भारी भरकम टोल टैक्स: एक्सप्रेसवे से ज्यादा स्टेट हाईवे ढीली कर रहे जेब, देखें- कहां कितना करना पड़ता है खर्च
यूपी में स्टेट हाइवे पर एक्सप्रेसवे से ज्यादा टोल टैक्स वसूला जा रहा है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कार, जीप, वैन या हल्के मोटर वाहनों से 2.15 रुपये प्रति किलोमीटर टोल टैक्स वसूला जा रहा है। वहीं, मुजफ्फरनगर-सहारनपुर (स्टेट हाईवे-59) पर टोल टैक्स की यह दर 2.97 रुपये प्रति किमी है।
विस्तार
प्रदेश में तीन तरह के मार्गों पर टोल टैक्स वसूला जा रहा है। ये हैं-राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), राज्य राजमार्ग (एसएच) और एक्सप्रेसवे। आमतौर पर एनएच व एसएच जहां फोरलेन हैं, वहीं एक्सप्रेसवे वर्तमान में छह लेन हैं, जिन्हें आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। छह लेन होने के कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों की स्पीड अपेक्षाकृत ज्यादा रहती है। यातायात भी सुगम रहता है। पुल जैसी संरचनाएं एक्सप्रेसवे पर स्टेट हाईवे से कहीं ज्यादा हैं। कई बार इस तरह की संरचनाओं के कारण टोल महंगा पड़ता है।
- 302 किमी. लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कार से जाने पर एक तरफ का टोल टैक्स 650 रुपये है। यानी प्रति किमी 2.15 रुपये देने पड़ते हैं। वहीं, लखनऊ-फैजाबाद, लखनऊ-कानपुर और लखनऊ-रायबरेली एनएच पर कार का प्रति किमी 1.40 किमी. टोल टैक्स देना होता है।
- उप्र. स्टेट हाईवे अथॉरिटी (उपशा) की प्रदेश में तीन सड़के हैं- मुजफ्फरनगर-सहारनपुर स्टेट हाईवे, बरेली-अल्मोड़ा और वाराणसी-शक्ति नगर स्टेट हाईवे। मुजफ्फरनगर-सहारनपुर और वाराणसी-शक्ति नगर स्टेट हाईवे पर प्रति किमी. टोल की दरें क्रमश: 2.97 रुपये और 2.64 रुपये हैं।
- इसी तरह से बरेली-अल्मोड़ा स्टेट हाईवे पर टोल की दरें लखनऊ-फैजाबाद, लखनऊ-कानपुर और लखनऊ-रायबरेली नेशनल हाईवे से प्रति किमी. 56 पैसे ज्यादा है।
लागत के आधार पर टोल
रोड -- किमी. -- टोल टैक्स -- टोल टैक्स (प्रति किमी)
लखनऊ-फैजाबाद (एनएच-28) -- 161 -- 225 रुपये -- 1.397 रुपये
लखनऊ-कानपुर (एनएच-25) -- 64 -- 90 रुपये -- 1.40 रुपये
लखनऊ-रायबरेली(एनएच-24बी) -- 75 -- 105 रुपये -- 1.40 रुपये
मुजफ्फरनगर-सहारनपुर(एसएच-59) -- 52.167 -- 155 रुपये -- 2.97 रुपये
बरेली-अल्मोड़ा(एसएच-37) -- 53.568 -- 105 रुपये -- 1.96 रुपये
वाराणसी-शक्तिनगर(एसएच-5ए) -- 113.44 -- 300 रुपये -- 2.64 रुपये
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे -- 302.2 -- 650 रुपये -- 2.15 रुपये
लागत के आधार पर टोल
इस बारे में संबंधित अधिकारियों से बात की तो उन्होंने अपने हवाले से कुछ भी प्रकाशित न करने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि ये दरें लागत के आधार पर तय होती हैं। इन्हें उच्च स्तर से तय किया जाता है। उपशा की सड़कें निजी विकासकर्ताओं ने बनाई हैं। आम तौर पर पीपीपी मोड में बनाई गई सड़कों पर टोल अन्य सड़कों के मुकाबले ज्यादा होता है।