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चार राज्यों में सपा साफ, बसपा हुई हाफ
राजेंद्र सिंह/लखनऊ
Updated Mon, 09 Dec 2013 07:38 PM IST
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समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी चार राज्यों के विधानसभा चुनावों में कोई करिश्मा नहीं दिखा पाईं। पिछले चुनाव की तुलना में न केवल उनकी सीटें घटीं, वोट प्रतिशत भी कम हो गया।
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हालांकि जिन चार राज्यों के चुनावी नतीजे रविवार को घोषित हुए हैं उनमें दो में कांग्रेस और दो में भाजपा की सरकार थी।
मुख्य मुकाबला भी इन्हीं के बीच था लेकिन तीसरा कोण बनने के लिए सपा और बसपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी।
यूपी के इन दोनों बड़े दलों के स्टार प्रचारकों ने इन राज्यों में कई सभाओं को संबोधित किया। पर चुनाव परिणाम से उन्हें झटका लगा है। नतीजों के प्रारंभिक विश्लेषण के मुताबिक दोनों दलों को पिछली बार से कम वोट मिले हैं।
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नहीं खुला खाता, पंक्चर हुई साइकिल
चार राज्यों के नतीजे सपा की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सपा का खाता भी नहीं खुल सका। पिछली बार सपा को मध्य प्रदेश और राजस्थान में एक-एक सीट मिली थी।
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सपा ने भाजपा-कांग्रेस के तीसरे मोर्चे की ताकतों को मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए चारों राज्यों में प्रत्याशी उतारे।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव प्रचार के लिए गए। सपा नेता लगातार दावा कर रहे थे कि भाजपा और कांग्रेस शासित राज्यों में जनता की निगाहें तीसरे विकल्प पर हैं।
पढ़ें-आखिरी नतीजे! कौन जीता... कौन हारा
तीसरे मोर्चे का सबसे बड़ा दल होने के नाते सपा से लोगों को बहुत उम्मीदें हैं। चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया कि वोटरों ने सपा को विकल्प मानना तो दूर खाता खोलने तक के लिए तरसा दिया।
2008 के विधानसभा चुनाव में सपा ने मध्यप्रदेश में 187 सीटों पर चुनाव लड़कर एक सीट जीती थी। इस बार भी सपा ने सौ से ज्यादा प्रत्याशी उतारे। डेढ़ दर्जन उम्मीदवार गंभीर माने जा रहे थे लेकिन उनमें से कोई भी खाता नहीं खोल पाया।
राजस्थान में पिछली बार सपा ने 64 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया था। उसे एक सीट मिली थी। इस बार कोई सीट नहीं मिल पाई।
दिल्ली और छत्तीसगढ़ में भी उसका कोई प्रत्याशी नहीं जीत सका। जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं, उनमें दो भाजपा और दो कांग्रेस शासित थे लेकिन सपा को गैर कांग्रेस-गैर भाजपा का नारा उछालने का कोई लाभ नहीं मिला।
17 से आठ सीटों पर ठिठका हाथी
यूपी में सत्ता से बेदखल होने के बाद बसपा को चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी झटका लगा है।
लोकसभा चुनावों से पहले इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की पार्टी की रणनीति कामयाब नहीं हो सकी।
दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी को 17 सीटें मिली थीं। इस बार सीटों का आंकड़ा आठ पर सिमट गया।
बसपा ने 2008 के विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और राजस्थान में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। दिल्ली व छत्तीसगढ़ में पार्टी को दो-दो, मध्य प्रदेश में सात, राजस्थान में छह सीटें मिली थीं।
बाद में बसपा के सभी विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। राजस्थान में पार्टी को इस बार तीन सीटें ही मिलीं। मध्यप्रदेश में भी सीटें बढ़ने की जगह घटी हैं। बसपा यहां चार सीटों तक सिमट गई।
पार्टी को छत्तीसगढ़ में जरूर पिछली बार जितनी दो सीटें मिली हैं लेकिन दिल्ली में पार्टी पूरी तरह से साफ हो गई।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन राज्यों में प्रदर्शन के लिए जोरदार प्रचार अभियान चलाया था। लोकसभा चुनाव से पहले बसपा राज्यों में अपने प्रदर्शन से बड़ा संदेश देना चाहती थी।
मगर विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कांग्रेस विरोधी लहर में वह दिल्ली के साथ ही दूसरे राज्यों में अपनी ताकत बढ़ाने की जगह घटा बैठी।