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तीन लाख शिक्षकों की कमी, कैसे होगी पढ़ाई?
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 06 Sep 2014 02:15 AM IST
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भाजपा ने सूबे में शिक्षा के गिरते स्तर के लिए सपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
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पार्टी प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन ने शुक्रवार को कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मुफ्त बंटने वाली किताबों की गुणवत्ता बेहद घटिया है।
केंद्र सरकार पाठ्य-पुस्तकों पर प्राथमिक कक्षाओं के लिए 150 रुपये और जूनियर स्कूलों के लिए 200 रुपये प्रति विद्यार्थी बजट देती है।
जबकि यूपी सरकार प्राइमरी कक्षाओं में प्रति विद्यार्थी 50 से 60 रुपये और जूनियर स्कूलों में प्रति विद्यार्थी 150 रुपये से भी कम खर्च करती है और तो और स्कूलों में शिक्षकों की काफी कमी है।
सूबे के सरकारी प्राइमरी, इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेजों में फिलहाल शिक्षकों के कुल 3,06,707 पद खाली हैं। ऐसे में सूबे का शैक्षिक स्तर कैसे सुधरेगा।