यूपी चुनाव 2022: सपा-प्रसपा के ‘धर्मयुद्ध’ की कहानी अभी अधूरी, तल्खी व नरमी से बंधी है गठबंधन की गांठ
सपा व प्रसपा 12 अक्तूबर को एक साथ यूपी को चुनाव को ध्यान में रखकर यात्राएं निकाल रहे हैं। इनके प्रमुख नेताओं के होंठो पर भले ही तल्खी दिख रही हो, लेकिन दिल में नरमी बरकरार है।
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सपा व प्रसपा के ‘धर्मयुद्ध’ की कहानी अभी अधूरी है। इनके होंठों पर भले ही तल्खी दिख रही हो, लेकिन दिल में नरमी बरकरार है। चाचा-भतीजे की डॉ. लोहिया की पुण्यतिथि 12 अक्तूबर को शुरू हो रही यात्राएं सियासी ताप नापेंगी। साथ ही ताकत का अहसास कराएंगी।
यह अहसास दोनों दिलों की दूरी को नजदीकी में तब्दील कर सकती है। क्योंकि राहें भले जुदा-जुदा हों, पर मकसद एक ही है। सैफई परिवार में दखल रखने वाले भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रहे हैं। वे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन 22 नवंबर के बाद तस्वीर साफ होने का इशारा करते हैं।
सपा और प्रसपा के गठबंधन को लेकर लंबे समय से कयासबाजी चल रही है। प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव 12 अक्तूबर को सामाजिक परिवर्तन रथयात्रा निकालेंगे। यह यात्रा मथुरा से निकलेगी। इससे पहले एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर की शिवपाल के साथ बैठक हो चुकी है, लेकिन उन्होंने इन दलों से साथ गठबंधन से इनकार किया। इतना ही नहीं शिवपाल ने 11 अक्तूबर तक सपा से गठबंधन की डेडलाइन तय कर धर्मयुद्ध शुरू करने की दुहाई देकर हलचल मचा दी है।
यात्राएं तो अपनी तैयारी व ताकत दिखाने का बहाना हैं। यह यात्राएं दोनों को एक जाजम पर बैठने के लिए विवश भी कर सकती हैं। फिलहाल देखना यह है कि चाचा-भतीजे विधानसभा चुनाव में साथ नजर आते हैं या एक-दूसरे पर हमलावर होते हैं।
प्रसपा के लिए अहम है यह यात्रा
शिवपाल भले चुनावी चौसर के महारथी माने जाते हैं, लेकिन उनकी पार्टी के लिए यह पहला चुनाव है। इस चुनाव से उनके बेटे आदित्य यादव का सियासी भविष्य भी जुड़ा है। क्योंकि करीब छह माह से शिवपाल पर्दे के पीछे नजर आते हैं और आदित्य फ्रंटफुट पर।
शिवपाल के खास सिपहसलारों की भी ख्वाहिश है कि नए नेतृत्व के रूप में आदित्य आगे बढ़ें। यही वजह है कि उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। मथुरा से निकलने वाली रथयात्रा का नेतृत्व भी उन्हें सौंपा गया है।