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Swami Prasad: स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बोल, बौद्ध मठ तोड़कर बद्रीनाथ, केदारनाथ और जगन्नाथपुरी बनाए गए

Sun, 30 Jul 2023 09:03 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 30 Jul 2023 09:03 PM IST
सार

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा मंदिर मस्जिद के सहारे समाज में भेदभाव फैलाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और जगन्नाथपुरी पहले बौद्ध मठ थे।

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SP leader Swami Prasad Maurya says BJP is doing politics to devide the country.
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सपा नेता व पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि केदारनाथ, बद्रीनाथ और जगन्नाथ धाम समेत बड़ी संख्या में तीर्थस्थल बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। अगर भाजपा के लोग हर मंदिर में मस्जिद ढूंढने का काम करेंगे तो हर मंदिर में बौद्ध मठ ढूंढा जाएगा। जोकि, काफी महंगा पड़ेगा। इसलिए देश में भाईचारा कायम रखने के लिए जरूरी है कि सभी धार्मिक स्थलों का स्वरूप वैसा ही रहने देना चाहिए, जैसाकि 15 अगस्त 1947 को था।

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स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस करके विभिन्न इतिहासकारों, प्रकांड विद्वान पंडित राहुल सांकृत्यायन, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती के हवाले से कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य, उनके सहयोगियों और उन्हें मानने वाले राजाओं ने प्राचीन काल में बड़े पैमाने पर बौद्ध मठों को तुड़वाया। पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर भी बौद्ध मठ को परिवर्तित करके बनाया गया है। उत्तराखंड के कुमाऊं में भी ऐसा बड़े पैमाने पर किया गया। इसलिए उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी का यह कहना है कि मैं (मौर्य) उनकी आस्था को प्रभावित कर रहा हूं, उचित नहीं है।
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स्वामी प्रसाद ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों की आस्था की भी उतनी ही चिंता करनी चाहिए, जितनी उसे अपनी आस्था की चिंता रहती है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के मंदिरों को भी तोड़कर हिंदू तीर्थस्थल बनाए गए हैं। विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के रथ उत्सव की उत्पत्ति भी बुद्ध धम्म व संघ के आयोजन से जुड़ी है। जगन्नाथ मंदिर की छवियां भी बुद्ध धर्मावलंबियों की मान्यता संबंधी प्रतिमाओं से मिलती-जुलती हैं।
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स्वामी प्रसाद ने कहा कि अन्य धर्मों और उनकी मान्यताओं व पूजा स्थलों का सम्मान करने पर देश से नफरत का माहौल खत्म होगा। साथ ही कहा कि मैं भाजपा के उन लोगों को सावधान करना चाहता हूं जो हर मस्जिद में मंदिर ढूंढ रहे हैं कि इससे भाईचारा बिगड़ेगा।

मायावती के हर ट्वीट का जवाब देना उचित नहीं
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने से संबंधित बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान पर कहा, मायावती उनकी नेता रही हैं। इसलिए मायावती के सम्मान के लिए उनकी हर ट्वीट का जवाब देना मेरे लिए उचित नहीं हैं।

मेरी बात एतिहासिक प्रमाणों पर
यह पूछे जाने पर कि बौद्ध मठों को लेकर उनके विचार व्यक्तिगत हैं या समाजवादी पार्टी भी इसका समर्थन करती है, क्योंकि सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव उनके बयानों का खंडन कर देते हैं? स्वामी प्रसाद ने कहा कि इस बारे में उनकी शिवपाल सिंह यादव से पहले से कोई बात नहीं हुई है। जो कुछ कह रहा हूं, वो एतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित है।


स्वामी प्रसाद का बयान ओछी मानसिकता का प्रतीक : भूपेंद्र चौधरी
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने समाजवादी पार्टी के महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर पलटवार किया है। चौधरी ने रविवार को ट्वीट कर कहा कि स्वामी प्रसाद का बयान उनकी ओछी मानसिकता और तुच्छ राजनीति को दर्शाता है।

चौधरी ने कहा कि सनातन धर्म का बार-बार अपमान करना सपा के नेताओं की घृणित मानसिकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सपा के एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने हिंदुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र बाबा केदारनाथ, बाबा बद्रीनाथ एवं जगन्नाथ पुरी के बारे में विवादित बयान दिया है। उनका यह बयान देश के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने और समाज में विद्वेष उत्पन्न करने वाला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपना मत स्पष्ट करना चाहिए कि क्या समाजवादी पार्टी उनके बयान से सहमत है ? स्वामी प्रसाद को जनता से माफी मांगनी चाहिए।

मौर्य के बहकावे में नहीं आने वाले बौद्ध और मुस्लिम: मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि हाल ही में स्वामी प्रसाद मौर्य ने बयान दिया है कि बद्रीनाथ सहित अनेक मंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। आधुनिक सर्वे अकेले ज्ञान व्यापी मस्जिद का क्यों अन्य प्रमुख मंदिरों का भी होना चाहिए। यह केवल नए विवादों को जन्म देने वाला विशुद्ध राजनीतिक बयान है। मौर्य लंबे समय तक भाजपा सरकार में मंत्री रहे तब उन्होंने इस बारे में सरकार पर ऐसा दबाव क्यों नहीं बनाया। अब चुनाव के समय ऐसा धार्मिक विवाद पैदा करना उनकी व सपा की घिनौनी राजनीति नहीं तो और क्या है। बौद्ध, मुस्लिम समाज इनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं।
 

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