{"_id":"b3aef1e77a05719451f85b414202c0e5","slug":"ssc-exam-cheater-student","type":"story","status":"publish","title_hn":"SSC: इस कैंडिडेट का पहले से फिक्स था मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
SSC: इस कैंडिडेट का पहले से फिक्स था मामला
अनिल कुमार सिंह/लखनऊ
Updated Sun, 10 Nov 2013 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाका के दयानंद विद्या मंदिर में एसएससी की परीक्षा में नकल करते पकड़े गए अभ्यर्थी के पास हस्तलिखित कागज में मिली आंसर शीट पिछली परीक्षाओं में मोबाइल मैसेज से भेजी गई आंसरशीट के पैटर्न से मिलती है।
विज्ञापन
अंतर इतना था कि इस बार मोबाइल से आंसरशीट भेजने के बजाय अभ्यर्थी को कागज पर उसके प्रश्नपत्र के क्रमांक के उत्तर उपलब्ध कराए गए थे।
अंकित चौधरी के पास से जो पर्ची मिली उस पर पहले उसके प्रश्नपत्र का क्रमांक नंबर-333 एनजे-4 लिखा था। इसके बाद पांच-पांच के ग्रुप में सवालों के जवाब अंकों में लिखे थे।
विज्ञापन
पढ़ें- SSC Exam में रंगेहाथ पकड़े गए 10 मुन्नाभाई
विज्ञापन
जैसे पहले सवाल का सही जवाब ‘ए’ था तो एक लिखा था। दूसरे सवाल का जवाब ‘सी’ होने पर तीन लिखा हुआ था। इस तरह एक साथ पांच सवालों के जवाब एक से लेकर चार तक के अंकों के रूप में लिखे हुए थे।
पांच का एक ग्रुप कम्प्लीट होने के बाद लाइन बदलकर अगले पांच सवालों के जवाब लिखे हुए थे।
पता था किस क्रमांक का मिलेगा प्रश्नपत्र
परीक्षा में चार सीरीज के प्रश्नपत्र दिए जाते हैं। यानी परीक्षा के दौरान किस अभ्यर्थी को किस सीरीज का प्रश्नपत्र मिलेगा ये पहले से तय नहीं होता।
इसीलिए पिछली परीक्षाओं में पकड़े गए अभ्यर्थियों के मोबाइल के जरिये अपने प्रश्नपत्र का क्रमांक सॉल्वर को भेजने की बात सामने आई थी।
इसके बाद अभ्यर्थी को मैसेज के जरिये सवालों के सही जवाबों के नंबर भेजे जाते थे। मोबाइल को छिपाना काफी मुश्किल काम होता है।
पढ़ें- पढ़ाकू अपने जेबखर्च के लिए बन रहे सॉल्वर
लिहाजा सॉल्वर गिरोह ने नया तरीका निकाल लिया है। उन्होंने पहले से ही सेटिंग करके अभ्यर्थी का प्रश्नपत्र क्रमांक जुटा लिया।
अंकित को पहले ही बता दिया गया था कि उसके पास किस क्रमांक की आंसरशीट व बुकलेट होगी। इस तरह से रिस्क थोड़ा कम था।
एसएससी के अधिकारियों की नजर में अंकित पहले से ही चिह्नित किया जा चुका था। इसलिए जैसे ही उसने नकल करने की कोशिश की वो पकड़ा गया।
ऐसे आया गिरफ्त में
अंकित बागपत के कंडेरा गांव का रहने वाला है। कंडेरा के साथ ही बाजिदपुर, बसौली ऐसे गांव हैं जहां इससे पहले काफी अभ्यर्थी एसएससी की लिखित परीक्षाओं में सलेक्ट हो चुके हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन अभ्यर्थियों का जब साक्षात्कार हुआ तो लगभग सभी बेहद निचले स्तर के साबित हुए।
पड़ताल करने पर पता चला कि ज्यादातर अभ्यर्थियों का पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। छोटे-छोटे काम करके ये लोग अपनी गुजर-बसर करते हैं।
लखनऊ की तुलना में बागपत से मेरठ, झांसी और कानपुर ज्यादा करीब है। इसके बावजूद अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के लिए लखनऊ को ही चुनते हैं। अंकित ने भी ऐसा किया।
पहले से ही चिह्नित होने के कारण उस पर विशेष निगाह थी। पिछले ट्रेंड के हिसाब से पहले तो अंकित के पास मोबाइल तलाशा गया। मोबाइल नहीं मिलने पर उस पर नजर रखी गई और उसके पास से पर्ची बरामद हो गई।