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अखिलेश ने नहीं दी सब्सिडी, टेल्को समेटेगी बोरिया-बिस्तर

Thu, 06 Feb 2014 12:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 06 Feb 2014 12:29 PM IST
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state govt did not give subsidy

सरकार द्वारा चिनहट औद्योगिक क्षेत्र में कैपिटल निवेश पर सब्सिडी न देने और टैक्स डिफरमेंट स्कीम लागू करने में बेरुखी राजधानी को बहुत महंगी पड़ने जा रही है।

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हजारों लोगों को रोजी-रोटी मुहैया कराने वाली टाटा मोटर्स की सहयोगी कंपनी टेल्को सरकार के रवैये से निराश होकर नए वित्तीय वर्ष 2014-15 से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना शुरू कर देगी।
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टाटा ने उत्तराखंड के प्लांट में अपने नए मॉडल के उस ट्रक को बनाने की तैयारी शुरू कर दी है जिसे लखनऊ के प्लांट में बनाने की योजना थी। इसके लिए टेल्को ने उत्तराखंड में एंसलरीज से बातचीत करने का सिलसिला शुरू कर दिया है।

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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के लखनऊ चैप्टर के सीनियर वाइस चेयरमैन पुनीत अरोरा ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2003 में मुलायम सरकार ने वादा तो टेल्को से किया था लेकिन उसका खामियाजा 120 से अधिक एंसलरीज भुगतेंगे।

उद्योगों को बढ़ावा देने का आश्वासन महज छलावा है। सरकार उद्यमियों को दिखाने के लिए मंत्री समूह से प्रकरण की रिपोर्ट मांग रही है। जबकि हकीकत में उनके लिए कुछ करना नहीं चाहती है।

इसी के चलते टेल्को ने ट्रक के नए मॉडल नंबर 3118 को उत्तराखंड के रुद्रपुर में बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। टेल्को के पलायन की खबर से सबसे अधिक खलबली ओमेक्स एंसलरीज में है।

चिनहट स्थित इकाई के जीएम जगत सिंह ने बताया कि कि उनकी एंसलरीज इस वक्त सबसे अधिक घाटे में है। लेकिन इस आस में बंद नहीं किया कि टेल्को के लिए काम करते-करते कभी तो मुनाफा होगा। जब लाभ होने का वक्त आया तो टाटा ने उत्तराखंड जाने की तैयारी शुरू कर दी है।


सीएम बोले, टेल्को पर फैसला जल्द

राजधानी से टेल्को के कामकाज समेटने संबंधी सवाल पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार जल्द ही इस पर फैसला लेगी। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।



नेता जी ने अपने शासनकाल में टेल्को को सहूलियतें दी थीं। पिछली सरकार ने इसे बंद कर दिया था। इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया था। सरकार इस मामले में बेहद गंभीर है और जल्द ही कोई न कोई फैसला किया जाएगा।

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