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Lucknow News: निजी अस्पतालों की इमरजेंसी से कुशल विशेषज्ञ गायब, दूसरी विधा के डॉक्टर संभाल रहे जिम्मेदारी
Tue, 28 Feb 2023 10:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Feb 2023 10:42 AM IST
सार
शहर में करीब 1300 से अधिक निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इसमें करीब 300 अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं, जो 24 घंटे अस्पताल में मिलेंगे। बाकी एक हजार अस्पताल की इमरजेंसी दूसरी विधा के डॉक्टर संभाल रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
स्वास्थ्य विभाग मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करवा रहा है। निजी अस्पतालों की इमरजेंसी संभालने के लिए एमबीबीएस डॉक्टर 24 घंटे तैनात होना चाहिए, लेकिन बड़े अस्पतालों को छोड़कर हर जगह दूसरी विधा के डॉक्टर इमरजेंसी संभाल रहे हैं। ऑन कॉल ही निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में चल रहे इस खेल की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में आए दिन मरीज निजी अस्पतालों के चंगुल में फंसकर अपनी जान गंवा रहे हैं।
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शहर में करीब 1300 से अधिक निजी अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इसमें करीब 300 अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर तैनात हैं, जो 24 घंटे अस्पताल में मिलेंगे। बाकी एक हजार अस्पताल की इमरजेंसी दूसरी विधा के डॉक्टर संभाल रहे हैं। कुशल विशेषज्ञ की सेवाएं न मिलने से आए दिन निजी अस्पतालों में मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, लेकिन अफसरों की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। नर्सिंग होम के नोडल अफसर डॉ. एपी सिंह ने बताया इमरजेंसी संचालन के लिए एमबीबीएस डॉक्टर होना चाहिए। इसके बिना संचालन होने पर अस्पताल पर कार्रवाई हो सकती है। बताया निजी अस्पतालों की इमरजेंसी की जांच कराई जाएगी। जांच में जो गड़बड़ी मिली तो अस्पताल संचालन पर रोक लगाई जाएगी।
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आईसीयू चला रहे, विशेषज्ञ गायब
शहर के 90 फीसदी अस्पतालों में आईसीयू का संचालन हो रहा है। वेंटिलेटर पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, लेकिन मरीजों का इलाज दूसरी विधा के डॉक्टर कर रहे हैं। ऑन कॉल विशेषज्ञ आईसीयू का विजिट करके लौट रहे हैं।
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होम्योपैथिक डॉक्टर चला रहा था इमरजेंसी
स्वास्थ्य विभाग ने बीते साल पीजीआई स्थित एक निजी अस्पताल पर छापा मारा तो इमरजेंसी का संचालन होम्योपैथिक डॉक्टर करता मिला। सीएमओ की टीम ने अस्पताल को नोटिस जारी करने संग उसके संचालन पर रोक लगाई थी। यही स्थिति अधिकतर निजी अस्पतालों की है। जहां पर कुशल विशेषज्ञ की बजाए दूसरी विधा के डॉक्टर इमरजेंसी संभाले हैं।