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सपा का दांव, पार्षदों को भी मिलेगा भत्ता

Sat, 30 Nov 2013 08:14 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ Updated Sat, 30 Nov 2013 08:14 PM IST
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special perks for councilors in up

सत्ताधारी दल ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले शहरी क्षेत्रों में अपना जनाधार ठीक करने के लिए निकाय के पार्षदों पर डोरे डालने की तैयारी कर ली है।

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राज्य सरकार पार्षदों को भत्ता देने जा रही है। इसकी घोषणा शीघ्र ही हो सकती है। मुमकिन है, यात्रा भत्ता के रूप में उन्हें यह फायदा पहुंचाया जाए। पार्षदों की बैठक में नगर विकास मंत्री आजम खां इसकी घोषणा खुद करेंगे।
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यह बैठक कब और कहां होगी इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। आजम इसके पहले निकाय अध्यक्षों के साथ बैठक कर चुके हैं और उनकी मांग पर निकायों में संविदा कर्मियों की भर्ती पर लगी रोक समाप्त की जा चुकी है।
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11,290 पार्षदों के लिए खुशखबरी

प्रदेश में 630 निकाय हैं। इसमें 11,290 सदस्य यानी पार्षद हैं। निकायों का मुख्य काम शहरी क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं देना है। सपा की शहरी क्षेत्रों में अच्छी पकड़ नहीं है। इसलिए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा शहरों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। इसके लिए सबसे बेहतर माध्यम निकाय चेयरमैन और पार्षद हैं।

आजम खां चूंकि नगर विकास मंत्री हैं, इसलिए यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। इस काम में वह बखूबी जुट भी गए हैं। निकाय अध्यक्षों के साथ वह बैठक कर चुके हैं। अब वह पार्षदों के साथ बैठक करने वाले हैं।

हो सकती हैं बड़ी घोषणाएं

सूत्रों की मानें तो अंदरखाने इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। इस मौके पर आजम पार्षदों के लिए कुछ बड़ी घोषणाएं भी कर सकते हैं। इसमें उन्हें यात्रा भत्ता के अलावा कुछ अन्य सुविधाएं दी जा सकती हैं। नगर विकास विभाग ने भत्ता देने संबंधी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

अभी यह तय किया जाना बाकी है कि उन्हें यात्रा भत्ता कितना और किस मद में दिया जाए। इसे शीघ्र ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इसके बाद ही बैठक की तारीख तय की जाएगी।


पहले भी हुआ था आदेश
निकाय के पार्षदों को वर्ष 2003 में भत्ता देने संबंधी आदेश किया गया था, लेकिन 300 रुपये प्रति माह भत्ता देने के आदेश पर नाराजगी बढ़ गई थी। इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट में चला गया और उसके आदेश पर इसे रोक दिया गया।

क्या है मौजूदा व्यवस्था
इस समय निकायों के पार्षदों को सरकारी तौर पर कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर उन्हें विकास कार्यों का कोटा आवंटित किया जाता है। पार्षद इससे अपने क्षेत्रों में काम कराकर क्षेत्रीय जनता को खुश कर लेते हैं। निकाय केवल उन्हें लेटर पैड ही देते हैं। इसके अलावा अन्य खर्च का वहन उन्हें स्वयं अपने स्तर पर करना होता है।

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