क्या गुल खिलाएंगे सियासत के 'करन-अर्जुन'
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मुलायम सिंह यादव के पौत्र तेजप्रताप उर्फ तेजू यादव और लालू प्रसाद यादव की पुत्री के विवाह से दो बड़े राजनीतिक परिवार रिश्तों की डोर से ही नहीं बंधेंगे बल्कि इससे देश की सियासत में एक मजबूत राजनीतिक गठजोड़ भी आकार ले लेगा।
मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव के समधी बनने से सिर्फ इन दोनों की हैसियत नहीं बढ़ेगी बल्कि मुस्लिमों व पिछड़ों को राजनीति में एक मजबूत विकल्प भी मुहैया हो जाएगा। साथ ही पिछले दिनों बिखरे जनता दल परिवार को एकजुट करने का काम भी काफी आसान हो जाएगा।
वैसे भी केंद्र में मोदी की सरकार को देखते हुए इन रिश्तों से बनने वाले सियासी गठबंधन की संभावनाएं ज्यादा मजबूत और व्यापक नजर आती हैं। खासतौर से मुस्लिम मतदाताओं को इस बहाने एक मजबूत राजनीतिक विकल्प मिलने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ गई हैं।
जिस तरह मुस्लिम मतदाता का चुनावी मूड रहता है, उसके मद्देनजर स्वाभाविक रूप से लालू और मुलायम एक मंच पर खड़े होकर ज्यादा प्रभावी होंगे?
वे मुस्लिम मतदाताओं को ज्यादा आकर्षित करेंगे क्योंकि मुस्लिम मन में कहीं न कहीं यह बात जरूर रहेगी कि दो बड़े पिछड़े चेहरों के कारण पिछड़ा और उनका (मुसलमान) वोट मिलकर भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकता है।
एक जैसा रहा है लालू-मुलायम का जीवन
वैसे तो दोनों नेता अब संबंधी होने के कारण एक हो जाएंगे पर दोनों में एक जैसी कई बातें हैं। यूपी की राजनीति में मुलायम मौजूदा दौर के सबसे कद्दावर नेता माने जाते हैं। उसी तरह लालू प्रसाद ने बिहार पर 15 साल राज किया।
मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री हैं तो लालू की पत्नी राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। धर्मनिरपेक्षता के सवाल पर भी दोनों एक ही जैसे दिखते हैं। छात्र राजनीति से देश की सियासत में आने के अलावा दोनों ही आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले तत्कालीन युवा चेहरों में अग्रणी रहे हैं।
राम जन्मभूमि आंदोलन में एक जैसी भूमिका
दोनों ही डॉ. राम मनोहर लोहिया और चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विचारधारा के माने जाते हैं। लालू 1977 में पहली बार सांसद चुने गए तो मुलायम सिंह उसी साल यूपी सरकार में सहकारिता के कैबिनेट मंत्री बने।
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान दोनों लोगों की भूमिका एक जैसी रही। अगर यह कहा जाए कि एक-दूसरे के पूरक बने तो भी अतिश्योक्ति न होगी।
मुलायम ने अयोध्या में विवादित ढांचे पर झंडा फहराने के लिए जुटे कारसेवकों को रोकने के लिए सख्त फैसले लेने में संकोच नहीं किया तो लालू ने सोमनाथ से रथ लेकर अयोध्या आ रहे लालकृष्ण आडवाणी जैसे बड़े नेता को गिरफ्तार कराने में थोड़ी भी हिचक नहीं दिखाई। लालू तब बिहार के मुख्यमंत्री थे।
कर चुके हैं एक दूसरे का विरोध
एक ही वैचारिक स्कूल से निकले मुलायम और लालू लंबे समय तक राजनीति के विपरीत ध्रुव रहे हैं। 1997 में देवगौड़ा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने पर प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम सिंह यादव के नाम का लालू प्रसाद ने ही विरोध किया था। इसके बाद इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री बने थे।
मुलायम भी कई बार लालू के खिलाफ ताल ठोंकते नजर आए। दोनों के प्रत्याशी भी एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े। अब लालू यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी की शादी मुलायम सिंह यादव के पौत्र सांसद तेज प्रताप सिंह के साथ तय हुई है। जाहिर है कि रिश्तों की शहनाई की गूंज देश की राजनीति को नए सुरों से गुंजित करेगी।
निकट आएगा जनता दल परिवार
लालू और मुलायम सिंह के बीच सामाजिक संबंध कायम होने से जनता दल परिवार की एकता की संभावनाएं ज्यादा मजबूत होंगी।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जद (यू) अध्यक्ष शरद यादव इसकी लगातार वकालत कर रहे हैं। कहीं न कहीं अड़चने और मुलायम सिंह और लालू प्रसाद के रुख को लेकर थी। तेजप्रताप और राजलक्ष्मी की शादी तय होने से यह अड़चन दूर हो जाएगी।