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जो ना समझे वो अनाड़ी है
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 20 Jan 2014 03:23 PM IST
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राजधानी की एक घटना सियासी गलियारों में सूबे के दो धुर विरोधी दलों के रिश्तों की असलियत समझने को लेकर हलचल मचाए हुए है।
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जड़ में है एक बड़ी कंपनी द्वारा सड़कों की खोदाई। बताया जाता है कि इस कंपनी ने सूबे की सरकार से ऐसी जुगत लगाई कि सड़कों की खोदाई की इजाजत मिल गई।
भगवा पार्टी के एक नेता ने अति उत्साह में सड़कों की उल्टी-सीधी खोदाई के विरोध में याचिका दायर कर दी। उम्मीद थी कि सरकार के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए पार्टी के नेता उनकी पीठ थपथपाएंगे।
पर, यह क्या? एक रात वे सोने की तैयारी कर रहे थे कि उनके फोन की घंटी बजने लगी। नेताजी हैलो भी नहीं बोल पाए थे कि उधर से डांट पड़नी शुरू हो गई।
दूसरी तरफ अहमदाबाद वाले नेताजी थे। उनसे चेतावनी भी मिली कि पार्टी में रहना और बढ़ना है तो इस खोदाई को भूल जाओ। बेचारे अवाक्...जवाब देते भी तो क्या।
इस कोशिश में जुट गए कि जैसे-तैसे यह मामला शांत हो जाए। पर, बात खुल गई। अब यह बात जिस किसी के कान में पड़ती है तो यही कहता है- ‘जो ना समझे वो अनाड़ी हैं।’
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