राज्य कर्मचारियों को एक माह में मिल जाएगी कैशलेस इलाज की सुविधा
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प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों के निजी चिकित्सालयों में इलाज कराने पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की सुविधा बहाली के लिए उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करने का फैसला किया है। सरकार ने यह फैसला राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल की मुख्य सचिव डॉ. अनूपचंद्र पांडेय के साथ हुई वार्ता के बाद किया है।
यह जानकारी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव चिकित्सा को एसएलपी दायर कर मजबूती से पैरवी करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी एक महीने में शुरू करा देने के निर्देश दिए हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी और महामंत्री शिवबरन सिंह यादव के नेतृत्व में 11 दिसंबर को राज्य कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव डॉ. अनूपचंद्र पांडेय से मिला था। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को बताया था कि कर्मचारियों के निजी चिकित्सालयों से इलाज कराने पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति पर न्यायालय की रोक के कारण काफी कठिनाई हो रही है।
कई जटिल बीमारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में कराना मुश्किल होता है। एक तो ज्यादातर जगह सुविधाएं नहीं होतीं और कई बार ज्यादा भीड़ होने के कारण चाहते हुए भी चिकित्सक समय पर चिकित्सा सुविधाएं नहीं दे पाते। इसलिए प्रदेश सरकार को तुरंत सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर उच्च न्यायालय की रोक हटवानी चाहिए, जिससे राज्य कर्मचारियों को राहत मिल सके।
पहले के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति का आदेश जल्द
तिवारी ने बताया कि परिषद के पदाधिकारियों की शुक्रवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से बातचीत हुई। उन्होंने आश्वस्त किया है कि न्यायालय की रोक से पहले यदि किसी कर्मचारी व अधिकारी ने निजी चिकित्सालय से इलाज कराया है और उसके खर्च की प्रतिपूर्ति नहीं हुई है, ऐसे मामलों में इलाज की प्रतिपूर्ति का आदेश अगले सप्ताह जारी हो जाएगा।
कार्मिक विभाग के आदेश से समस्या
तिवारी के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को बताया था कि राज्य कर्मचारियों एवं अधिकारियों को बीमारी में आने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति विभागीय निर्धारित प्रक्रिया के तहत वर्षों से होती रही है। पिछले दिनों किसी व्यक्तिगत प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने निजी चिकित्सालयों में इलाज कराने पर प्रतिपूर्ति न करने के निर्देश दे दिए। निर्देश किसी व्यक्तिगत मामले में था लेकिन कार्मिक विभाग ने उस निर्देश पर सभी कर्मचारियों की निजी चिकित्सालयों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर रोक लगा दी। एक ओर ‘कैशलेस इलाज’ का वादा पूरा नहीं हुआ है और कर्मचारियों व अधिकारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति भी बंद करा दी।