यूपी के पंचायत चुनाव में सपा की रणनीति 'फ्रेंडली फाइट'
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सपा की जिला इकाइयों ने पंचायत सदस्य चुनाव के लिए प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी जनपदों में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के दावेदारों से आवेदन मांगे गए हैं।
जिला स्तरीय चयन समिति की बैठक में उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। सहमति न बनने पर किसी को चुनाव लड़ने से रोका नहीं जाएगा। उन्हें चुनाव में फ्रैंडली फाइट के लिए छोड़ दिया जाएगा।
सपा ने प्रत्याशियों के चयन के लिए जिला स्तरीय चयन समिति बनाई है। इसके संयोजक जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। इसमें सभी विधायक, पूर्व विधायक, सांसद, पूर्व सांसद, हारे हुए प्रत्याशी, वर्तमान और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला महामंत्री, शहर अध्यक्ष व महामंत्री आदि को शामिल किया गया है। जिला स्तर पर सभी दावेदारों से वार्डवार आवेदन मांगे गए हैं।
चयन समिति इनके आवेदनों पर विचार-विमर्श करेगी। जिन वार्डों में केवल एक दावेदार होगा, उन्हें तत्काल अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा। एक से ज्यादा दावेदार होने पर आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए दावेदारों से बात भी की जाएगी।
नहीं उतारा जाएगा किसी खास प्रत्याशी को
यदि किसी सीट पर आम सहमति न बनी तो किसी खास प्रत्याशी को थोपा नहीं जाएगा। ऐसी स्थिति में सपा से जुड़े नेताओं के बीच दोस्ताना मुकाबला हो सकता है।
सपा नेताओं के मुताबिक जरूरी नहीं है कि जिला पंचायत के सभी वार्डों में सपा के अधिकृत प्रत्याशी उतारे जाएं। अधिकृत प्रत्याशी वहीं खड़े किए जाएंगे जहां किसी एक नाम पर सहमति बन जाएगी।
विधायकों, मंत्रियों पर चुनाव जिताने की जिम्मेदारी
जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव जिताने की जिम्मेदारी भी जिला स्तरीय चयन समिति की होगी। इसमें विधायक और मंत्री भी शामिल हैं। उन्हें अपने क्षेत्रों में पड़ने वाले विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
सपा की कोशिश है कि 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में पंचायत चुनाव में जीत हासिल कर जनता पर पकड़ साबित की जाए। सपा के ज्यादा जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए तो जिला पंचायत अध्यक्ष चुनने में आसानी होगी।