एसएसबी में काफी पद खाली, सीमा की चौकियों पर होंगी महिला जवान
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सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में महिलाओं की तादाद बढ़ाई जाएगी। कुल संख्या का पांच फीसदी महिलाएं एसएसबी में रखने की तैयारी है। फिलहाल 1,200 महिलाएं इसमें काम कर रही हैं।
यह जानकारी एसएसबी की महानिदेशक अर्चना रामासुंदरम ने दी। उन्होंने बताया कि न सिर्फ महिलाओं की संख्या बढ़ाई जा रही है, बल्कि उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी।
जल्द ही सीमा की चौकियों पर भी महिला जवान व अफसरों की तैनाती शुरू की जाएगी। इसके लिए सीमा पर बन रही चौकियों को भी जेंडर फ्रेंडली बनाया जा रहा है।
एसएसबी की डीजी अर्चना रामासुंदरम सोमवार को लखनऊ स्थित एसएसबी फ्रंटियर के हेडक्वार्टर आई थीं। देश की पैरामिलिट्री फोर्स में पहली महिला चीफ बनने वाली अर्चना 1980 बैच की तमिलनाडु काडर की आईपीएस अफसर हैं।
मूलत: बलिया की रहने वाली अर्चना ने लखनऊ से एसएसबी के अफसरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर स्थिति का जायजा लिया। महानिदेशक बनने के बाद पहली बार लखनऊ आईं अर्चना ने बताया कि एसएसबी में काफी पद खाली हैं।
बॉर्डर पर तैनात जवानों को विशेष प्रशिक्षण
तीन-चार महीने में ये भर लिए जाएंगे। वरिष्ठ अफसरों को कहा गया है कि वे जवानों के वेलफेयर का विशेष ख्याल रखें। अपना व्यवहार भी उनके प्रति अच्छा रखें। उनकी निजी समस्या पर भी ध्यान दें, ताकि जवान खुश रहें।
रामासुंदरम ने बताया कि बॉर्डर आउट पोस्ट पर तैनात जवानों को दो हफ्ते के क्रैश कोर्स के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें तनाव कम करने के तरीके भी बताए जाएंगे।
नेपाल के हमारे बॉर्डर खुले हैं। इसलिए दोनों तरफ की आने-जाने वाली पब्लिक से भी हमें अच्छा व्यवहार रखना होता है। साथ ही यह भी देखना होता है कि आपराधिक तत्व खुली सीमाओं का फायदा न उठा लें।
डीजी ने कहा कि एसएसबी में मकान की बड़ी समस्या है। इसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लखनऊ में ही एसएसबी 400 क्वार्टर बना रही है। इसके अलावा और भी जगह मांगी जा रही है, जहां जवानों के लिए आवास बनाए जा सकें। सीमा की चौकियों पर तैनात जवान व अफसर अपना परिवार वहां नहीं रख सकते हैं। इसलिए उनके परिवार को आवास दिलाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।