।