योगी सरकार के लिए भाजपा विधायक ही बने चुनौती, डैमेज कंट्रोल की कोशिश, संयम रखने की सलाह
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विधानसभा में मंगलवार को गाजियाबाद के लोनी से विधायक नंदकिशोर गुर्जर मामले में भाजपा विधायकों के हंगामे के बाद सरकार व संगठन डैमेज कंट्रोल के लिए मैदान में उतरे। मंगलवार देर रात से शुरू हुई डैमेज कंट्रोल की कोशिशें बुधवार को भी सुबह से लेकर देर शाम तक जारी रहीं।
सुबह संगठन के स्तर पर भी विधायकों को समझाया गया और आश्वस्त किया गया कि उनकी समस्याओं पर सरकार के साथ बैठकर बातचीत की जाएगी। साथ ही उनका समाधान कराया जाएगा।
उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बुधवार को दिन भर पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी ली और संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना सहित अन्य मंत्रियों से भी बातचीत कर पूरा मामला समझा। शाम को उन्होंने लोकभवन स्थित अपने कार्यालय में लगभग 25 से ज्यादा विधायकों को बुलाकर उनकी बात सुनी और शिकायतों व समस्याओं पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
विधायकों को संयम और अनुशासन में रहने की ताकीद
जानकारी के मुताबिक, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने जहां बुधवार की सुबह गाजियाबाद के विधायकों से बातचीत कर उन्हें समझाया तो कई अन्य विधायकों को भी फोन कर संयम और अनुशासन में रहने की ताकीद की। प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने भी कई विधायकों को फोन कर सार्वजनिक रूप से इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी।
यही नहीं, संगठन के निर्देश पर 20-25 विधायकों पर नियुक्त 16 सचेतकों ने भी अपने-अपने समूह के साथ बैठक कर उन्हें मनाया और समझाया। विधायकों के गुस्से और आक्रोश पर आश्वस्त किया कि सरकार उनके मान-सम्मान और स्वाभिमान का पूरा ख्याल रखेगी।
अगर कोई अधिकारी उनका अनादर करता है या उचित बात भी नहीं मानता है तो वे इसकी जानकारी उनके जरिये भी संगठन और सरकार को दे सकते हैं। जिस पर कार्रवाई कराई जाएगी। बस, खुद कुछ ऐसा न करें कि संगठन या सरकार की किरकिरी हो। यह भी समझाया गया कि इस तरह की घटनाओं से विपक्ष को मौका मिलता है।
योगी ने संसदीय कार्य मंत्री से मांगी रिपोर्ट
विधानसभा में मंगलवार को भाजपा विधायकों के हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना से रिपोर्ट मांगी है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि स्वस्थ संसदीय लोकतंत्र में हर जनप्रतिनिधि को बात रखने का अधिकार है, लेकिन उन्हें सदन की मर्यादा का भी ध्यान रखना होगा।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि 15-20 विधायक विधानसभा में अपनी बात रखना चाहते थे। उन्हें मौका नहीं मिल पाया तो वे धरने पर बैठे थे। योगी ने कहा कि स्वस्थ संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था है कि हर जनप्रतिनिधि अपनी बात रखे, लेकिन ऐसा करने के लिए उन संस्थाओं की मर्यादा का पालन करना होगा और अनुशासन रखना होगा।
उन्होंने कहा कि विधायकों के मामले में विधानसभा अध्यक्ष से बात हुई है। संसदीय कार्य मंत्री से भी रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्यवाही करेंगे।
विधायकों ने बताई दिक्कत, मुख्यमंत्री बोले-दूर करेंगे
जानकारी के मुताबिक, कुछ विधायकों ने संगठन और सरकार से कहा कि उन पर एक तरफ जनता का काम कराने का दबाव रहता है। कई बार क्षेत्र के लोगों की तात्कालिक समस्याएं होती हैं, जिनका तुरंत समाधान कराना पड़ता है।
यही नहीं, विधायकों ने कहा कि वे अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ शिकायत करते हैं तो उनका पत्र संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के पास ही पहुंच जाता है। जिससे विधायकों की स्थिति असहज हो जाती है। विधायकों को आश्वस्त किया गया कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
इस बीच, पता चला कि प्रयागराज, नोएडा, गाजियाबाद, बरेली सहित कुछ अन्य स्थानों के विधायकों को बुलाकर मुख्यमंत्री ने उनसे अलग-अलग बात की। जानकारी के मुताबिक, प्रयागराज से विधायक हर्ष वाजपेयी ने मुख्यमंत्री से अधिकारियों के रवैये की शिकायत की।
मुख्यमंत्री से मुलाकात पर नोएडा के विधायक धीरेंद्र सिंह ने बताया कि वे जेवर हवाई अड्डे को लेकर मिले थे। लोकभवन में मौजूद विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से मिलने नहीं बल्कि दूसरे काम से आए थे।