फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   sp can sackes more leaders

अखिलेश का बदला अधूरा, कई और मंत्री होंगे बर्खास्त!

Thu, 22 May 2014 10:42 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 22 May 2014 10:42 AM IST
विज्ञापन
sp can sackes more leaders

सपा सरकार ने चुनावी हार के लिए कुसूरवार माने गए मंत्रियों और पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के साफ संकेत दिए हैं।

विज्ञापन


इसमें अखिलेश सरकार के मंत्रियों से लेकर संगठन में अहम पदों पर तैनात लोग शामिल हो सकते हैं।

अखिलेश सरकार के कई मंत्रियों को लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है।

पहले दौर मे हार का ठीकरा उन पर फूटा है जिन्हें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने के ख्याल से मंत्रीपद का दर्जा दिया गया था।

100 से ज्यादा नेता थे दर्जा प्राप्त मंत्री

sp can sackes more leaders

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ही सौ से ज्यादा नेताओं को दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया गया था। हाईकोर्ट ने भी इन नियुक्तियों को अवैध ठहराया था।


सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें मंत्रिपरिषद के गठन के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है। वजह अदालती आदेश हों या लोकसभा चुनाव में करारी हार, अखिलेश सरकार ने कई दिनों की अटकलों के बाद मंगलवार को 36 दर्जा प्राप्त मंत्रियों की छुट्टी कर दी।

नियमानुसार कोई भी सरकार 15 फीसदी से ज्यादा विधायकों को मंत्री नहीं बना सकती।

इसीलिए, रुतबे और पार्टी नेताओं की वीआईपी कल्चर की ललक शांत करने के लिए मंत्री या राज्यमंत्री का दर्जा देने का रास्ता निकाला गया।

बसपा सरकार के 18 जुलाई 2007 के आदेश का हवाला देकर सपा सरकार ने मनचाहे लोगों को दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

हारे हुए नेताओं को बना दिया मंत्री

sp can sackes more leaders

विधानसभा चुनाव में हारे हुए नेता हों, पूर्व विधायक, वरिष्ठ नेता या युवा संगठनों के पदाधिकारी, सभी को दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया गया।

कई लोगों को राज्यमंत्री का दर्जा देकर चुनावों में भी उतारा गया। बिजनौर सीट से अनुराधा चौधरी का टिकट काटा तो अगले ही दिन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का रुतबा दे दिया।

प्रोन्नत होकर आईएएस बने तपन प्रसाद ने वीआरएस लेकर सपा में शामिल होने की घोषणा की तो कुछ ही दिन बाद उन्हें प्रशासनिक सुधार विभाग का सलाहकार बना दिया गया।

मेरठ शहर सीट से विधानसभा चुनाव हारे अय्यूब अंसारी को पर्यटन विभाग का सलाहकार बनाया गया।

शामली से विधानसभा चुनाव हारे वीरेन्द्र सिंह को उत्तर प्रदेश (पश्चिम) गन्ना एवं बीज विकास निगम का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया।

विज्ञापन

इन मंत्रियों ने सरकार भी किरकिरी भी कराई है

sp can sackes more leaders

दर्जाधारी मंत्रियों ने कई मौकों पर सरकार की फजीहत कराई है। एस्कोर्ट न मिलने पर कई दर्जा प्राप्त मंत्री हंगामा कर चुके हैं, अफसरों से भिड़ चुके हैं।

ताजा मामला श्रम एवं सेवायोजन विभाग के सलाहकार मो. अब्बास और खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम के अध्यक्ष इकराम कुरैशी से जुड़ा है।

तहलका के स्टिंग आपरेशन में उन्हें ग्राम विकास अधिकारी पद पर नौकरी के लिए पैसे के लेनदेन की बातें करते दिखाया गया।

कैबिनेट दर्जा प्राप्त राज्य प्रमाणीकरण निगम के अध्यक्ष साहब सिंह सैनी पहली पत्नी रहते दूसरी शादी करने के आरोप में घिरे हैं।

कैबिनेट दर्जाधारी नरेन्द्र भाटी उस समय चर्चा में आए थे जब खनन का विरोध करने पर उन्होंने आईएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल को निलंबित करा दिया था।

मिलती हैं ये सुविधाएं

sp can sackes more leaders

दर्जा प्राप्त मंत्रियों को सामाजिक, राजनीतिक रुतबे के साथ ही आर्थिक लाभ भी मिलते हैं। उन्हें 40 हजार रुपये मानदेय और राजधानी में दफ्तर और आवास की सुविधा दी जाती है।

आवास न लेने पर दस हजार रुपया भत्ता मिलता है। बैठकों या सरकारी टूर के लिए ट्रेन और हवाई जहाज से यात्रा की सुविधा मिलती है।

निजी सचिव, चपरासी की सुविधा भी है। कैबिनेट मंत्रियों की सुविधाएं राज्यमंत्री का दर्जा वालों से ज्यादा हैं।

इसके अलावा मेडिकल एलाउंस की सुविधा मिलती है। औसतन एक दर्जाधारी मंत्री पर महीने में एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च होता है।

ओमवीर सिंह तोमर भी हटाए गए

sp can sackes more leaders

लोकसभा चुनाव की घोषणा से पखवाड़ा भर रहे योजना आयोग के सलाहकार बनाए गए बागपत के ओमवीर सिंह तोमर ने ‘संघर्ष के सफर का नायक मुलायम’ पुस्तक लिखी।


इसका विमोचन इसी साल 19 जनवरी को उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने दिल्ली के विज्ञान भवन में किया था।

जौनपुर के सतेन्द्र उपाध्याय योजना आयोग में सलाहकार बनाए गए थे। तोमर के साथ ही उन्हें भी हटा दिया गया है।

मुजफ्फरनगर दंगे पर ये अपनाई रणनीति

sp can sackes more leaders

मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वेस्ट यूपी में खूब दर्जाधारी मंत्री बनाए गए। अकेले मेरठ जिले में चार नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया।

इनमें तीन नेता मुस्लिम और एक जाट हैं। आसपास के जिलों में कई नेताओं को राज्यमंत्री दर्जे के पद दिए गए।

इसे मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वोटों के समीकरण को साधने की रणनीति का हिस्सा माना गया। हालांकि जनता ने इसे आसानी से समझ लिया और सपा को इस लोकसभा चुनावों में सबक सिखा दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed