सपा से गद्दारी के आरोप में निलंबित चारों विधायक बहाल
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समाजवादी पार्टी ने रामपाल यादव समेत सीतापुर के पांचों सपा विधायकों का निलंबन समाप्त कर दिया। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने शनिवार दोपहर विधानमंडल दल और पार्टी से उनका निलंबन समाप्त कर दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सपा ने सीतापुर से शिवकुमार गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था। बिसवां के विधायक रामपाल यादव ने पार्टी से बगावत करके अपने बेटे जितेंद्र यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव लड़ाया था।
इस पर सपा ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में विधानमंडल दल और पार्टी से निलंबित कर दिया था। जितेंद्र यादव की जीत के बाद 13 जनवरी को सपा ने चार अन्य विधायकों सीतापुर के राधेश्याम जायसवाल, सेवता के महेंद्र सिंह उर्फ झीन बाबू, महोली के अनूप कुमार गुप्ता और सिधौली के मनीष रावत को विधानमंडल दल और सपा से निलंबित कर दिया था।
निलंबित विधायकों ने कराया अपनी ताकत का एहसास
इन सभी पर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में रामपाल यादव के बेटे की मदद करने का आरोप था। निलंबित विधायकों ने ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भी अपनी ताकत का अहसास कराया था।
सपा के अधिकृत उम्मीदवारों को हराकर उनके छह समर्थक ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए हैं। पांचों विधायक शनिवार सुबह ही सपा मुखिया से मिले थे।
मुलायम ने उन्हें भविष्य में अनुशासनहीनता न करने की हिदायत के साथ ही विधान परिषद चुनाव में सपा प्रत्याशी को जिताने के लिए कहा था।
अखिलेश ने पहले ही दे दिया था वापसी का आश्वासन
तीन दिन पहले पांचों निलंबित विधायकों ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। उन्होंने निलंबन जल्द वापस कराने का आश्वासन दिया था।
एमएलसी चुनाव बना जल्द वापसी की वजह
एमएलसी चुनाव सपा के पांचों विधायकों की पार्टी व विधानमंडल दल में जल्द वापसी की वजह बना।
स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की सीतापुर सीट से लोहिया वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद सिंह भदौरिया एमएलसी का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री का नजदीकी माना जाता है।
विधायकों की बगावत भदौरिया को भारी पड़ सकती थी। इसलिए उनकी पार्टी में आसानी से वापसी हो गई।