11 वजहें, सोनिया पर भारी पड़ेगा ये चुनाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहीं राहुल गांधी का काफिला रोककर महंगाई पर सवाल दाग दिया जाता है तो कहीं काले झंडे दिखाए जाते हैं।
पार्टी कार्यकर्ताओं कीबैठक में प्रियंका से इतने सवाल कर दिए जाते हैं कि उन्हें अपनों के बीच असहज होना पड़ता है। बख्शा तो सोनिया गांधी तक को नहीं जाता।
एक बंद होती फैक्ट्री की बेरोजगार हुई महिलाएं उनका काफिला रोक लेती हैं और पूछती हैं कब खुलेगी हमारी फैक्ट्री? लोग चौंकते तब हैं जब विधानसभा चुनाव में भी गांधी परिवार की तमाम अपीलों को दरकिनार कर पांचों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को करारी पटकनी दे दी जाती है।
यह रायबरेली के बदलते तेवर हैं। गांधी परिवार के प्रति आस्था भाव रखने वाला जिला अब उनसे सवाल-जवाब करने लगा है। खासतौर से नई पीढ़ी।
हारेंगी नहीं, पर सामने होंगी मुश्किलें
इसका यह मतलब नहीं कि सोनिया गांधी यहां से चुनाव हार जाएंगी, पर सवाल-जवाब का यह सिलसिला बरकरार रहा और विरोधी पक्ष कोई बड़ा चेहरा सामने ले आया तो मुश्किलें जरूर खड़ी होंगी।
सोनिया को जीत का अपना पिछला चुनावी अंतर सहेज पाना बड़ी चुनौती बनेगा। यह भी नहीं कहा जा सकता कि सोनिया गांधी अपने क्षेत्र से नि:स्पृह रहीं।
पिछले साढ़े चार साल के दौरान क्षेत्र को उन्होंने एम्स व रेल पहिया कारखाना जैसी विकास की अनेक योजनाओं की सौगात दी।
पर पानी-बिजली को लेकर किसानों और विकास की बड़ी योजनाओं में क्षेत्र के लोगों को नौकरी न मिलने के कारण नौजवानों में नाराजगी है।
नहीं चलेगा सियासी लॉलीपॉप से काम
विधानसभा चुनाव में यह नाराजगी राजनीतिक तौर पर मुखरित हुई। दस जनपथ की आंख भी तभी खुली। क्षेत्र के बदले मिजाज को महसूस करते हुए उन्होंने प्रस्तावित विकास योजनाओं को न केवल धड़ाधड़ अमलीजामा पहनाना प्रारंभ किया बल्कि संगठन को भी गांवों की तरफ मोड़ा।
लेकिन इन चुनावी मिन्नतों से रूठों को कितना मनाया जा सकता है, अभी कहना जल्दबाजी होगी।
आम आदमी पार्टी से जुड़े रामविलास कहते हैं कि इस बार सोनिया को चुनौती व्यक्ति से नहीं, मुद्दों से मिलेगी। भ्रष्टाचार बड़ा सवाल है। पानी-बिजली व रोजगार की समस्या से लोग त्रस्त हैं। एम्स या रेल कारखाने के लॉलीपॉप से काम नहीं चलेगा।
'सोनिया का निकलना दूभर कर दूंगी' बंद पड़ी टेक्सटाइल फैक्ट्री शीना की रंजना तिवारी कहती हैं, विधानसभा चुनाव से पहले मैडम ने फैक्ट्री खुलवाने का वादा किया था, अब मुकर रही हैं।
सोनिया बताएं, क्या किया समाधान?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नौकरी सिर्फ उन लोगों को मिली जिनकी जमीन फैक्ट्री में गई। वह भी चतुर्थ श्रेणी में।
हम चाहते हैं कि ऐहार ग्रामसभा में फैक्ट्री की तरह बिजली दे दी जाए, पर यह छोटी मांग भी ठुकरा दी गई।
वहीं, भाजपा नेता अजय मिश्रा कहते हैं खीरों, सतांव, सरेनी व बछरावां में पानी में फ्लोराइड की समस्या पिछले 10 सालों से है।
सोनिया गांधी बताएं कि इससे निपटने के लिए क्या किया गया? कांग्रेस की नजर सड़कों पर रही, खेत-खलिहानों की तरफ नहीं गई।
सतह पर आ गई कांग्रेस की अंतर्कलह
चुनावी माहौल में जिला स्तर पर कांग्रेस की अंतर्कलह भी सोनिया के लिए सुखद नहीं है।
अपने कमरे में डॉ. लोहिया की तस्वीर टांगने वाले जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष बच्चूलाल शुक्ल खुलकर कहते हैं कि सोनिया हार तो नहीं सकतीं पर पुरानी स्थिति को बरकरार रखने के लिए जिला कांग्रेस की तस्वीर बदलनी होगी, अकर्मण्य नेताओं से छुटकारा पाना होगा।
जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के साथ ब्राह्मणों में पसरी नाराजगी भी दूर करनी होगी। सवाल तो सोनिया के सांसद प्रतिनिधि की कार्यशैली पर भी उठ रहे हैं।
समाजवादी पृष्ठभूमि के वकील जयप्रकाश सिंह कहते हैं कि अब रायबरेली का मिजाज बदल रहा है। कांग्रेस विरोध में तल्खी भी देखी जा सकती है।
कितना संभाल पाएंगी प्रियंका गांधी
ऐसा नहीं कि लोगों के इस गुस्से की भनक 10 जनपथ को नहीं है। गुस्से पर पानी डालने का जिम्मा फिलहाल प्रियंका गांधी ने उठाया है।
