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मुलायम ने बदली चाल, गद्दारों को लगाएंगे गले!

Fri, 28 Nov 2014 11:28 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 28 Nov 2014 11:28 AM IST
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SP to take its leaders back who did revolt for tickets.

विरोधी दलों के पैंतरों को देखते हुए समाजवादी पार्टी अपने उन नेताओं को फिर से गले लगाएगी जो 2012 के विधानसभा चुनाव या 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले किन्हीं कारणों से बगावत कर गए थे।

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जौनपुर के केपी सिंह यादव और बाराबंकी के छोटेलाल यादव को सपा में शामिल करके इसकी शुरुआत हो चुकी है। आने वाले दिनों में कुछ और बिछड़े नेता सपा का दामन थाम सकते हैं।
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सपा ने पिछले दिनों लोकसभा चुनाव में पार्टी का विरोध करने वाले नेताओं (गद्दारों) को चिह्नित करने का अभियान चलाया था। इसके लिए दो दर्जन जिलों में पर्यवेक्षक भेजकर रिपोर्ट मंगाई गई। इस रिपोर्ट पर कार्रवाई के बजाय सपा ने बिछड़े नेताओं की वापसी शुरू कर दी है।
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बदले सियासी हालात में सपा का सर्वाधिक ध्यान पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को जोड़ने पर टिका हुआ है। पिछड़ों में यादव उसका सबसे मजबूत और बेस वोट माना जाता है।

इनको मनाने में सफल रही पार्टी

SP to take its leaders back who did revolt for tickets.

पहली कोशिश किन्हीं कारणों से बिछड़ गए पिछड़ों, खास तौर से यादवों और मुसलमानों को पार्टी में वापस लाने की है। इसी कड़ी में जौनपुर से आम आदमी पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ चुके गोसेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ. केपी सिंह यादव की सपा में वापसी हो चुकी है।

केपी को सपा ने जौनपुर से प्रत्याशी बनाया था लेकिन आखिरी वक्त में उनका टिकट काटकर मंत्री पारसनाथ यादव को दे दिया गया। स्थापना के समय से ही सपा से जुड़े केपी की वापसी करके पार्टी ने विभिन्न कारणों से नाराज हुए पुराने नेताओं को मुख्य धारा में शामिल करने का संकेत दे दिया है।

बाराबंकी के नवाबगंज से तीन बार विधायक और खाद्य प्रसंस्करण समिति के चेयरमैन रह चुके छोटेलाल यादव की भी कुछ दिन पहले पार्टी में वापसी हुई है। यादव पिछले विधानसभा चुनाव में बगावत करके कांग्रेस में चले गए थे।

मंत्री समेत कई नेता हो गए थे बागी

SP to take its leaders back who did revolt for tickets.

लोकसभा चुनाव के दौरान कृषि मंत्री आनंद सिंह को इसलिए हटा दिया गया था क्योंकि उनके बेटे कीर्तिवर्धन सिंह भाजपा से चुनाव लड़ रहे थे। अब आनंद सिंह को फिर से मंत्री बनाए जाने की चर्चा गर्म है। वे सपा मुखिया और मुख्यमंत्री के संपर्क में बने हुए हैं।

फर्रुखाबाद की अमृतपुर सीट के विधायक और तत्कालीन मंत्री नरेंद्रसिंह यादव लोकसभा चुनाव के दौरान अपने बेटे सचिन यादव का टिकट कटने पर बागी हो गए थे। उन्होंने सचिन को फर्रुखाबाद से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतार दिया था। इसकी कीमत उन्हें मंत्री पद गंवाकर चुकानी पड़ी थी।

वहीं, सपा ने सहारनपुर में पहले इमरान मसूद को प्रत्याशी बनाया था। बाद में उनका टिकट काटकर उनके ही परिवार के शाजान मजूद को उम्मीदवार बना दिया गया।

इससे नाराज इमरान कांग्रेस से चुनाव लड़े थे। पार्टी के कुछ नेता उनकी सपा में वापसी के पक्ष में हैं। बरेली में मौलाना रजा खां ने सपा से गठबंधन तोड़ लिया था। अब उन्हें भी साथ लेने की कोशिशें जारी हैं।

भाजपा के पिछड़ा प्रेम से तो नहीं बदली रणनीति?

SP to take its leaders back who did revolt for tickets.

लोकसभा चुनाव में सपा को करारी शिकस्त देने के बाद भाजपा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। सपा का पिछड़ों को जोड़ने पर खास ध्यान रहता है। इसी तबके पर भाजपा की भी नजर है।

उसने पिछड़े वर्ग के चार नेताओं उमा भारती, संतोष गंगवार, डॉ. संजीव बालियान और साध्वी निरंजन ज्योति को केंद्र में मंत्री पद दिया है। संगठन में भी पिछड़ों को तरजीह दी जा रही है।

हाल ही भाजपा ने 12 जिलाध्यक्ष बदले हैं। इनमें तीन जिलों में यादवों को कमान सौंपी गई है। राजधानी लखनऊ में रामनिवास यादव, देवरिया में पूर्व एमएलसी महेंद्र सिंह यादव और बलिया में देवेंद्र सिंह यादव को अध्यक्ष बनाया गया है।

अमेठी से जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव को हटाया गया तो उन्हें काशी प्रांत के क्षेत्रीय मंत्री पद जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई है।

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