कभी मां केसाथ तो कभी अकेले ही रायबरेली आकर नाराज लोगों को पुचकारने और संगठन सुधारने में वह दिलचस्पी ले रही हैं।
कांग्रेसियों को गांव-गांव भेज केंद्र सरकार की उपलब्धियां बताई जा रही हैं। गांधी परिवार और कांग्रेस से कई पीढ़ियों का नाता रखने वाले दिनेश शुक्ल कहते हैं कि पिछले सालों में जितना विकास कार्य रायबरेली में हुए शायद देश के किसी लोकसभा क्षेत्र में नहीं हुए।
रायबरेली और कांग्रेस (गांधी परिवार) एक दूसरे के पूरक हैं, किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
हाशिये से बाहर आ रहा विपक्ष
सोनिया के खिलाफ लड़ने का मतलब विरोधी दल भी जानते हैं, इसलिए आधे-अधूरे मन से किसी को भी खानापूर्ति के लिए टिकट दे दिया जाता था। प्रत्याशी भी हकीकत से वाकिफ होता इसलिए जी-जान से नहीं जुड़ता था।
वैसे इस बार विरोधी दलों की तैयारी अपेक्षाकृत ज्यादा है। भाजपा के जिलाध्यक्ष अजय त्रिपाठी कहते हैं कि जुलाई तक हम हाइबरनेशन में थे, कोई हमसे जुड़ने में दिलचस्पी नहीं लेता था।
पर मोदी फैक्टर प्रभावी होने के बाद माहौल बदल गया है।
कोई बड़ा चेहरा प्रत्याशी बना तो हम चुनौती देने की स्थिति में होंगे। बसपा ने दो बार प्रत्याशी बदलकर अब बाराबंकी निवासी प्रवेश सिंह को प्रत्याशी बनाया है। पर अभी तक उनकी सक्रियता चंद होर्डिंग व बैनरों तक ही सीमित है।
सोनिया के खिलाफ ताल ठोंकेगी 'आप'
वहीं आम आदमी पार्टी ने सोनिया के खिलाफ ताल ठोंकने का मन बना लिया है।
‘आप’ के रामविलास कहते हैं कि आप उम्मीदवार के सवालों को मात्र इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकेगा कि सोनिया गांधी राजनीति की बड़ी शख्सियत हैं।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने सोनिया के खिलाफ प्रत्याशी न लड़ाने का ऐलान कर दिया है।
हालांकि, पहली बार के विधायक मनोज पांडेय को अखिलेश सरकार में काबीना मंत्री बनाकर जिस तरह कद बढ़ाने का प्रयास किया गया, उससे साफ है कि सपा दबाव की राजनीति से बाज नहीं आएगी।
यहां कारखानों का कब्रिस्तान भी
एक ओर नई-नई फैक्ट्रियों की आलीशान इमारतें खड़ी हो रही हैं, वहीं जिले में कारखानों का कब्रिस्तान भी बढ़ा है। एक मोटे अनुमान के अनुसार पिछले 20 वर्षों के दौरान जिले में 20 उद्योग और 25 छोटी-मोटी इकाइयां बंद हुईं।
इससे करीब 25 हजार लोग बेरोजगार हुए। श्रमिक नेता डीसी मिश्रा की मानें तो ज्यादातर कारोबारी यहां इंडस्ट्री चलाने की नीयत से आए ही नहीं थे।
कुछ का मकसद सब्सिडी हथियाना था तो कुछ अपनी छोटी-मोटी इंडस्ट्री के जरिए केंद्र सरकार से अपने कुछ और बड़े काम करवाना चाहते थे।
स्थानीय नेताओं की बाहर के फैक्ट्री मालिकों से वसूली भी फैक्ट्रियों के बंद होने के पीछे एक कारण है।
2012 चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ
पांच विधानसभा सीटों में से चार पर सपा और एक पर पीस पार्टी का कब्जा।
लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी को मिले वोट: 4,81,490
जीत का अंतर: 3 लाख 72 हजार
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों की स्थिति-
रायबरेली सदर-35660, ऊंचाहार-47898 सरेनी-47593 हरचंदपुर- 37069 बछरांवा-29317
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले कुल वोट-197537
मौजूदा प्रतिनिधित्व
रायबरेली-अखिलेश सिंह- पीस पार्टी
सरेनी-देवेंद्र प्रताप सिंह- सपा
हरचंदपुर- सुरेंद्र विक्रम सिंह- सपा
ऊंचाहार-मनोज पांडेय- सपा
बछरावां (सु)-रामलाल अकेला- सपा
'सोनिया का निकलना दूभर कर दूंगी'
इंटक से जुड़ीं रंजना कहती हैं, मेरे पास 800 बेबस महिलाओं की ताकत है, सोनिया का चुनाव में निकलना दूभर कर दूंगी।
डलमऊ के किसान नेता सुशील यादव कहते हैं, चार साल से बंद जिले की एकमात्र नंदगंज शुगर मिल को लेकर हमारा आंदोलन चल रहा था, पर सोनिया ने मिल की जमीन पर एम्स का शिलान्यास कर दिया। यह हमारे साथ धोखा है।
हम एम्स के विरोधी नहीं, पर चाहते हैं कि पहले चीनी मिल चलवाई जाए। उदास तो ऐहार के ग्रामप्रधान ओमप्रकाश भी हैं जिनकी ग्रामसभा में 3600 करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट आ चुके हैं। वे कहते हैं, ‘आखिर हमें मिला क्या?